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मोदी-शाह को मिले क्लीनचिट का विरोध करने वाले चुनाव आयुक्त का रिकॉर्ड खंगालने में जुटी सरकार

मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को पत्र लिखकर पूछा है कि विद्युत मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कहीं अपने प्रभाव का अनुचित इस्तेमाल तो नहीं किया था. लोकसभा चुनाव के दौरान लवासा ने आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह को चुनाव आयोग द्वारा दी गई क्लीनचिट का विरोध किया था.

अशोक लवासा. (फोटो साभार: चुनाव आयोग)

अशोक लवासा. (फोटो साभार: चुनाव आयोग)

नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की 11 कंपनियों को पत्र लिखकर कहा है कि अपने रिकॉर्ड्स खंगाल कर बताएं कि 2009-2013 के दौरान विद्युत मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कहीं अपने प्रभाव का अनुचित इस्तेमाल तो नहीं किया था.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, यह गोपनीय सूचना विद्युत सचिव की मंजूरी के साथ 29 अगस्त को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) के मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) से मांगी गई है.

इस पत्र में लिखा है, ‘ऐसा आरोप है कि आईएएस अधिकारी अशोक लवासा विद्युत मंत्रालय में जूनियर सेक्रेटरी/अतिरिक्त सचिव/विशेष सचिव के अपने सितंबर 2009 से दिसंबर 2013 के कार्यकाल के दौरान कुछ कंपनियों या उनकी सहयोगी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद के प्रभाव का का अनुचित इस्तेमाल किया.’

पत्र के साथ बिजली मंत्रालय ने 14 कंपनियों की सूची भेजी है जो सभी बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में लगी हुई है और जहां चुनाव आयुक्त की पत्नी नोवेल लवासा ने निदेशक के रूप में कार्य किया है.

इसके साथ ही ए टू जेड समूह की कंपनियों को विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य सरकारों द्वारा प्रदान की गई 135 परियोजनाओं की एक सूची भी भेजी है, जिसमें नोवेल लवासा द्वारा प्राप्त 45.8 लाख रुपये के भुगतान के विवरण हैं.

इसके अलावा 2009-2011 के बीच ए टू जेड अपशिष्ट प्रबंधन लिमिटेड को विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा दी गई 13 बड़ी परियोजनाओं की एक और सूची भेजी गई है, जब अशोक लवासा बिजली मंत्रालय में तैनात थे.

सभी सीवीओ से कहा गया है कि वे ऐसे किसी भी सबूत के लिए अपने रिकॉर्ड्स खंगालें जिसमें अशोक लवासा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया हो और इन कंपनियों से किसी तरह का कोई लाभ हासिल किया हो.

सार्वजनिक क्षेत्र की जिन कंपनियों को ये पत्र मिले हैं उनमें एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन), एनएचपीसी (पूर्ववर्ती राष्ट्रीय जल विद्युत निगम), आरईसी (पूर्व में ग्रामीण विद्युतीकरण निगम) और पीएफसी (पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन) शामिल हैं.

अखबार द्वारा संपर्क किए जाने पर लवासा ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें पत्र के बारे में जानकारी नहीं है.

बता दें कि अशोक लवासा ने लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मौकों पर चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह को चुनाव आयोग द्वारा दी गई क्लीनचिट का विरोध किया था.

इसके बाद लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों के निस्तारण में असहमति का फैसला देने वाले लवासा ने ‘असहमति के मत’ को भी आयोग के फैसले में शामिल करने की मांग करते हुए आयोग की बैठकों का बहिष्कार कर दिया था.

इसके बाद चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों के निस्तारण में आयोग के सदस्यों के ‘असहमति के मत’ को फैसले का हिस्सा बनाने की चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की मांग को 2-1 बहुमत के आधार पर अस्वीकार कर दिया था.

आयोग ने इस मामले में मौजूदा व्यवस्था को ही बरकरार रखते हुए कहा था कि असहमति और अल्पमत के फैसले को आयोग के फैसले में शामिल कर सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.

इसके साथ ही चुनाव आयोग ने आरटीआई अधिनियम के तहत चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की असहमति वाली टिप्पणियों का खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा था कि इस जानकारी को सार्वजनिक करने से किसी व्यक्ति का जीवन या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.

वहीं, अशोक लवासा की बेटी और लेह की जिला चुनाव अधिकारी और उपायुक्त अवनि लवासा ने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के पक्ष में रिपोर्ट करने के लिए जम्मू कश्मीर भाजपा नेताओं द्वारा लेह में मीडियाकर्मियों को लिफाफे में पैसे दिए जाने की शिकायतों को प्रथमदृष्टया सही पाया था और जांच का आदेश दिया था.

इसके साथ ही लेह में ही सेना के अफसरों पर जवानों से उनकी वोटिंग को लेकर पसंद के बारे में पूछे जाने के मामले में संज्ञान लेते हुए अवनि लवासा ने लेह स्थित 14 कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग को एक पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई थी.

आरोप था कि 4-लद्दाख संसदीय क्षेत्र कमांडिंग अधिकारी वोटिंग करने के लिए जवानों को बैलट पेपर देने के बजाय टेलीफोन के माध्यम से उनकी पसंद पूछ रहे हैं.’

इसके बाद सितंबर महीने में अशोक लवासा के परिवार के तीन सदस्यों को आयकर विभाग का नोटिस मिला, जिसमें उनकी पत्नी नोवल सिंघल लवासा, बहन शकुंतला और बेटे अबीर लवासा शामिल हैं. इन सभी को आयकर की घोषणा न करने और अघोषित संपत्ति के आरोप में नोटिस भेजा गया था. इस मामले में कार्यवाही जारी है.

अशोक लवासा की बहन शकुंतला पेशे से बाल रोग चिकित्सक हैं, जबकि उनकी पत्नी नोवल सिंघल लवासा पूर्व बैंकर हैं और कई कंपनियों की निदेशक रह चुकी हैं. जबकि उनके बेटे अबीर लवासा नॉरिश ऑर्गेनिक फूड्स लिमिटेड नामक कंपनी के निदेशक हैं.