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संसद की विभाग संबंधी समितियों की बैठकों में सदस्यों की गैरहाजिरी चिंता का विषय: नायडू

राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि समितियां, विभिन्न विषयों पर तभी पर्याप्त विश्लेषण कर अपनी रिपोर्ट दे सकेंगी जब समितियों के सदस्य इनकी बैठकों में नियमित तौर पर उपस्थित होंगे.

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू. (फोटो: पीटीआई)

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने संसद की विभाग संबंधी समितियों की बैठकों में सदस्यों की अनुपस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उच्च सदन में सभी दलों के नेताओं से इन समितियों की बैठकों में उनके दल के सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आह्वान किया है.

नायडू ने सोमवार से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र की पूर्वसंध्या पर राज्यसभा में सभी दलों के नेताओं की बैठक में कहा कि विभाग संबधी समितियों की बैठकों में सदस्यों के गैरहाजिर रहने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है.

मालूम हो कि हाल ही में दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए आयोजित संसदीय समिति की बैठक में 28 में से महज चार सांसदों ने शिरकत की. गैर हाजिर सांसदों में पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर भी शामिल थे.

राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी बयान के अनुसार नायडू ने बैठक में सभी दलों के नेताओं से समितियों की बैठकों में सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि समितियां, विभिन्न विषयों पर तभी पर्याप्त विश्लेषण कर अपनी रिपोर्ट दे सकेंगी जब समितियों के सदस्य इनकी बैठकों में नियमित तौर पर उपस्थित होंगे.

उन्होंने कानून बनाने में इन समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए कहा, ‘विभिन्न मुद्दों पर प्रस्तावित कानून के मसौदे को समितियों की विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम रूप दिया जाता है. इसलिए समितियों के सभी सदस्य इनकी बैठकों में जरूर शिरकत करें.’

इस दौरान नायडू ने सोमवार से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा में पिछले सत्र की ही तरह आगामी सत्र को भी कामकाज की दृष्टि से कामयाब बनाने की सभी दलों के नेताओं से अपील की.

उन्होंने कहा कि उच्च सदन की कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए सभी सदस्यों ने जो उत्साह और प्रतिबद्धता बजट सत्र में दिखायी थी, उसे आगामी सत्र में भी बरकरार रखना होगा.

नायडू ने कहा, ‘राज्यसभा के 249वें सत्र के दौरान उच्च सदन में बीते कुछ वर्षों में सर्वाधिक काम हुआ था. राज्यसभा का यह 250वां सत्र होने के कारण और भी अधिक महत्वपूर्ण होगा, इसलिए सभी सदस्य पिछले सत्र की तरह ही इस बार भी अपना सकारात्मक रुख बरकरार रखें, जिससे सदन की कार्यवाही को सुचारू बनाते हुए कामकाज के लिहाज से नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकें.’

उल्लेखनीय है कि 1952 में वजूद में आने के बाद सोमवार को राज्यसभा के 250वें सत्र की शुरुआत होगी. राज्यसभा, संसद का कभी विघटित नहीं होने वाला सदन है.

बैठक में नायडू ने संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही को प्रसारित करने वाले टीवी चैनलों लोकसभा टीवी और राज्यसभा टीवी की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने पर सुझाव देने के लिए एक समिति का भी गठन किया.

नायडू ने ट्वीट कर कहा, ‘मैंने लोकसभा टीवी और राज्यसभा टीवी की कार्यप्रणाली के परीक्षण और इसे प्रभावी बनाने पर सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन का किया है. इसका मकसद संसदीय कार्यवाही का प्रसारण आम जनता तक पहुंचाने के लिए दोनों चैनलों पर प्रसारित कार्यक्रमों की गुणवत्ता को बेहतर बनाकर इनके दर्शकों की संख्या को बढ़ाना है.’

उन्होंने सदस्यों को बताया कि इस सत्र के महत्व को देखते हुए राज्यसभा की 1952 से अब तक की यात्रा पर आधारित एक डाक टिकट और पुस्तिका को जारी करने सहित कुछ प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गयी है.

उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान राज्यसभा के 250वें सत्र को यादगार बनाने के लिए 250 रुपये का चांदी का सिक्का और पांच रुपये का एक डाक टिकट भी जारी किया जाएगा. नायडू ने बैठक में सभी दलों के नेताओं को बताया कि 26 नवंबर को 70वें संविधान दिवस के अवसर पर संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक होगी.

बैठक में उपसभापति हरिवंश के अलावा संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद पटेल, संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान राज्यसभा में नेता सदन थावर चंद गहलोत, नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, टीएमसी के नेता सदन डेरेक ओ ब्रायन, सपा के रामगोपाल यादव, वाईएसआर कांग्रेस के विजय साई रेड्डी और बीजद के प्रसन्न आचार्य सहित अन्य दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया.