भारत

व्यापमं घोटाला: पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी के दोषी 31 लोगों को सात से 10 साल की सज़ा

मध्य प्रदेश में व्यापमं घोटाले से जुड़े 150 मामलों में से 14वें केस में विशेष सीबीआई अदालत का यह फैसला आया है. यह पहली बार है जब व्यापमं घोटाले में इतनी बड़ी तादाद में लोगों को इतनी लंबी अवधि के लिए जेल की सज़ा दी गई है.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

भोपाल: घोटालों के लिए चर्चित मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा 2013 में ली गई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी करने के लिए यहां सीबीआई की अदालत ने बीते सोमवार को 31 लोगों को सात से 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

इस घोटाले के मास्टरमाइंड प्रदीप त्यागी को 10 साल कठोर कारावास की सजा मिली है, जबकि की दोषी करार दिए गए अन्य 30 आरोपियों को सात-सात साल कठोर कारावास की सजा दी गई है.

यह पहली बार है, जब व्यापमं घोटाले में इतनी बड़ी तादाद में लोगों को इतनी लंबी अवधि के लिए जेल की सजा दी गई है.

सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक सतीश दिनकर ने बताया, ‘व्यापमं द्वारा ली गई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा, 2013 के मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसबी साहू ने प्रदीप त्यागी (29) को 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ-साथ 5,000 रूपये का जुर्माना भी लगाया.’

उन्होंने कहा कि अदालत ने प्रदीप त्यागी इस परीक्षा में हेराफेरी करने के लिए दोषी पाया.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, व्यापमं से जुड़े 150 मामलों में से 14वें केस में सोमवार को फैसला आया, लेकिन पहली बार कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी माना.

विशेष लोक अभियोजक दिनकर ने बताया, ‘जज साहू ने इस मामले में 30 अन्य लोगों को सात-सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है और उन पर तीन-तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.’

उन्होंने कहा कि 21 नवंबर को अदालत ने व्यापमं द्वारा 2013 में ली गई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी एवं बेईमानी करने के लिए इन 31 लोगों को दोषी करार ठहराया था और 25 नवंबर को सजा सुनाने की तिथि तय की थी.

दिनकर ने बताया कि जिन लोगों को सजा सुनाई गई है, उनमें 12 बहुरूपिया (दूसरे के बदले परीक्षा देने वाले) और 7 दलाल (परीक्षार्थियों से पैसे लेकर पास करवाने वाले) शामिल हैं. इन 12 बहुरूपियों में से 6 बहुरूपियों को भोपाल के परीक्षा केंद्र से एवं 6 बहुरूपियों को दतिया के परीक्षा केंद्र से पकड़ा गया था.

दैनिक भास्कर के अनुसार, अदालत ने राहुल पांडे, आशीष कुमार पांडे, कुलविजय, अभिषेक कटियार, सुयश सक्सेना, प्रभाकर शर्मा, नीरज उर्फ टिंकू, अनिल यादव, अजय सांकेरवार, धरमेश साहू, फूलकुंवर, देवेंद्र साहू, अजीत चौधरी, भूपेंद्र सिंह तोमर, संतोष शर्मा, चंद्रपाल कश्यप, पंजाब साहू, रविशंकर, नावीस जाटव, मुकेश साहू, अरुण गुर्जर, उदयभान साहू, दानिश धाकड़, अंतनदर साहू, पृथ्वेंद्र साहू तोमर, सुदीप शर्मा, अजय प्रताप साहू, कल्यानी साहू सिकरवार, गुलवीर सिंह जाट और राजवीर सिंह उर्फ बंटी को 7-7 साल की सजा सुनाई.

विशेष लोक अभियोजक दिनकर ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने इस परीक्षा में धोखाधड़ी करने के लिए इन आरोपियों को सजा दिलाने के लिए 91 गवाह एवं कई साक्ष्य पेश किए थे.

उन्होंने बताया कि इन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468 एवं 471 के तहत मामला दर्ज किया गया था.

मालूम हो कि व्यापमं द्वारा मध्य प्रदेश की विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए ली गई भर्ती परीक्षाओं एवं प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में पिछले कई वर्षों में कथित रूप से अनियमितता कर करोड़ों रुपये के घोटाले हुए और इसमें तत्कालीन मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव (अब दिवंगत) भी घिर गए थे.

उनके अलावा इस घोटाले में अनेक पेशेवर व्यक्ति, मंत्री, नेता, नौकरशाह, दलाल एवं छात्र अभियुक्त हैं. इनमें से एक मंत्री सहित कुछ लोग जेल भी रह चुके हैं.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई ने व्यापमं घोटाले में 170 एफआईआर दर्ज की थीं. इनमें से 143 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, 7 मामलों की जांच जारी है. रिपोर्ट के अनुसार, इससे जुड़े केसों में 2500 से ज्यादा लोग आरोपी हैं, जिनमें से करीब 1000 परीक्षार्थी हैं. जुलाई 2015 से सीबीआई इस घोटाले की जांच कर रही है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)