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सहारनपुर हिंसा के बाद सोशल मीडिया से 3 लाख आपत्तिजनक पोस्ट हटाए गए: एसएसपी

पुलिस के मुताबिक, फेसबुक के 74 अकाउंट, ट्विटर के 35 और यूट्यूब के 32 अकाउंट फिलहाल बंद करवाए गए हैं.

Saharanpur Clash PTI

सहारनपुर में शुक्रवार को जमकर मारपीट और आगजनी हुई.(फोटो:पीटीआई)

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पिछले दिनों हुए जातीय हिंसा के चलते प्रदेश प्रशासन ने सोशल मीडिया के 140 अकाउंट और लगभग 3 लाख पोस्ट को हटाए गए हैं. सोशल मीडिया के ज़रिये फैलाए जा रहे अफवाहों के मद्देनज़र प्रशासन ने ये फैसला लिया.

सहारनपुर में दलितों और ठाकुर समुदाय के बीच हुई हिंसा के चलते 24 मई से ही इंटरनेट सेवा पर प्रशासन ने अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी गई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार सहारनपुर के एसएसपी बबलू कुमार ने बताया, ‘सोशल मीडिया के माध्यम से ज़िले में अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है. हमने फेसबुक के 74 अकाउंट, ट्विटर के 35 और यूट्यूब के 32 अकाउंट को फिलहाल बंद करवा दिया है. साथ ही सोशल मीडिया से तकरीबन 3 लाख आपत्तिजनक पोस्ट डिलीट किए गए हैं.’

वे आगे कहते हैं, ‘हाल की हिंसा के बाद हमारी साइबर सेल टीम सोशल मीडिया पर कड़ी नज़र बनाए हुए हैं ज़िले की शांति बिगाड़ने से संबंधित किसी भी तरह के पोस्ट पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.’

सहारनपुर में हुई हिंसा के बाद कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया कथित रूप से दंगे को भड़काने का काम कर रहा है. 9 मई के दंगों के बाद पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया है. जिन्होंने फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर भावनाएं आहत और हिंसा भड़काने वाले पोस्ट डालने वालों को गिरफ्तार कर लिया है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी को सौंपी रिपोर्ट में सोशल मीडिया का भी उल्लेख किया है. प्रदेश पुलिस के साइबर सेल ने यह भी कहा है कि पिछले तीन महीनों में पूरे प्रदेश में सहारनपुर ज़िला सोशल मीडिया पर सबसे अधिक सक्रिय है.

मिश्रा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसके बारे में दावा किया जा रहा है वह सहारनपुर हिंसा के ख़िलाफ़ धरना दे रहे हैं. जबकि यह वीडियो का है, जब वह तत्कालीन सरकार के ख़िलाफ़ विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे.

ग़ौरतलब है कि बुधवार और गुरुवार को भीम आर्मी के चंद्रशेखर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने होने वाले दलित महिला पंचायत में पुलिस को खुली चेतावनी दी है कि पंचायत में उन्हें गिरफ्तार करके दिखाए. उन्होंने पुलिस को चेतवानी देते हुए यह भी कहा कि वो किसी से डरते नहीं हैं.

यह भी कहा जा रहा है कि चंद्रशेखर का ये वीडियो हरिद्वार से अपलोड किया गया था. उत्तर प्रदेश प्रशासन ने उत्तराखंड पुलिस से इस संबंध में पूरी जानकारी मांगी है.

प्रशासन ने फिलहाल किसी भी नेता के ज़िले में आने पर रोक लगा दी है. अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट (प्रवर्तन) एसके दुबे ने यह दिशानिर्देश जारी किया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए दुबे ने कहा है, ‘हमने ज़िले में धारा 144 लगा दी है, जिसके तहत कोई भी नेता जिले में प्रवेश नहीं कर सकता है.’

दुबे कहते हैं कि ये रोक 9 जुलाई तक जारी रहेगी. साथ ही हड्डियों और मांस सहित पशु अवशेषों का परिवहन भी ज़िले में प्रतिबंधित होगा.