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भारत में एक दशक में हुए एक करोड़ 20 लाख बाल विवाह: रिपोर्ट

साल 2011 की जनगणना में पाया गया कि तकरीबन 70 लाख लड़कों की शादी 21 साल से कम उम्र में जबकि लगभग 52 लाख लड़कियों का विवाह 18 साल से कम उम्र में हो गया था.

Child Marriages Reuters

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह के मामलों के अधिक होने की आम धारणा से विपरीत एक ताज़ा रिपोर्ट में शहरी क्षेत्रों में लड़कियों के 18 साल से कम उम्र में शादी किए जाने के ज्यादा मामले सामने आए हैं.

इन आंकड़ों से चिंतित राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने बाल विवाह को लेकर ख़ास कर शहरी इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है.

ग़ैर सरकारी संस्था यंग लाइव्ज ने एनसीपीसीआर के साथ मिलकर एक अध्ययन किया और बीते सप्ताह उसके अध्ययन पर आधारित एक रिपोर्ट जारी की गई जिससे यह स्पष्ट है कि देश में तमाम सरकारी, ग़ैर सरकारी और सामाजिक प्रयासों के बावजूद बाल विवाह की समस्या बरक़रार है. हालांकि बाल विवाह में गिरावट आई है.

साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 2001 से 2011 के दौरान देशभर में राष्ट्रीय स्तर पर लड़कियों के बाल विवाह में 0.1 फीसदी की कमी आई, लेकिन शहरी क्षेत्रों में इसके पहले के दशक के मुकाबले ख़ासी बढ़ोतरी हुई.

एनसीपीसीआर और यंग लाइव्ज की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2011 की जनगणना में पाया गया कि देश में एक दशक के भीतर कुल 1.2 करोड़ बाल विवाह हुए जिनमें 69.5 लाख लड़के थे जिनकी 21 साल से कम उम्र में शादी हो गई और 51.6 लाख लड़कियां थीं जिनकी उम्र शादी के वक्त 18 साल से कम है.

देश के 13 राज्यों के 70 जिलों के आंकड़ों के आधार पर बनी रिपोर्ट में कहा गया है कि बाल विवाह के मामले में राजस्थान की स्थिति सबसे ख़राब है. राजस्थान में 4.69 फीसदी लड़कों की शादी 21 साल से कम उम्र में हुई. इसी तरह राज्य की 2.5 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में हो गई.

आज तक की रिपोर्ट में बताया गया कि राजधानी दिल्ली के नज़दीक गाज़ियाबाद और मुंबई के बाहरी इलाके में भी बाल विवाह काफी संख्या में हुए हैं. सर्वे के अनुसार 10-14 आयु के बीच बच्चों का बाल विवाह कम तो हुआ है, लेकिन फिर भी 11 लाख लड़के और 18 लाख लड़कियों का बाल विवाह हुआ है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक राज्य बाल अधिकार आयोग की सदस्य वनिता तोरवी का कहना है कि कर्नाटक में हर साल 80-90 बाल विवाह के मामले सामने आते है.

रिपोर्ट के अनुसार साल 2001 में शहरी क्षेत्रों में लड़कियों के बाल विवाह के मामले 1.78 फीसदी थे जो साल 2011 में बढ़कर 2.45 फीसदी हो गए.

एनसीसीपीआर के सदस्य यशवंत जैन ने कहा, ‘शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह की यह स्थिति चिंता का विषय है. अब तक हमें जो बातें समझ में आई हैं, उससे यही लगता है कि शहरों में बाल विवाह के मामले बढ़ने की कई वजहें हैं. एक वजह ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का शहरी क्षेत्रों में पलायन भी है. दूसरी वजहें परंपरा, अशिक्षा और सामाजिक जागरूकता का अभाव हैं.

जैन ने कहा, जिन ज़िलों और क्षेत्रों में बाल विवाह के मामलों में इज़ाफा हुआ है वहां के प्रशासन और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर हम जागरूकता अभियान चलाएंगे. जागरूकता बढ़ाकर इस सामाजिक बुराई को दूर किया जा सकता है.

राजस्थान में बाल विवाह की स्थिति के बारे में यशवंत जैन ने कहा, राजस्थान में इस समस्या की सबसे बड़ी वजह पुराने समय से चली आ रही परंपरा है. परंतु आज के दौर में इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता. प्रशासन और समाज को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)