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सीबीआई ने सैन्य मुख्यालय में तबादला रैकेट का किया भंडाफोड़, दो गिरफ़्तार

पैसा लेते हुए एक अधिकारी और एक बिचौलिया गिरफ़्तार, बड़े अधिकारियों के भी लिप्त होने का संदेह.

फोटो: पीटीआई

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सीबीआई ने आज 3 जून को नई दिल्ली स्थित सैन्य मुख्यालय में कथित स्थानांतरण रैकेट के संबंध में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक बिचौलिए को गिरफ़्तार किया है. आरोप है कि सैन्य अधिकारियों ने उनकी तैनाती में हेरफेर करने के लिए लाखों रुपये दिए थे.

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि सेना के कार्मिक डिवीजन में तैनात लेफ्टिनेंट रंगनाथन सुब्रमणि मोनी और बिचौलिए गौरव कोहली को उस समय गिरफ़्तार किया जब बेंगलूरु में रह रहे एक सैन्य अधिकारी के तबादले के लिए दो लाख रुपये की कथित रिश्वत दी जा रही थी.

जांच एजेंसी को कुछ सैन्य अधिकारियों की अवैध गतिविधियों का पता चला था जिसके बाद दो लोगों को गिरफ़्तार करने के लिए जाल बिछाया गया.

सूत्रों ने बताया कि सेना ने यहां मुख्यालय में तैनात वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की संलिप्तता वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया. सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इस खुलासे से सेना में हलचल मचनी तय है क्योंकि कुछ और वरिष्ठ अधिकारियों के भी इस मामले में लिप्त होने का संदेह है.

प्राथमिकी में डीडीजी कार्मिक ब्रिगेडियर एस के ग्रोवर का भी नाम है लेकिन आरोपियों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया. मोनी, हैदराबाद में रह रहे सैन्य अधिकारी पुरुषोत्तम, बैरक एवं स्टोर अधिकारी (बीएसओ) बेंगलूरु एस सुभाष और कथित बिचौलिए गौरव कोहली के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है.

सीबीआई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि यह रिश्वत हवाला माध्यमों के ज़रिये दी जा रही थी. एजेंसी इस पर भी ध्यान दे रही है कि सैन्य अधिकारी अपनी पसंद की जगह पर तैनाती पाने के लिए किस प्रकार लाखों रुपये देने के लिए तैयार थे.

ऐसा आरोप है कि मोनी ने कोहली एवं सैन्य अधिकारी पुरुषोत्तम के साथ मिलकर विभिन्न अधिकारियों के तबादलों को प्रभावित करने के लिए एक आपराधिक षड़यंत्र रचा.

काकीनाडा में इंजीनियर स्टोर्स विभाग में तैनात एक सैन्य अधिकारी पुरुषोत्तम ने उन सैन्य अधिकारियों से कथित रूप से संपर्क किया जिन्हें या तो विभिन्न फील्ड फार्मेशंस में तैनात किया गया या जिनका जल्द ही तबादला होना था और जो उनके पसंदीदा स्थलों पर तैनाती पाना चाहते थे.

वह कोहली से संपर्क किया करता था जिसके यहां सैन्य मुख्यालय के कार्मिक विभाग में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से निकट संबंध थे. प्राथमिकी में कहा गया है कि कोहली ने बड़े अवैध लाभ के बदले सैन्य अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए इन संपर्कों का इस्तेमाल किया.

इसमें दावा किया गया है कि पुरुषोत्तम ने कोहली से कथित अनुरोध किया कि वह रिश्वत के बदले में डी एस आर के रेड्डी और सुभाष का तबादला कराए. दोनों बेंगलूरू से सिंकदराबाद या विशाखापत्तनम में तैनाती चाहते थे.

इसमें आरोप लगाया गया है कि मोनी ने भरोसा दिलाया कि वह अवैध धन के बदले सैन्य मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के जरिए सुभाष के स्थानांतरण में मदद करेंगे. सुभाष ने कोहली को हवाला माध्यम से रिश्वत के तौर पर पांच लाख रुपये कथित रूप से दिए.

सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया है, कोहली मोनी के आवास पर गया और उसने दिल्ली में सैन्य मुख्यालयों में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. सूचना में भी खुलासा किया गया कि मोनी सुभाष के तबादले के मामले के लिए सैन्य मुख्यालय के डीडीजी (कार्मिक) बिग्रेडियर एस के ग्रोवर के संपर्क में थे. ऐसा आरोप है कि सुभाष के तबादले के लिए कोहली मोनी को दो लाख रुपये देने वाले थे.