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छत्तीसगढ़ आईटीबीपी गोलीबारी: जवान ने नहीं की आत्महत्या, परिजनों का दावा- गोली पीछे से चली थी

बीते चार दिसंबर को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर ज़िले में आईटीबीपी की 45वीं बटालियन में शामिल कॉन्स्टेबल मसूदुल रहमान ने कथित तौर पर पांच जवानों की गोली मारकर हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली थी. मसूदुल रहमान के भाई ने कहा कि उनके शव पर पीछे की तरफ गोली लगने का निशान है. परिवार ने मामले की जांच की मांग की है.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

नकाशिपारा: भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कॉन्स्टेबल का शव पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में उनके घर पहुंचने के बाद बीते गुरुवार को उनके परिजनों ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों के दावों के विपरीत कॉन्स्टेबल ने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि उनकी हत्या हुई थी.

आईटीबीपी के कॉन्स्टेबल मसूदुल रहमान (28) पर अपने पांच सहकर्मियों को छत्तीसगढ़ में गोली मारने का आरोप है. उनके परिजनों ने कहा कि वे रहमान की शादी की तैयारी कर रहे थे.

मसूदुल रहमान का शव दोपहर में नदिया जिले में नकाशिपारा पुलिस थानांर्गत उनके गांव बिलकुमारी पहुंचा जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया.

रहमान के भाई मिजानुर रहमान ने पूछा, ‘उन्हें पीछे से गोली मारी गई. हमने उनका शव देखा था. क्या कोई आत्महत्या करते वक्त अपने ऊपर पीछे से गोली चला सकता है?’

उन्होंने मसूदुल रहमान की मौत की जांच की मांग की.

बीते चार दिसंबर को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के केदनार गांव में स्थित आईटीबीपी की 45वीं बटालियन में यह घटना हुई. रहमान ने आपस में किसी विवाद के चलते कथित तौर पर अपने पांच सहकर्मी जवानों को गोली मार दी थी और दो को घायल कर दिया था.

घटना छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के एक गांव में स्थित आईटीबीपी की 45वीं बटालियन में हुई थी.

आईटीबीपी की बस्तर रेंज के महानिरीक्षक सुंदरराज ने पहले कहा था कि यह स्पष्ट नहीं था कि रहमान ने खुद को गोली मारी या जवाबी गोलीबारी में उसके साथियों ने गोली चलाई.

बाद में आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक कुमार पांडेय ने नई दिल्ली में कहा था कि रहमान ने अपने सहकर्मियों को मारने के बाद खुद को गोली मार ली थी.

बीते चार दिसंबर को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के प्रवक्ता ने कहा था कि नारायणपुर जिले के केदनार गांव में इस बल के शिविर में मुख्य आरोपी रहमान ने सुबह करीब साढ़े आठ बजे पांच अन्य की हत्या करने के बाद खुद को गोली मार ली थी.

अधिकारियों ने बताया कि रहमान को छुट्टी मिल गई थी और जिस दिन यह घटना घटी, उस दिन वह घर जाने वाला था. रहमान ने अपने यूनिट कमांडर से जुलाई में कहा था कि वह दिसंबर में घर जाने के लिए छुट्टी लेगा.

अधिकारियों ने कहा, ‘कुछ जवानों के साथ उसका कुछ विवाद हुआ था. अतीत में उनके बीच कुछ कहासुनी हुई थी. फिलहाल सटीक वजह का पता नहीं चला है.’

आईटीबीपी ने कोर्ट ऑफ इनक्वॉयरी का आदेश दिया है जो उपमहानिरीक्षक स्तर के अधिकारी की निगरानी में होगी. दो घायल जवानों में कॉन्स्टेबल एसबी उल्लास की हालत गंभीर है जबकि कॉन्स्टेबल सीताराम खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं.

ये सभी जवान आईटीबीपी की 45वीं बटालियन से जुड़े थे. इस बटालियन को राज्य में नक्सल विरोधी अभियान पर लगाया गया है.

आईटीबीपी जवान ने दूसरे की राइफल से की थी पांच जवानों की हत्या: सूत्र

छत्तीसगढ़ में आईटीबीपी के एक शिविर में कथित गोलीबारी की घटना की प्राथमिक जांच से पता चला है कि जिस जवान ने अपने पांच साथियों की हत्या की थी, उसने ऐसा करने के लिए अन्य जवान की बंदूक का इस्तेमाल किया था. सूत्रों ने यह जानकारी दी.

सूत्रों ने बताया कि कॉन्स्टेबल मसूदुल रहमान का पांच जवानों से विवाद हो गया था और बुधवार को उसने उन पर गोली दागने के लिए अचानक कॉन्स्टेबल बिजीश की एके-47 राइफल उठा ली.

सूत्रों के मुताबिक, रहमान के पास अपना हथियार नहीं था क्योंकि उन्होंने छुट्टी मंजूर हो जाने के बाद उसे इकाई के आयुध विभाग में जमा करा दिया था.

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से यह भी सामने आया कि रहमान कॉन्स्टेबल सुरजीत सरकार के साथ मुठभेड़ में मारे गए. कॉन्स्टेबल बिजीश और सरकार मारे गए जवानों में शामिल हैं. इस घटना में जो अन्य जवान मारे गए वे कॉन्स्टेबल बिश्वरूप महतो, हेड कॉन्स्टेबल महेंद्र सिंह और दलजीत सिंह हैं. दो जवान घायल भी हो गए.