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बजरंग दल पर ख़बर करने गए पत्रकारों को राजस्थान पुलिस ने हिरासत में लिया

पत्रकारों के मुताबिक, उन्हें ख़बर मिली थी कि राजस्थान में बजरंग दल बच्चों व युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहा है. इसी को रिपोर्ट करने के लिए वे दिल्ली से राजस्थान गए थे.

Hanumangarh Rajsthan 1

दिल्ली से राजस्थान रिपोर्टिंग करने गए तीन पत्रकारों को राजस्थान पुलिस ने हिरासत में लेकर कई घंटे तक थाने में बैठाए रखा. पत्रकारों ने दिल्ली और अन्य जगहों से कई नेताओं और अधिकारियों से फोन करवाया, तब जाकर उनको छोड़ा गया. इस दौरान पत्रकारों के साथ अभद्रता भी की गई.

दिल्ली के पत्रकार विजय पांडेय, असद अशरफ और अनुपम राजस्थान के हनुमानगढ़ में रिपोर्टिंग करने गए थे. पत्रकारों ने बताया, ‘हमें सूचना मिली थी कि यहां पर बजरंग दल के लोग बच्चों और युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देते हैं. हमने उनसे बातचीत की जिसमें कैमरे के सामने उन लोगों ने यह सब क़बूल कर लिया. लेकिन बाद में पोल खुल जाने के डर से उन लोगों ने पुलिस बुला ली.’ हनुमानगढ़ जंक्शन थाना पुलिस ने तीनों पत्रकारों को थाने चलने को कहा.

असद अशरफ ने बताया, ‘मैंने अपना असली नाम नहीं बताया था, विजय और अुनपम ने असली नाम बताया था. लेकिन शक होने पर उन लोगों ने आईडी मांगी और जब हमने आईडी नहीं दी तो पुलिस बुला ली. पुलिस आई तो उसने हमें सीधे थाने चलने को कहा. हम सबने पुलिस को अपनी आईडी दिखाई, लेकिन पुलिस ने कहा कि अब थाने चलकर ही बात होगी.’

विजय पांडेय ने बताया, ‘हम सबने कोई ग़लत काम नहीं किया था. असद अशरफ का नाम असली जानबूझ कर नहीं बताया था क्योंकि कुछ ही दिन पहले राजस्थान में पहलू ख़ान की हत्या हुई थी. हमें डर था कि वे लोग मुसलमान पहचान से भड़क सकते हैं. हमने अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा किया था. पुलिस से हमने कुछ नहीं छुपाया, लेकिन पुलिस वालों ने हमारे साथ न सिर्फ़ अभद्रता की, बल्कि थाने ले जाकर धमकी दी कि ‘जूते से मारेंगे’.’

असद ने बताया कि ‘हम लोगों ने बजरंग दल के लोगों से बात करते हुए सबकुछ उगलवा लिया कि कैसे लव जिहाद जैसे मसलों पर युवाओं का ब्रेनवॉश किया जाता है, कैसे उनको ट्रेनिंग दी जाती है. नाबालिग बच्चों को भी आर्म्स ट्रेनिंग दी जाती है. ये बातें इन लोगों ने कैमरे पर क़बूल कर लीं. बाद में इनको लगा कि हमारी हरकतें बाहर आ सकती हैं, इसलिए पुलिस बुला ली.’

पत्रकार विजय पांडेय ने बताया, ‘पुलिस पूरी तरह उनके पक्ष में थी. हमें हिरासत में ले लिया और हम पर आरोप लगाया कि आप लोगों ने हमसे परमिशन क्यों नहीं लिया. हमने अपना पहचान पत्र दिखाया था. अब ये कहां का नियम लागू हो गया कि पत्रकार रिपोर्टिंग पर जाने से पहले पुलिस को सूचना दे?’

असद ने पुलिस पर बजरंग दल से दोस्ती निभाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘हम छत्तीसगढ़ गए तब भी पुलिस से कोई परमिशन नहीं ली. पत्रकार रिपोर्टिंग करने के लिए पुलिस से परमिशन क्यों लेगा? वे सब तो पुलिस के दोस्त ही हैं. अगर पुलिस हमें बिना वजह टार्चर कर सकती है तो रिपोर्टिंग के बारे में बता देने पर वह उन्हें आगाह भी कर सकती है.’

असद ने बताया, ‘हमारे बहुत रिक्वेस्ट करने पर भी पुलिस ने हमें थाने में बिठाया और बदतमीजी से बात की. आते ही एक पुलिस वाले ने हमसे पूछा कि कौन है तू? हमने कहा, जर्नलिस्ट हूं. तो बोला, जर्नलिस्ट क्या होता है? हमने कहा, पत्रकार हूं. तो बोला, अच्छा पत्रकार है तू? चल अभी थाने में बताता हूं तेरी पत्रकारिता आज.’

असद के मुताबिक, ‘गाड़ी में बैठने के बाद हमने अपने सारे पहचान पत्र वगैरह दिखाए और बताया कि हम दिल्ली से स्टोरी करने आए थेे. लेकिन उसने कुछ नहीं सुना और लगातार बदतमीज़ी की. इसके बाद हमने दिल्ली के कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को फोन किया. इसके बाद आईजी को फोन करवाया तो आईजी ने इन लोगों को डांटा. लेकिन इस बीच इन लोगों ने हमें काफ़ी प्रताड़ित किया. मेरे फोन करने पर डीवाईएसपी ममता सारस्वत ने मुझे अपने रूम से भगा दिया. बाहर एएसआई शंभुदयाल स्वामी मुझसे बातचीत करने लगे. बोले, ‘तू कौन है बता. तू संदिग्ध है.’ मेरे परिचय देने के बाद शंभुदयाल ने कहा, ‘अभी बताता हूं पत्रकार क्या होता है. तुझे जूत मारूंगा चाहे सस्पेंड क्यों न हो जाऊं.’ इस पर हमने विरोध दर्ज कराया.’

बाद में जब थाने पर हर तरफ से फोन आने लगे तो डीवाईएसपी ममता सारस्वत ने कहा कि ‘जाने दो. अब मामले को तूल मत दो.’ पत्रकारों का आरोप है कि जूता मारने की धमकी देने वाले एएसआई शंभुदयाल स्वामी ने अपने अभद्र व्यवहार के लिए खेद जताने से भी इनकार कर दिया.