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2016 से 431 अफगान और 2,307 पाकिस्तानी शरणार्थियों को दी गई भारतीय नागरिकता: सरकार

गृहमंत्री अमित शाह ने संसद को बताया कि पिछले पांच साल में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले 560 से अधिक मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी गई.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय. (फोटो: राज्यसभा टीवी/यूट्यूब वीडियो ग्रैब)

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय. (फोटो: राज्यसभा टीवी/यूट्यूब वीडियो ग्रैब)

नई दिल्ली: सरकार ने बुधवार को बताया कि साल 2016 से दिसंबर 2019 तक 431 अफगान और 2,307 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि 2016 से 2018 के दौरान 391 अफगान और 1,595 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई. साल 2019 में छह दिसंबर तक 40 अफगान और 712 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी गई.

मंत्री ने बताया कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहने अल्पसंख्यक समुदायों के शरणार्थियों की नागरिकता के आंकड़े ऑनलाइन करने का प्रावधान 2018 में किया गया.

उन्होंने बताया कि ऑनलाइन आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन साल में 2016 से 2018 तक 91 अफगान और 1,595 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्रदान की गई. साल 2019 में छह दिसंबर तक 40 अफगान और 712 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी गई.

राय ने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए 927 सिखों और हिंदुओं को 2016 से भारतीय नागरिकता प्रदान की गई.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह ने संसद को बताया था कि पिछले पांच साल में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले 560 से अधिक मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी गई.

बुधवार को राज्यसभा से पारित हुए नागरिकता संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है. नागरिकता संशोधन विधेयक में उन मुसलमानों को नागरिकता देने के दायरे से बाहर रखा गया है जो भारत में शरण लेना चाहते हैं.

इस प्रकार भेदभावपूर्ण होने के कारण इसकी आलोचना की जा रही है और इसे भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बदलने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है. अभी तक किसी को उनके धर्म के आधार पर भारतीय नागरिकता देने से मना नहीं किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)