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सियाचिन, लद्दाख में जवानों को नहीं मिल रहा जरूरी खाना: कैग

कैग की रिपोर्ट से पता चला है कि सियाचिन और लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों के पास स्नो ग्लासेस और मल्टीपर्पज जूते नहीं हैं. उनके पास जरूरी भोजन भी उपलब्ध नहीं है. इन इलाकों में बेहद ठंड की वजह से जवानों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

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सियाचिन (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्लीः सियाचिन और लद्दाख जैसे जोखिम भरे इलाकों में तैनात जवानों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट से ये जानकारी सामने आई है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कैग के रक्षा सेवा और सेना से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक, सियाचीन और लद्दाख जैसे मुश्किल पोस्ट्स पर तैनात जवानों की बुनियादी जरूरतों को सरकार पूरा नहीं कर पा रही है.

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, सियाचिन और लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों के पास स्नो ग्लासेस और मल्टीपर्पज जूते नहीं हैं. उनके पास जरूरी भोजन भी उपलब्ध नहीं है. इन इलाकों में बेहद ठंड की वजह से जवानों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

केंद्र सरकार (रक्षा सेवा) पर कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंचाई वाले इलाकों में सेना के जवानों को भोजन की जितनी दैनिक मात्रा की जरूरत होती है, उतनी उन्हें नहीं मिल रही है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जवानों की कैलोरी इनटेक में भी कमी है. जवानों को जो खाना मिल रहा है, उसमें कैलोरी इनटेक 82 फीसदी है. इसके अलावा स्नो ग्लासेस में 62 फीसदी से 98 फीसदी की कमी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जवानों को पुराने मास्क, जैकेट और स्लीपिंग बैग्स दिए जा रहे हैं. कैग रिपोर्ट में कहा गया, ‘जवानों को अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों से महरूम रखा जा रहा है.’

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा प्रयोगशालाओं की अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) की कमी के कारण उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है.

इसके अलावा, ऊंचाई पर तैनात जवानों के लिए उनकी दैनिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेष राशन की व्यवस्था है लेकिन इसकी कमी पड़ जाती है. इससे जवानों की कैलोरी इनटेक से समझौता होता है.

मालूम हो कि कैग की यह रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की गई थी लेकिन इसे लोकसभा में नहीं रखा जा सका.