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देश में आर्थिक नरमी के लिए केवल वैश्विक कारक पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं: शक्तिकांत दास

अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत को विनिर्माण क्षेत्र पर ध्यान देना चाहिए और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनना चाहिए. केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से बुनियादी ढांचे पर खर्च आर्थिक वृद्धि के लिए अहम है. वैश्विक आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए सभी विकसित और उभरती अर्थव्यस्थाओं द्वारा समन्वित और समयबद्ध तरीके से कदम उठाने की आवश्यकता है.

Mumbai: Newly appointed Reserve Bank of India (RBI) governor Shaktikanta Das interacts with the media at the RBI headquarters in Mumbai, Wednesday, Dec. 12, 2018. (PTI Photo/Shashank Parade) (PTI12_12_2018_000178B)

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (फोटो: पीटीआई)

मुंबई: अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि देश में आर्थिक नरमी के लिए केवल वैश्विक कारक पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक आर्थिक नरमी, मुद्रास्फीति में वृद्धि, बैंकों और एनबीएफसी की वित्तीय हालत को दुरुस्त करने के लिए जरूरी कदम उठाएगा. दास ने कहा कि अर्थव्यवस्था पर सूचनाओं और आंकड़ों के आधार पर चर्चा करने की जरुरत है.

दास ने कहा कि रिजर्व बैंक ने समझ लिया था कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ने वाली है और उसने सुस्ती शुरू होने से पहले ही फरवरी से रेपो दर में कटौती शुरू कर दी. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस महीने रेपो दर में कटौती पर लगाई गई रोक सही कदम साबित होगा.

2008 के वित्तीय संकट के बाद वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयासों का आह्वान करते हुए उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध विराम से असर पड़ेगा. बता दें कि पिछले हफ्ते अमेरिका और चीन ने कई महीनों से चल रहे अपने व्यापार युद्ध को खत्म करने की घोषणा की.

दास की यह टिप्पणी इस साल फरवरी से लगातार पांच बार की गई रेपो रेट में कटौती के बाद आई है.

उन्होंने ब्याज दर में कटौती पर रोक लगाने पर कहा, ‘मुझे नहीं पता कि नीतिगत ब्याज दर में कटौती पर फिलहाल रोक लगाने से बाजार क्यों हैरान हैं, इस फैसले पर समय के साथ सही साबित होने की उम्मीद है.’

रिजर्व बैंक द्वारा किए गए 1,539 कंपनियों के सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दास ने कहा कि निवेश चक्र में सुधार के संकेत दिखने शुरू हो गए हैं.

उन्होंने कहा कि भारत को विनिर्माण क्षेत्र पर ध्यान देना चाहिए और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से बुनियादी ढांचे पर खर्च आर्थिक वृद्धि के लिए अहम है. वैश्विक आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए सभी विकसित और उभरती अर्थव्यस्थाओं द्वारा समन्वित और समयबद्ध तरीके से कदम उठाने की आवश्यकता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)