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प्रख्यात अभिनेता श्रीराम लागू का निधन

कलाकार होने के अलावा प्रशिक्षित ईएनटी सर्जन श्रीराम लागू ने विजय तेंदुलकर, विजय मेहता और अरविंद देशपांडे के साथ आज़ादी के बाद महाराष्ट्र में रंगमंच को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी.

श्रीराम लागू. (फोटो साभार: ट्विटर)

श्रीराम लागू. (फोटो साभार: ट्विटर)

पुणे: प्रख्यात अभिनेता डॉ. श्रीराम लागू का वृद्धावस्था से संबंधित बीमारियों के चलते मंगलवार शाम पुणे स्थित उनके आवास पर निधन हो गया. वह 92 वर्ष के थे.

उनके परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी.

नाटककार सतीश अलेकर ने बताया, ‘मैंने उनके दामाद से बात की. वृद्धावस्था संबंधित बीमारियों के कारण उनका निधन हुआ.’

श्रीराम लागू के परिवार में उनकी पत्नी दीपा लागू हैं.

प्रशिक्षित ईएनटी सर्जन लागू ने विजय तेंदुलकर, विजय मेहता और अरविंद देशपांडे के साथ आजादी के बाद वाले काल में महाराष्ट्र में रंगमंच को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी.

अपने अभिनय की वजह से श्रीराम लागू हिंदी के साथ-साथ मराठी सिनेमा और थियेटर में भी जाना पहचाना नाम थे. उन्होंने मराठी के 20 से ज्यादा नाटकों का निर्देशन किया था. इसके अलावा वह तमाम सामाजिक मुद्दे से जुड़कर काम करते थे.

उनके फिल्मी सफर में ‘सिंहासन’, ‘सामना’, ‘पिंजड़ा’, ‘ज़ाकोल’, ‘खिचड़ी’, ‘मुक्ता’ और ‘मसाला’ जैसी मराठी भाषा की कुछ यादगार फिल्में शामिल हैं. इसके अलावा ‘लमाण’ नाम से वह अपनी आत्मकथा भी लिख चुके थे.

इतना ही नहीं मराठी रंगमंच में वह ‘नटसम्राट’ और ‘हिमालयाची साओली’ जैसे नाटकों को अपने अभिनय से यादगार बना चुके हैं.

हिंदी सिनेमा की बात करें तो श्रीराम लागू को ‘एक दिन अचानक’, ‘घरौंदा’, ‘देवता’, ‘देस परदेस’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘इनकार’, ‘साजन बिन सुहागन’, ‘किनारा’, ‘लूटमार’, ‘सौ करोड़’, ‘ज्योति बने ज्वाला’, ‘नीयत’, ‘निशाना’, ‘स्वयंवर’, ‘श्रीमान श्रीमती’, ‘सदमा’ और ‘लावारिस’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है.

फिल्म ‘घरौंदा’ के लिए उन्हें 1978 का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

हिंदी की 100 से ज्यादा फिल्में करने वाले लागू राजेश खन्ना के साथ ‘थोड़ी सी बेवफाई’, ‘मक़सद’, ‘सौतन’, ‘नसीहत’ और ‘अवाम’ जैसी फिल्में में यादगार भूमिकाओं में नजर आ चुके हैं.

श्रीराम लागू का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले में बालकृष्ण चिंतामन लागू और सत्यभामा लागू के यहां 16 नवंबर 1927 को हुआ था. वह उनके चार बच्चों में सबसे बड़े थे.

उन्होंने भावे हाईस्कूल और पुणे विश्वविद्यालय के फर्गुसन कॉलेज से अपनी पढ़ाई की थी. इसके बाद पुणे विश्वविद्यालय से संबंद्ध बीजे मेडिकल कॉलेज से उन्होंने एमबीबीएस और एमएस की डिग्री हासिल की थी.

1997 में उन्हें कालीदास सम्मान मिला और साल 2006 में उन्हें मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान सम्मान के लिए चुना गया. साल 2007 में उन्हें पुण्य भूषण पुरस्कार मिला और साल 2010 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सम्मान दिया गया.

उनकी पत्नी दीपा लागू भी प्रख्यात थियेटर, टीवी और फिल्म कलाकार है. अपने दिवंगत बेटे तनवीर लागू की याद में उन्होंने रंगमंच से जुड़े बेहतरीन कलाकारों को सम्मानित करने के लिए तनवीर सम्मान की स्थापना की थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)