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बैंकों में बढ़े धोखाधड़ी के मामले, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे ज़्यादा: रिज़र्व बैंक

भारतीय रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 में बैंकों में क़रीब 72 करोड़ रुपये की कुल धोखाधड़ी हुई, जिसमें 55.4 प्रतिशत मामले सार्वजनिक बैंकों से जुड़े थे.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

मुंबई: बैंकों में धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं. भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार 2018-19 में 71,543 करोड़ रुपये की कुल धोखाधड़ी हुई जबकि इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 41,167 करोड़ रुपये था.

इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आगे हैं. बैंक ने रिपोर्टिंग अवधि में 6,801 धोखाधड़ी वाले मामलों की जानकारी दी जो 2017-18 में 5,916 था.

रिजर्व बैंक की ‘बैंकों में प्रवृत्ति और प्रगति-2018-19’ रिपोर्ट के अनुसार 2018-19 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के मामले में अधिक रहे.

धोखाधड़ी के कुल मामलों में 55.4 प्रतिशत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े थे. वहीं राशि के मामले में यह 90.2 प्रतिशत है.

यह सरकारी बैंकों में परिचालन जोखिमों से निपटने में आंतरिक प्रक्रियाओं, लोगों और प्रणाली में खामियों को बताता है.

बता दें कि आरबीआई ने इससे पहले अपने वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि देश में पिछले साल बैंकों द्वारा सूचित धोखाधड़ी के मामलों में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत वृद्धि हुई जबकि धोखाधड़ी की राशि 73.8 प्रतिशत बढ़कर 71,542.93 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

साल 2018-19 में में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के सबसे ज्यादा मामले देखने को मिले. इसके बाद निजी क्षेत्र के बैंकों और विदेशी बैंकों का स्थान रहा.

रिपोर्ट में कहा गया था कि धोखाधड़ी होने और बैंकों में उसका पता लगने के बीच की औसत अवधि 22 महीने रही है.

वहीं बड़ी धोखाधड़ी के मामलों, यानी 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की धोखाधड़ी के मामलों के होने और उनका पता लगने का समय औसतन 55 महीने रहा है.

इस दौरान 100 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की राशि 52,200 करोड़ रुपये रही है. सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के मामले अग्रिम राशि से जुड़े रहे हैं.

इसके बाद कार्ड, इंटरनेट और जमा राशि से जुड़े धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. वर्ष 2018- 19 में कार्ड, इंटरनेट और जमा राशि से जुड़े धोखाधड़ी राशि कुल धोखाधड़ी के समक्ष मात्र 0.3 प्रतिशत रही है.

उल्लेखनीय है कि सरकार ने फरवरी में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी का समय पर पता लगाना, उसकी सूचना देना तथा जांच को लेकर रूपरेखा जारी की थी.

इसके तहत बैंकों को 50 करोड़ रुपये से अधिक के गैर-निष्पादित खातों में धोखाधड़ी की आशंकाओं का आकलन करने की आवश्यकता है ताकि धोखाधड़ी वाले लेन-देन का खुलासा समय पर हो सके.

रिपोर्ट के अनुसार संभवत: इसी कारण 2018-19 में धोखाधड़ी के ज्यादा मामले सामने आए हैं.

वहीं निजी क्षेत्र और विदेशी बैंकों की धोखाधड़ी में कुल धोखाधड़ी में हिस्सेदारी क्रमश: 30.7 प्रतिशत ओर 11.2 प्रतिशत रही. राशि में इन बैंकों की हिस्सेदारी क्रमश: 7.7 प्रतिशत और 1.3 प्रतिशत रही.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)