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अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को रखने के लिए कर्नाटक का पहला हिरासत केंद्र तैयार

कर्नाटक के गृह मंत्री ने इसे हिरासत केंद्र कहने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि इसे इसलिए तैयार किया गया है ताकि देश में वीज़ा अवधि से ज़्यादा वक़्त से रह रहे और मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त अफ्रीकी नागरिकों को रखा जा सके.

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के नजदीक एक गांव में तैयार हिरासत केंद्र. (फोटो साभार: ट्विटर/@mnakthar)

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के नजदीक एक गांव में तैयार हिरासत केंद्र. (फोटो साभार: ट्विटर/@mnakthar)

बेंगलुरु: संशोधित नागरिकता कानून को लेकर पूरे देश में चल रहे प्रदर्शनों के बीच बेंगलुरु के निकट सोंदेकोप्पा गांव में कर्नाटक का पहला हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) बनकर तैयार हो गया है, जहां अवैध रूप से भारत आने वाले और रह रहे विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा.

सामाजिक कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार के निर्देश पर कई कमरों, एक रसोई और शौचालयों से युक्त इस हिरासत केंद्र को तैयार किया गया है.

हालांकि, राज्य के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने ‘हिरासत केंद्र’ शब्द पर एतराज जताया.

संवाददाताओं से मंगलवार को बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था, ‘मानदंडों के आधार पर बात करें तो यह हिरासत केंद्र नहीं है. किसी को भी नागरिकता के मुद्दे पर हिरासत में लेने की जरूरत नहीं है.’

उन्होंने इससे साफ इंकार किया कि यह केंद्र चालू हो गया है. उन्होंने कहा, ‘कृपया सामाजिक कल्याण विभाग से इसकी पुष्टि करें. कम से कम मुझे ऐसी सूचना नहीं है कि यह चालू हो गया है.’

उन्होंने कहा, ‘यह यह चालू हो गया है तो हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को वहां होना चाहिए? वहां कोई नहीं है.’

बोम्मई का कहना है कि इस केंद्र को इसलिए तैयार किया गया है ताकि देश में वीजा अवधि से ज्यादा वक्त से रह रहे और मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त अफ्रीकी नागरिकों को वहां रखा जा सके.’

उन्होंने कहा कि ऐसे अफ्रीकी नागरिकों की गैरकानूनी गतिविधियों से देश में कानून-व्यवस्था संबंधी दिक्कतें पैदा हो रही हैं.

उन्होंने कहा, ‘यह सिर्फ उन्हें वहां रखने और देश वापस भेजने के लिए है.’

वहीं, सामाजिक कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि उन्हें निर्देश मिला है कि ‘केंद्रीय राहत केंद्र (सीआरसी)’ को एक जनवरी से पहले तैयार कर लिया जाए.

20 साल पुराना यह भवन कभी गरीब और वंचित तबके के छात्रों के लिए हॉस्टल हुआ करता था, लेकिन समय के साथ-साथ विद्यार्थियों की संख्या कम होती गई और पिछले दो साल से यह खाली पड़ा था.

इस परियोजना में सामाजिक कल्याण विभाग को शामिल करने की वजह समझाते हुए अधिकारी ने बताया, ‘हिरासत में लिए जाने वाले लोगों को भोजन, रहने की जगह और कपड़े सामाजिक कल्याण विभाग उपलब्ध कराएगा.’

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के पास यह अधिकार है कि वह अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को विदेशी अधिनियम, 1946 के अनुच्छेद 3 (2) (सी) निर्वासित कर सकता है. इसी तरह संविधान के अनुच्छेद 258 (1) के तहत राज्य सरकारों को भी ऐसे कदम उठाने के अधिकार मिले हुए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने साल 2009, 2012, 2014 और 2018 में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने यहां विदेशी हिरासत केंद्र बनाने का निर्देश दिया था. दिल्ली में ऐसे तीन हिरासत केंद्र हैं.

मालूम हो कि गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पूरे देश में एनआरसी लागू करने के बयान के बाद हिरासत केंद्र एक बार फिर से चर्चा में आ गए है. अपनी नागरिकता न साबित कर पाने वालों को ऐसे हिरासत केंद्रों में रखा जाता है.

हालांकि कुछ दिन पहले ही देश में हिरासत केंद्र होने की बात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खारिज कर चुके हैं. बीते 22 दिसंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘जो हिंदुस्तान की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनके पुरखे मां भारती की संतान हैं… उनसे नागरिकता कानून और एनआरसी, दोनों का कोई लेना-देना नहीं है. देश के मुसलमानों को न डिटेंशन सेंटर में भेजा जा रहा है, न हिंदुस्तान में कोई डिटेंशन सेंटर है. ये सफेद झूठ है, ये बद-इरादे वाला खेल है, ये नापाक खेल है.’

इसी महीने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया था कि इस साल अक्टूबर तक असम में अनेक विदेशी न्यायाधिकरणों ने कुल 1,29,009 लोगों को विदेशी घोषित किया और 1,14,225 अन्य को भारतीय नागरिक घोषित किया गया.

इससे पहले जुलाई में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया था कि असम में गठित विदेशी न्यायाधिकरणों ने इस साल मार्च तक कुल 1.17 लाख लोगों को विदेशी घोषित किया गया. रेड्डी ने कहा था कि फिलहाल 100 विदेशी (नागरिक) न्यायाधिकरण असम के विभिन्न जिलों में चल रहे हैं.

बीते मई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश था दिया कि असम के हिरासत केंद्रों में तीन वर्ष से अधिक समय तक रखे गए अवैध विदेशियों को रिहा किया जा सकता है बशर्ते वे सुरक्षित डेटाबेस के साथ बायोमीट्रिक जानकारी उपलब्ध कराएं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)