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नागरिकता क़ानून: बनारस में छात्रों, कार्यकर्ताओं, वाम सदस्यों समेत 73 लोगों को नहीं मिली ज़मानत

जॉइंट एक्शन कमेटी के तहत नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध करने वाले बीएचयू के छात्रों ने कहा कि उनके दर्जनों साथियों को 19 दिसंबर से ही गिरफ्तार किया गया है. कमेटी के सदस्य और एमए फर्स्ट ईयर के छात्र प्रियेश पांडे ने कहा कि गिरफ्तार किए गए 12 लोगों में से तीन पीएचडी छात्र, आठ एमए छात्र और एक बीए का छात्र है.

वाराणसी में जॉइंट एक्शन कमेटी के नेतृत्व में नागरिकता संशोधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन निकालते लोग. (फोटो: ट्विटर/@safdar_sp)

वाराणसी में जॉइंट एक्शन कमेटी के नेतृत्व में नागरिकता संशोधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन निकालते लोग. (फोटो: ट्विटर/@safdar_sp)

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में 73 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ वामदल के सदस्य और छात्र भी शामिल हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया, ‘चेतगंज थाने के दायरे में आने वाले बेनियाबाग इलाके से 56 लोगों को 19 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था. वे सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (एम-एल) द्वारा आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे थे.’

वहीं, 17 अन्य लोगों को उसी दिन दशाश्वमेध घाट सहित आस-पास के अन्य इलाकों से गिरफ्तार किया गया था.

पुलिस ने कहा, ‘अभी और गिरफ्तारियां होंगी क्योंकि 100-150 लोग के खिलाफ जिले के अलग-अलग इलाकों में एफआईआर दर्ज की गई है और उनकी पहचान की जानी बाकी है.’

जॉइंट एक्शन कमेटी के तहत विरोध करने वाले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्रों ने कहा कि उनकी दर्जनों साथियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. एफआईआर बताते हैं कि उनमें से कम से कम तीन छात्रों ने बीएचयू हॉस्टल के रूम संख्या को अपने पते के रूप में दर्ज कराया है.

जॉइंट एक्शन कमेटी के सदस्य और एमए फर्स्ट ईयर के छात्र प्रियेश पांडे ने कहा, ‘गिरफ्तार किए गए 12 लोगों में से तीन पीएचडी छात्र, आठ एमए छात्र और एक बीए छात्र हैं. मंगलवार को एक सत्र न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया. सुनवाई की अगली तारीख 1 जनवरी है. (बीएचयू) प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है.’

बीएचयू प्रवक्ता राजेश सिंह ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तार किए गए लोगों की सूची साझा नहीं की है. उन्होंने कहा, ‘अगर किसी को किसी अन्य जगह पर कानून तोड़ने के लिए गिरफ्तार किया गया तो विश्वविद्यालय ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है. पुलिस ने भी छात्रों की गिरफ्तारी से इनकार कर दिया है.’

एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने कहा, ‘न तो बीएचयू के छात्रों को गिरफ्तार किया गया और न ही हमने बीएचयू के अंदर से किसी को उठाया है. गिरफ्तार किए गए लोग मुख्य रूप से वाम मोर्चे के नेता थे. बीएचयू के कुछ पूर्व छात्र हो सकते हैं. लेकिन विश्वविद्यालय परिसर से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया.’

चेतगंज स्टेशन पर पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में कहा गया है कि पुलिस ने सीपीआई (एम) द्वारा 19 दिसंबर को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.

चेतगंज एसएचओ प्रवीण कुमार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है, ‘दोपहर के 1 बजे के करीब ये 56 लोग 20-25 अन्य अज्ञात लोगों के साथ इकट्ठा हो गए और राष्ट्रविरोधी नारे लगाने लगे.’

हालांकि, सीपीआई के प्रदेश सचिव गिरीश शर्मा ने कहा कि बेनियाबाग में हुआ विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था. शर्मा ने कहा, ‘पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में 12 सीपीआई सदस्य, 11 सीपीआई-एम और सात सीपीआई (एम-एल) सदस्य हैं. बाकी सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र हैं.’