नॉर्थ ईस्ट

असम के किसान नेता अखिल गोगोई को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया

विशेष अदालत ने उनकी हिरासत 10 दिन बढ़ाने के लिए एनआईए की अर्जी खारिज कर दी. गोगोई को यूएपीए कानून के तहत 12 दिसंबर को जोरहाट से तब गिरफ्तार किया था, जब असम में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा था.

Guwahati: Krishak Mukti Sangram Samiti (KMSS) Advisior Akhil Gogoi waves black flags as he is detained along with supporters in bus, during a protest before the arrival of BJP President Amit Shah at Panjabari in Guwahati on Sunday. PTI Photo (PTI5_20_2018_000056B)

साल 2018 में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता और किसान नेता अखिल गोगोई. (फाइल फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: एनआईए की विशेष अदालत ने बीते गुरुवार को आरटीआई कार्यकर्ता और किसान नेता अखिल गोगोई को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया. विशेष अदालत ने उनकी हिरासत 10 दिन बढ़ाने के लिए एनआईए की अर्जी खारिज कर दी.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उन्हें गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत 12 दिसंबर को जोरहाट से तब गिरफ्तार किया था, जब असम में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा था.

संशोधित यूएपीए कानून के तहत सरकार को किसी ऐसे व्यक्ति को ‘आतंकवादी’ करार देने का अधिकार है जिसने कोई आतंकवादी कृत्य किया हो या ऐसे कृत्य की योजना बनाते, बढ़ावा देते या उसमें शामिल पाया गया हो. इस तरह आतंकवादी घोषित किए जाने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने की अनिवार्यता नहीं है.

अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले दिन में एनआईए ने यहां निजारापाड़ा इलाके में गोगोई के आवास की तलाशी ली और कई दस्तावेज और एक लैपटॉप जब्त किया.

कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के नेता को दिल्ली लाया गया और यहां अदालत के समक्ष पेश किया गया. एनआईए की हिरासत शुक्रवार को खत्म हो रही थी.

अखिल गोगोई विवादास्पद नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ असम के कुछ जिलों में प्रदर्शनों को गोलबंद करने का काम रहे थे.

राज्य की सोनोवाल सरकार ने साल 2009 में कांग्रेस की सरकार के दौरान गोगोई के खिलाफ दर्ज एक मामले के तहत उन्हें गिरफ्तार करवाया है.

गोगोई कांग्रेस सरकार के भी विरोधी रहे हैं और इसके चलते विभिन्न आरोपों के तहत उन्हें कई बार जेल भेजा गया था. सोनोवाल सरकार ने 2017 और सितंबर 2019 में गोगोई पर देशद्रोह का आरोप लगाया लेकिन दोनों बार गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें रिहा कर दिया.

आरोप है कि गोगोई ने 2009 से अब तक भाकपा (माओवादी) के कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बैठकों की व्यवस्था की है और ‘इस संगठन की गतिविधियों के लिए’ देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया है.

हालांकि साल 2010 में इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिल गोगोई में कहा था, ‘मैं मार्क्सवादी हूं, माओवादी नहीं’.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)