कैंपस

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को फिर से खोले जाने की तारीख़ बढ़ाई गई, नई तारीख़ तय नहीं

संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने बीते 15 दिसंबर को प्रदर्शन किया था, जो हिंसक हो उठा था. इसके बाद विश्वविद्यालय को पांच जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया था.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

अलीगढ़: नागरिकता कानून को लेकर बीते 15 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा बाद उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को पांच जनवरी तक लिए बंद कर दिया था. बुधवार प्रशासन की ओर कहा गया कि विश्वविद्यालय फिर से खोले जाने की तारीख छह जनवरी से आगे और बढ़ा दी गई है. नई तारीख की सूचना आने वाले समय में दी जाएगी.

विश्वविद्यालय ने एक नोटिस में कहा कि कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर की अध्यक्षता में शीर्ष अधिकारियों की बैठक में यह फैसला किया गया.

नोटिस में कहा गया कि संस्थान को फिर से चरणबद्ध ढंग से खोले जाने का विस्तृत कार्यक्रम स्थिति की भावी समीक्षा के बाद सूचित किया जाएगा.

विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि शीतकालीन अवकाश को बढ़ाए जाने का फैसला देश में चल रहे हालात के मद्देनजर किया गया, जो नागरिकता कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों के बाद पैदा हुए.

मालूम हो कि संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई से नाराज एएमयू के छात्रों ने बीते 15 दिसंबर को प्रदर्शन किया था, जो हिंसक हो उठा था. इस दौरान पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की कार्रवाई में बड़ी संख्या में छात्र जख्मी हो गए थे.

उस वक्त अलीगढ़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर निसार अहमद ने बताया था कि करीब 60 छात्रों को पत्थर और लाठी की चोटें आई हैं. साथ ही कुछ को आंसू गैस के कारण आंख में परेशानी हुई है.

इस हिंसा के बाद विश्वविद्यालय को पांच जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है और तमाम छात्रावास खाली करा दिए गए थे.

पुलिस की इस कार्रवाई पर कुलपति ने तारिक मंसूर ने कहा था कि उन्हें पता चला था विश्वविद्यालय परिसर में कुछ बाहरी तत्वों ने माहौल खराब करने की कोशिश की है. हालात की तात्कालिकता को देखते हुए उन्होंने पुलिस बुलाई थी.

बीते दिनों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुए विवाद के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर फैक्ट फाइंडिंग टीम ने एक रिपोर्ट जारी की है. इस फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट से पता चलता है कि नागरिकता कानून का विरोध कर रहे एएमयू के छात्रों पर पुलिस ने बर्बर कार्रवाई की थी.

इस रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी प्रशासन, जिला प्रशासन और राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार को न सिर्फ कैंपस और छात्रों को सुरक्षित रखने में असफल रहने बल्कि कैंपस में पुलिसकर्मियों को घुसने देने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया कि एएमयू में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान छात्रों की पिटाई करते वक्त ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगा रहे थे. रिपोर्ट में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने घायल छात्रों को मेडिकल सहायता उपलब्ध नहीं कराई.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘एएमयू में स्टन ग्रेनेड तक का इस्तेमाल किया गया जबकि इनका इस्तेमाल सिर्फ युद्ध जैसी स्थितियों में होता है. इस तरह की पुलिस कार्रवाई भी खतरनाक आतंकवादियों के लिए होती है, न कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर. यहां तक कि युद्ध के दौरान भी एंबुलेंस को घायलों को ले जाने की मंजूरी होती है लेकिन यहां ऐसा नहीं था.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)