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‘हम देखेंगे: हर मुल्क़ में फ़ैज़ की इस नज़्म की ज़रूरत है’

वीडियो: आईआईटी कानपुर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों द्वारा मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म ‘हम देखेंगे’ को गाए जाने पर एक फैकल्टी मेंबर ने इसे ‘हिंदू विरोधी’ बताया और इसकी दो पंक्तियों पर आपत्ति जताई है. इस नज़्म का अर्थ बता रही हैं रेडियो मिर्ची की आरजे सायेमा.