राजनीति

गोरखपुर में 12 माह में हज़ार से ज़्यादा बच्चों की मौत और योगी को कोटा की फ़िक्र: अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीते दिनों राजस्थान के कोटा स्थित एक अस्पताल में एक महीने में 100 से अधिक बच्चों की मौत पर वहां की कांग्रेस सरकार, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी पर निशाना साधा था.

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव. (फोटो: पीटीआई)

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले 12 माह में गोरखपुर में एक हजार से ज्यादा बच्चों की मौत होने का दावा करते हुए सरकार से पूछा कि इसका जिम्मेदार कौन है.

राज्य की योगी सरकार ने अखिलेश के दावे को गलत बताते हुए इसके समर्थन में सुबूत देने को कहा है.

अखिलेश यादव ने शुक्रवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल पर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कोटा के अस्पताल में बच्चों की मौत की तो फिक्र है लेकिन गोरखपुर में पिछले 12 महीने में एक हजार से ज्यादा बच्चों की जान जा चुकी है. मुख्यमंत्री उसकी फिक्र कब करेंगे.

सपा अध्यक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों की जानकारी में था कि उन बच्चों को कौन सी बीमारी है लेकिन इंसेफलाइटिस से मौतों के आंकड़े ठीक रखने के लिए उन्हें उस बीमारी की दवा नहीं दी गई. इस वजह से हजार से ज्यादा बच्चों की जान चली गई.

उन्होंने कहा कि वह आने वाले समय में इन मृत बच्चों की सूची जारी करेंगे. सरकार बताए कि बच्चों को गलत दवा किसलिए दी गई. कौन इसका जिम्मेदार है.

इस बीच, प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने अखिलेश को जवाब देते हुए कहा कि सपा अध्यक्ष को इसके सुबूत देने चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘सूची प्रस्तुत करें, झूठा आरोप न लगाएं. जापानी इंसेफलाइटिस पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है.’

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के लोग उन्हें एक महीने के लिए पाकिस्तान जाने की सलाह दे रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘मैं उनका बयान नहीं दोहराऊंगा क्योंकि वे नहीं चाहते कि बेरोजगारी के मुद्दे पर कोई बहस हो.’

सपा अध्यक्ष ने कहा, ‘इस सबको देखते हुए बहुत जल्द सपा के नौजवान कार्यकर्ता साइकिल चलाकर रोजगार मांगने का काम करेंगे. वे लोगों से यह भी कहेंगे कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का फार्म नहीं भरें. हम और लोगों से भी अपील करेंगे कि आगे आएं और सत्याग्रह के इस आंदोलन में सहयोग करें.’

पूर्व मुख्यमंत्री ने नोएडा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण से जुड़े मामले पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘कानून व्यवस्था संभालने की जिनकी जिम्मेदारी थी, वे आज किन बातों में उलझे हुए हैं? पहले तो राजनीतिक पार्टियां जिस तरह के आरोप लगाती थीं, अब आईपीएस खुद इल्जाम लगा रहे हैं. इस सबके लिए सरकार और उसके मुखिया जिम्मेदार हैं.’

उन्होंने कहा कि अगर वह एनपीआर का फॉर्म नहीं भरते हैं तो उन्हें किस कानून के तहत सजा दी जाएगी? उन्होंने कहा, ‘आधार कार्ड बनवाने के लिए सरकार ने इतने पन्ने भरवाए थे. ऐसी कौन सी जानकारी है, जो आपके पास नहीं है और अब आप एनपीआर के जरिये लेना चाहते हैं.’

अखिलेश यादव ने कहा कि जब राजाओं के पास अपने महलों के कागज नहीं हैं तो गरीबों के पास अपने ठिकानों के दस्तावेज कैसे मिलेंगे. एनपीआर गरीबों के खिलाफ है.

मालूम हो कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के कोटा स्थिति एक सरकारी अस्पताल में 100 से अधिक बच्चों की मौत को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना साधा था. बीते दो जनवरी को मुख्यमंत्री के आधिकारिक टि्वटर हैंडल से एक के बाद एक कई ट्वीट किए गए थे.

एक ट्वीट के अनुसार, ‘कोटा में करीब 100 मासूमों की मौत बेहद दुःखद और हृदय विदारक है. माताओं की गोद उजड़ना सभ्य समाज,मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं पर धब्बा है. अत्यंत क्षोभ है कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका वाड्रा महिला होकर भी माताओं का दुःख नहीं समझ पा रहीं.’

अगले ट्वीट में कहा गया था, ‘राजस्थान में कांग्रेसी सरकार, वहां के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी की उदासीनता, असंवेदनशीलता व गैर-जिम्मेदाराना रवैया और इस मामले में चुप्पी साधे रहना मन दुखी कर देने वाला है.’

एक अन्य ट्वीट में कहा गया था, ‘श्रीमती वाड्रा अगर यूपी में राजनीतिक नौटंकी करने की बजाय उन गरीब पीड़ित माताओं से जाकर मिलतीं, जिनकी गोद केवल उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही की वजह से सूनी हो गई है तो उन परिवारों को कुछ सांत्वना मिलती. इनको किसी की न चिंता है, न कोई संवेदना, जनसेवा नहीं सिर्फ राजनीति करनी है.’

बता दें कि राजस्थान के कोटा ज़िले के सरकारी जेके लोन अस्पताल में दिसंबर के अंतिम दो दिन में कम से कम नौ और शिशुओं की मौत हो गई. 30 दिसंबर को चार और 31 दिसंबर को पांच शिशुओं की मौत हुई. इसके साथ ही दिसंबर महीने अस्पताल में मरने वाले शिशुओं की संख्या 100 से अधिक हो गई है.

गत 23-24 दिसंबर को 48 घंटे के भीतर अस्पताल में 10 शिशुओं की मौत को लेकर काफी हंगामा हुआ था. हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों ने कहा था कि यहां 2018 में 1,005 शिशुओं की मौत हुई थी और 2019 में उससे कम मौतें (963 शिशुओं की मौत) हुई हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अस्पताल में साल 2019 में कुल 963 शिशुओं की मौत हुई हैं, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 1,005 था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)