राजनीति

मोदी क्या बोल रहे हैं इसे छोड़िए, जानिए वो पढ़ क्या रहे हैं?

प्रधानमंत्री सोशल मीडिया खासकर ट्विटर पर खासे सक्रिय रहते हैं. जनता की ट्विटर फीड में उनकी मौजूदगी स्थायी हो चुकी है पर क्या आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री की ट्विटर फीड में क्या रहता है?

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प्रधानमंत्री मोदी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. फोटो साभार: www.narendramodi.in

2 मई 2015 को ट्विटर पर एक पॉर्न वीडियो रीट्वीट हुआ. यूं तो इस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा होते रहते हैं पर इस एकाउंट में क्या खास था? इस एकाउंट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर हैंडल फॉलो करता है. जिन ट्विटर एकाउंट को आप फॉलो करते हैं वे आपकी फीड में दिखाई देते हैं यानी यह वीडियो प्रधानमंत्री की फीड तक भी पहुंचा था.

इस वीडियो में कुछ खराब नहीं था कि इसके आधार पर किसी के बारे में कोई गलत धारणा बनाई जाए. पर मैकेनिकल इंजीनियर और भाजपा कार्यकर्ता पवन, जिसके एकाउंट से इसे रीट्वीट किया गया, शायद ऐसा करना नहीं चाहता था. जिस एकाउंट से सबसे पहले ये वीडियो साझा हुआ उसे स्पैमिंग के कारण सस्पेंड कर दिया गया था पर पवन उसे फॉलो करते थे और प्रधानमंत्री पवन को. इस तरह के संदिग्ध एकाउंट को पवन को फॉलो ही नहीं करना चाहिए था.

मोदी देश में सोशल मीडिया पर कैंपेनिंग में सबसे आगे माने जाते हैं. उन्होंने 2009 में ट्विटर पर शुरुआत की और 2014 के आम चुनावों तक उनकी इतनी फॉलोइंग हो चुकी थी कि ये सवाल उठने लगा था कि क्या सोशल मीडिया चुनाव परिणामों को प्रभावित कर पाएगा. मतदान के समय तक फेसबुक पर करीब हर 6 भारतीय में से एक मोदी के एकाउंट को फॉलो करता था. आज मोदी सबसे ज़्यादा ट्विटर फॉलोइंग वाले नेता हैं. किसी भी अन्य देश के प्रमुख के मुकाबले सबसे अधिक संख्या में लोग उनसे जुड़े हैं.

हालांकि यह कोई इकतरफा खेल नहीं है. मोदी भी कई एकाउंट को फॉलो करते हैं. 2014 में ब्रिटिश पत्रकार लांस प्राइस से बात करते हुए मोदी ने कहा था. ‘सुबह उठने के 4-5 मिनट के भीतर ही आई-पैड देखना अब मेरी आदत में आ गया है.’ ये जानना सबके लिए कौतुक का विषय है कि आखिर प्रधानमंत्री की न्यूज़ फीड में क्या दिखता होगा. वैसे यह बहुत आसान है. अगर आप भी वही हैंडल फॉलो करते हैं जो प्रधानमंत्री करते हैं तब आप भी वह देख सकते हैं जो वो देख रहे हैं.

2 मई 2015 के जिस पॉर्न वीडियो का मैंने ज़िक्र किया वो शायद प्रधानमंत्री की नज़र से भी गुज़रा होगा, शायद इसीलिए 3 महीने बाद अगस्त 2015 में ‘सामजिक शालीनता’ की रक्षा के लिए सरकार ने 857 पॉर्न वेबसाइटों को ब्लाक करने की कोशिश की थी.

एक तरह से प्रधानमंत्री तब कुछ बड़े पॉर्न स्टारों से दो कदम ही दूर थे. प्रधानमंत्री ढेरों भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और स्थानीय नेताओं को फॉलो करते हैं और उनमें से कई जेना जेम्सन, नीना मर्सिडीज़ और मिया ख़लीफा को. (अगर आप इन्हें नहीं जानते हैं तो मेरी सलाह है कि गूगल पर इनके बारे में देख सकते हैं पर अपने दफ्तर में ये न करें तो अच्छा होगा) प्रधानमंत्री द्वारा फॉलो किया जा रहा एक और एकाउंट आप यहां देख सकते हैं स्वदेशी विचार

पर फिर हम सिर्फ इस बात पर कोई राय नहीं बना सकते. यह सिर्फ दिखाता है कि भाजपा में कितने अलग-अलग तरह के लोग हैं जो पॉर्न या पॉर्न कलाकारों के बारे में अलग राय रखते हैं. पर जो बात प्रधानमंत्री को सवालों के घेरे में लाती है वो है उनका ऐसे लोगों को फॉलो करना जो ट्विटर पर लगातार नफरत भड़काने वाले, बलात्कार या मार देने की धमकी देने वाले, कट्टरता और गलत जानकारियां देने वाले ट्वीट करते हैं.

2 फरवरी को राज्यसभा में दिए गए एक भाषण में तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने प्रधानमंत्री द्वारा फॉलो किए जा रहे इन एकाउंट का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह मोदी ऑनलाइन नफरत और शोषण को बढ़ावा दे रहे हैं. ओ’ब्रायन ने दावा किया, ‘प्रधानमंत्री 26 ऐसे ट्विटर हैंडल फॉलो करते हैं, जो बलात्कार और सांप्रदायिकता से जुड़ी धमकियां दिया करते हैं.’ उन्होंने यह भी बताया कि ट्विटर द्वारा इनमें से दो को सस्पेंड किया गया है. ओ’ब्रायन ने यह भी जोड़ा कि इनमें से कुछ ट्रॉल करने वाले प्रधानमंत्री द्वारा उनके निवास पर बुलाई गई सोशल मीडिया पर प्रभावी 150 लोगों की बैठक का भी हिस्सा थे.

ओ’ब्रायन ने इनमें से एक यूज़र का नाम भी साझा किया जो गलत था, इसके बाद उस यूजर को खुद को एक ‘पीड़ित’ के रूप में दिखाने का मौका भी मिल गया, (जैसा ट्विटर पर अक्सर होता है) पर इससे इस बात की गंभीरता कम नहीं हो जाती कि सोशल मीडिया पर हमारे नेता खासकर प्रधानमंत्री इस तरह के हैंडल फॉलो करके नफरत फैलाने वालों को परोक्ष रूप से प्रोत्साहित कर रहे हैं.

2 मई 2015 को जब पवन ने वो पॉर्न वाला रीट्वीट किया तब कुछ दक्षिणपंथी यूज़र्स हैश टैग गोधरा अगेन (#GodhraAgain) को ट्रेंड करवाने की कवायद में लगे थे. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में कुछ मुस्लिमों द्वारा एक पैसेंजर ट्रेन को किसी प्रदर्शन के दौरान रोका गया था. जो यूज़र्स इस हैश टैग को ट्रेंड करने के लिए लगातार पोस्ट कर रहे थे, उनमें से कई को मोदी फॉलो करते हैं. इनमें से एक की गंभीरता देखिए, @AmiteshSinghBJP नाम के इस हैंडल से ट्वीट किया गया,

‘#GodhraAgain #FilthyIslam showing its colors. Kill at least 3,000 Muslims tomorrow.’ (#गोधराअगेन #घटिया इस्लाम फिर अपना रंग दिखा रहा है. कल कम से कम 3000 मुस्लिमों को मार डालो)

अमितेश सिंह नाम के इस यूजर के प्रोफाइल में खुद को पुणे के भारतीय जनता मोर्चा का युवा मोर्चा का ऑफिस होल्डर बताया गया था. काफी गुस्से और आपराधिक आरोप लगने के डर के चलते अमितेश ने माफ़ी मांगी और अपना एकाउंट डिलीट कर दिया. भाजपा की स्थानीय इकाई और युवा मोर्चा ने भी उससे पल्ला झाड़ लिया. पर प्रमाण बचा रहा  कि वो इस हैश टैग को ट्रेंड करवा रहे चंद लोगों में से था जिन्हें प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल द्वारा फॉलो किया जाता है.  यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उनके हैंडल से महज कुछ 2000 लोगों को फॉलो किया जाता है, जिनमें ये व्यक्ति भी शामिल था. वैसे यह अकेला ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसको फॉलो करने को लेकर मोदी पर सवाल उठे हैं.

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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फॉलो किया जा रहा एक ट्रोल अकांउट.

और भी कई यूजर्स थे जिनके ट्वीट मोदी को ज़रूर अपनी टाइमलाइन पर दिखते रहे होंगे. यह सभी बलात्कार और मरने-मारने की धमकियां लिखा करते थे. इन्होने अपने एकाउंट तो डिलीट कर दिए पर स्क्रीनशॉट के रूप में सबूत बाकी रह गए. हालांकि 2015 के जून तक आते-आते मोदी की फीड में कुछ बदलाव आ गए. अब उनके द्वारा फॉलो किए जा रहे 1,641 ट्विटर हैंडल्स में से अधिकतर भाजपा अधिकारी, संघ परिवार के सदस्य, विदेशी डिप्लोमेट और राष्ट्र प्रमुख हैं. इसके अलावा वे कई राष्ट्रीय स्तर के एथलीट और खिलाड़ियों, राष्ट्रीय एजेंसियों और स्वस्थ चेतना अभियान जैसी योजनाओं के हैंडल को भी फॉलो करते हैं.

हालांकि इसके बावजूद भी गाहे-बगाहे मोदी को अपनी टाइमलाइन पर इस तरह नफरत भरे, घटिया ट्वीट दिख जाते होंगे. बीती जनवरी में उनके द्वारा फॉलो किए जा रहे एक यूज़र ने अभिनेता ओम पुरी के निधन पर लिखा, ‘my condolences with #Pakistan! You lost a SOLDIER!’ (मेरी संवेदनाएं पाकिस्तान के साथ हैं. उन्होंने अपना एक सिपाही खो दिया)

एक और उदाहरण है, 28 जनवरी को दिल्ली में एक कचरा बीनने वाले को कूड़े में एक ख़राब मोर्टार का खोल मिला. मोदी द्वारा फॉलो किए जाने वाले एक यूजर ने इस खबर को कुछ यूं साझा किया, ‘plan to attack PM Modi who was addressing just 200 mts away’ (प्रधानमंत्री मोदी पर हमले की कोशिश, जो 200 मीटर दूर पर ही एक सभा को संबोधित कर रहे थे.) हालांकि सच्चाई यह थी कि यह एक ख़राब मोर्टार था और प्रधानमंत्री की रैली उस जगह से लगभग 12 किलोमीटर दूर दिल्ली कैंट में हो रही थी. पर इस एकाउंट की यह गलत खबर किसी अख़बार की सच्ची खबर के मुकाबले सैंकड़ों बार रीट्वीट हुई.

इस बात पर कोई शक नहीं है कि देश के प्रधानमंत्री द्वारा किसी ट्विटर यूजर को फॉलो किया जाना उसके लिए बड़ी बात है, (उनके द्वारा फॉलो किए जा रहे हैंडल गर्व से इस बात का प्रचार भी करते हैं) उनका ऐसा करना यह भी दिखाता है कि मोदी सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज़ करवाने को लेकर कितने गंभीर हैं. 2014 से पहले इस तरह कट्टर दक्षिणपंथियों के एक साथ आने से मुख्यधारा के समाचार स्रोतों के महत्व को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई, खासतौर पर वो समाचार या मीडिया संस्थान, जो मोदी की आलोचना किया करते थे.

ट्विटर के रूप में भाजपा को कट्टर हिंदुत्व की रणनीति को संगठित रूप में लाने का मंच मिल गया है. उनके इन निष्ठावान यूज़र्स का ऑनलाइन नेटवर्क मोदी या उनकी पार्टी के अन्य नेताओं के इशारे पर काम करता है. याद कीजिए, राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह का वो बयान जहां उन्होंने पत्रकारों के एक तबके के लिए ‘प्रेस्टीटयूट’ शब्द का प्रयोग किया था, तबसे इस शब्द को पत्रकारों को अपमानित करने के लिए प्रयोग किया जाता है.

सोशल मीडिया की इस दुनिया से इतर असल ज़िंदगी में अगर ऐसा आक्रामक और धमका सकने वाले लोगों का कोई समूह आपके साथ होता है तब आपकी ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है और अगर आप सत्ता में हैं तो आपको यह सुरक्षित करना होता है कि इस तरह के लोगों से समाज को कोई नुकसान न पहुंचे. लगातार सामने आ रहे ऑनलाइन ट्रॉल एक अलग तरह की राजनीति के आने की दस्तक है. सरकार इन शातिर ट्रॉल के खिलाफ ज़िम्मेदारी नहीं लेती.

खासकर तब जब प्रधानमंत्री खुद उन्हें फॉलो कर रहे हों.

इस बात पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि ट्विटर पर मोदी क्या पढ़ रहे हैं क्योंकि इससे आप जान सकते हैं कि उनके द्वारा जो जानकारी लिखी या कही जा रही है, वो आखिर आ कहां से रही है. उनकी पर्सनल फीड दिखाती है कि उनकी मूल प्रकृति क्या है. जहां मुख्यधारा के मीडिया का ध्यान इन पर नहीं जाता, वहीं कुछ ट्रॉल्स ऐसे तथ्यों को न चाहते हुए भी सामने ले आते हैं. ये ख़तरनाक है पर प्रधानमंत्री का इस तरह के लोगों को फॉलो करना इन्हें वैधता देने जैसा है, जो ज्यादा ख़तरनाक है.