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गुजरात: स्कूल ने बच्चों से लिखवाए पीएम के नाम सीएए समर्थन के पोस्टकार्ड, विरोध के बाद मांगी माफ़ी

अहमदाबाद के एक निजी स्कूल द्वारा पांचवी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नागरिकता संशोधन क़ानून पर बधाई और समर्थन देने के लिए पोस्टकार्ड लिखने को कहा गया था. अभिभावकों के इसका विरोध करने के बाद स्कूल प्रशासन ने माफ़ी मांगते हुए बच्चों द्वारा लिखे पोस्टकार्ड वापस कर दिए.

Protesters participate in a rally in support of Citizenship Amended Act (CAA) and National Register of Citizenship (NRC) in Bhopal. (PTI Photo)

सीएए के समर्थन में हुई एक रैली. (फोटो: पीटीआई)

देशभर में हो रहे नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के बीच गुजरात के एक स्कूल द्वारा बच्चों से इस कानून के समर्थन में प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड लिखवाए जाने की घटना सामने आयी है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद के कांकरिया के एक निजी स्कूल द्वारा पांचवी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों से प्रधानमंत्री को नागरिकता संशोधन क़ानून पर बधाई और समर्थन देने के लिए पोस्टकार्ड लिखने को कहा गया था.

हालांकि बुधवार को अभिभावकों के विरोध के बाद स्कूल ने माफी मांगी और कहा कि इस बारे में ‘गलतफहमी’ हुई है. फिर ये पोस्टकार्ड अभिभावकों को वापस कर दिए, जिन्होंने इन्हें फाड़ दिया.

लिटिल स्टार स्कूल नाम का यह विद्यालय केवल लड़कियों के लिए है, जिसमें नर्सरी से लेकर क्लास 10 तक के करीब 1200 विद्यार्थी पढ़ते हैं.

कुछ अभिभावकों ने बताया कि मंगलवार को यहां क्लास में शिक्षक द्वारा ब्लैकबोर्ड पर प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए एक संदेश लिखा गया और फिर बच्चों से इसे पोस्टकार्ड पर लिखने को कहा गया. प्रधानमंत्री कार्यालय का पता लिखे इन पोस्टकार्ड पर बच्चों से उनके घर का पता लिखवाकर जमा कर लिया गया.

अंग्रेजी में लिखे गए इस संदेश में कहा गया था- ‘बधाई हो. मैं, भारत की एक नागरिक संशोधित नागरिकता कानून पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को बधाई देती हूं. मैं और मेरा परिवार इस कानून का समर्थन करते हैं.’

दसवीं क्लास की छात्राएं, जिनके अभी प्री-बोर्ड इम्तिहान चल रहे हैं, उन्हें इस संदेश की फोटोकॉपी दी गईं. एक अभिभावक ने बताया, ‘मेरी बेटी छठी क्लास में पढ़ती है. मुझे मंगलवार शाम को पता चला कि क्लास में टीचर ने सबसे मोदी को सीएए के समर्थन में बधाई संदेश लिखवाया है. उसे इसका हिस्सा बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है जो हमें स्वीकार्य नहीं है.’

एक अन्य अभिभावक ने कहा, ‘इस समय दसवीं क्लास के बच्चों के इम्तिहान चल रहे हैं. उन्हें भी पोस्टकार्ड लिखने को कहा गया. जब उन्होंने इसका विरोध किया, तब उनसे कहा गया कि जिसने यह पोस्टकार्ड जमा नहीं किया, उसे इंटरनल एग्जाम में नंबर नहीं दिए मिलेंगे. उनके घर का पता लिखवाने का क्या मतलब है, वो भी उनके माता-पिता की अनुमति के बगैर!’

इसके बाद बुधवार को ढेरों अभिभावक स्कूल के ट्रस्टी और मालिक के कार्यालय में पहुंचे और इस बारे में विरोध जताया. इस पर स्कूल प्रशासन ने इसे ‘गलतफहमी’ बताते हुए माफी मांगी और अभिभावकों को उनके बच्चों द्वारा लिखे पोस्टकार्ड लौटा दिए.

अभिभावकों ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपना विरोध जाहिर करते हुए इसे वहीं फाड़कर फेंक दिया. जब इस बारे में स्कूल प्रशासन से सवाल किया गया तब उन्होंने किसी पार्टी प्रभाव के आकर ऐसा करने से इनकार किया.

स्कूल के ट्रस्टी और मालिक जिनेश परसराम ने कहा, ‘ये मसला हल हो चुका है. मेरी अनुमति के बगैर मंगलवार कुछ अध्यापकों द्वारा क्लास में इस तरह की गतिविधि करवाकर उनके पद का दुरूपयोग किया गया. हमने वे पोस्टकार्ड अभिभावकों को वापस कर दिए थे और उन्होंने इन्हें फाड़ भी दिया है.’

बता दें कि पिछले हफ्ते खबर आयी थी कि भाजपा ने संशोधित नागरिकता कानून के समर्थन के लिए शुरू किए गए अभियान में स्कूली छात्रों ने भी भाग लिया था.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीते दो जनवरी को कम से कम 15 स्कूलों के विद्यार्थियों ने पार्टी के सीएए को लेकर शुरू किये गए जागरूकता अभियान में हिस्सा लिया था.

इन छात्रों ने भी प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड लिखे थे. सूत्रों के अनुसार भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा स्कूलों में पोस्टकार्ड बंटवाए गए थे.