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दीपिका पादुकोण की फिल्म का बहिष्कार तालिबानी मानसिकता दर्शाता है: शिवसेना

जेएनयू में विद्यार्थियों पर हुए हमले के बाद एकजुटता प्रकट करने के लिए विश्वविद्यालय पहुंची अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक के बहिष्कार की मांग की जाने लगी, जिसमें वे तेजाब पीड़िता का किरदार अदा कर रही हैं. इस मामले में भाजपा के कुछ नेताओं ने भी जेएनयू जाने पर अभिनेत्री की आलोचना की थी.

दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक' का पोस्टर. (फोटो: ट्विटर)

दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ का पोस्टर. (फोटो: ट्विटर)

मुंबई: शिवसेना नेता संजय राउत ने रविवार को अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का समर्थन करते हुए कहा कि अभिनेत्री या उनकी फिल्म का बहिष्कार करने की मांग गलत है.

अभिनेत्री दीपिका पादुकोण जेएनयू में विद्यार्थियों पर हुए हमले के बाद एकजुटता प्रकट करने के लिए विश्वविद्यालय पहुंची थीं. इसके लिए जहां कुछ लोग दीपिका की सराहना कर रहे हैं वहीं कुछ अन्य इसके लिए आलोचना कर हैं.

इस मामले में भाजपा के कुछ नेताओं ने भी जेएनयू जाने पर अभिनेत्री की आलोचना की थी. इस फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया है.

राज्यसभा सदस्य और शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने कहा कि देश ‘तालिबानी’ तौर-तरीके से नहीं चल सकता है.

जेएनयू में दीपिका के आने और ‘मूक एकजुटता प्रकट’ करने की कई लोगों ने तारीफ भी की लेकिन इस पर कइयों ने उन्हें ‘वामपंथियों का समर्थन करने वाली’ करार दिया तो कुछ का कहना था कि वह ‘छपाक’ का प्रचार करने गईं थीं.

कुछ लोगों ने उनकी फिल्म और उनका बहिष्कार करने की भी मांग की. फिल्म छपाक में वह तेजाब पीड़िता का किरदार अदा कर रही हैं.

राउत ने कहा, ‘अभिनेत्री और उनकी फिल्म का बहिष्कार करना गलत है. देश ‘तालिबानी’ तौर-तरीके से नहीं चलाया जा सकता है.’

ऐसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी पर निर्देशक मेघना गुलजार की फिल्म ‘छपाक’ को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान कांग्रेस सरकार ने टैक्स फ्री कर दिया है. इसके बाद दोनों राज्यों में फिल्म की टिकट काफी सस्ती हो गई और अधिक लोगों को फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित किया गया.

बता दें कि, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के सिनेमाघरों में दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ के विरोध में एक हिंदूवादी संगठन ने पोस्टर्स लगाए गए हैं. शुक्रवार को सिनेमाघरों में फिल्म की स्क्रीनिंग नहीं होने दी गई.

इस पोस्टरों में सबसे ऊपर बड़े-बडे़ अक्षरों में ‘चेतावनी’ लिखा था, जिसमें कहा गया कि जो भी सिनेमाघर फिल्म को दिखाने की कोशिश करेंगे, उन्हें अपना बीमा कराना पडे़गा. इन पोस्टर्स में यह भी लिखा था, ‘ना देखूंगा, ना देखने दूंगा.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)