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इशरत जहां एनकाउंटर मामला: ट्रायल जज आरके चुडावाला का तबादला

विशेष सीबीआई जज आरके चुडावाला का स्थानांतरण ऐसे समय में हुआ है जब मुठभेड़ में शेष अभियुक्तों ने आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दाखिल की थी. इससे पहले जज जेके पांड्या ने एक महीने में मामले के दो मुख्य आरोपियों डीजी वंजारा और एनके अमीन को आरोपमुक्त कर दिया था.

(फोटो:पीटीआई)

(फोटो:पीटीआई)

अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में इशरत जहां के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई की अध्यक्षता करने वाले विशेष सीबीआई जज आरके चुडावाला को प्रतिनियुक्ति पर गुजरात हाईकोर्ट में भर्ती और वित्त प्रभाग के रजिस्ट्रार के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, न्यायाधीश चूडावाला मई 2019 में राजकोट में औद्योगिक न्यायालय के सदस्य के रूप में पहले न्यायाधीश जेके पांड्या के स्थानांतरण के बाद परीक्षण की अध्यक्षता कर रहे थे.

न्यायाधीश पांड्या ने एक महीने में मामले के दो मुख्य आरोपियों डीजी वंजारा और एनके अमीन को आरोपमुक्त कर दिया था, जिससे मामले में दोनों के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाही को खत्म कर दी गई थी.

इसके बाद सीबीआई ने विशेष अदालत को बताया था किया कि वह इशरत जहां के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में पुलिस के पूर्व अधिकारियों डीजी वंजारा और एनके अमीन को आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती नहीं देगी.

न्यायाधीश चुडावाला का स्थानांतरण ऐसे समय में हुआ है जब मुठभेड़ में शेष अभियुक्तों – पुलिस महानिरीक्षक जी एल सिंघल, पूर्व डीएसपी तरुण बरोट, पूर्व पुलिस उपाधीक्षक जे जी परमार और सहायक सब इंस्पेक्टर अनाजु चौधरी ने आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दाखिल की थी.

पहली कुछ सुनवाई में, न्यायाधीश चुडावाला ने दोनों पक्षों द्वारा मांगे जा रहे स्थगन पर असंतोष व्यक्त किया. स्थानांतरण के साथ आरोपमुक्त की दलीलों पर फिर से तर्क देना होगा. आरोपमुक्त की दलीलों पर फैसला करने के बाद ही कोर्ट ट्रायल को आगे बढ़ा सकता है.

गुजरात हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एचडी सुथार, प्रधान जिला न्यायाधीश के रूप में 21 जनवरी को हिम्मतनगर में साबरकांठा जिले में अपना कार्यकाल शुरू करेंगे.

गौरतलब है कि गुजरात पुलिस के 15 जून 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके में एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मुंबई के समीप मुंब्रा की रहने वाली 19 वर्षीय महिला इशरत जहां, जावेद शेख उर्फ प्रनेश पिल्लई, अमजदअली अकबरअली राणा और जीशान जौहर मारे गए थे.

पुलिस ने दावा किया था कि इनके लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों से संपर्क थे.

सीबीआई ने अगस्त 2013 में सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था और फरवरी 2014 में चार और लोगों के खिलाफ अनुपूरक आरोपपत्र दायर किया था.