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नागरिकता क़ानून: लखनऊ में प्रदर्शन कर रहीं शायर मुनव्वर राना की बेटियों समेत 160 महिलाओं पर केस

केस दर्ज होने के बाद शायर मुनव्वर राना ने कहा है कि पुलिस ने उनकी बेटियों सुमैया और फौजिया पर धारा 144 के तहत लागू निषेधाज्ञा तोड़ने के आरोप में मुक़दमा दर्ज किया. मगर वह ये भी बताए कि इसी निषेधाज्ञा की धज्जियां उड़ाकर आज लखनऊ में रैली करने वाले गृह मंत्री अमित शाह पर कब मुक़दमा होगा?

शायर मुनव्वर राना. (फोटो साभार: फेसबुक)

शायर मुनव्वर राना. (फोटो साभार: फेसबुक)

लखनऊ: नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन कर रहीं मशहूर शायर मुनव्वर राना की दो बेटियों समेत करीब 160 महिलाओं के खिलाफ निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है.

सीएए और एनआरसी के खिलाफ पुराने लखनऊ के घंटाघर इलाके में महिलाओं का बीती 17 जनवरी को शुरू हुआ प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी है. शहर में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू है और इसके उल्लंघन के आरोप में प्रदर्शन कर रही करीब 160 महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

अपर पुलिस उपायुक्त—पश्चिमी विकास चंद्र त्रिपाठी ने मंगलवार को बताया कि शहर में धारा 144 लागू है, मगर इसके बावजूद महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं. यह निषेधाज्ञा का उल्लंघन है. इस मामले में ठाकुरगंज थाने में अब तक तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इनमें एक मुकदमे में शायर मुनव्वर राना की बेटियां- फौजिया और सुमैया के नाम भी शामिल हैं.

दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर घंटाघर परिसर में सैकड़ों महिलाएं पिछले पांच दिन से कड़ाके की ठंड के बीच प्रदर्शन कर रही हैं. उनका कहना है कि सरकार जब तक सीएए को वापस नहीं लेती और एनआरसी का इरादा खत्म नहीं करती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.

मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.

उधर, लखनऊ के ही गोमतीनगर स्थित उजरियांव में भी सोमवार शाम बड़ी संख्या में महिलाओं और लड़कियों ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया.

पुलिस ने उनसे धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए प्रदर्शन खत्म करने को कहा. पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल पुरुषों को हल्का बल प्रयोग कर खदेड़ दिया, मगर महिलाएं डटी रहीं.

धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा के अन्तर्गत एक स्थान पर तीन से ज्यादा लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी होती है.

मालूम हो कि पिछले साल दिसंबर महीने में उत्तर प्रदेश में अलग-अलग शहरों में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान मरने वालों की संख्या कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी है.

इससे पहले राजधानी लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के सिलसिले में सामाजिक कार्यकर्ता व कांग्रेस नेता सदफ़ जफ़र, पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था.

बीते चार जनवरी को कांग्रेस नेता सदफ़ जफ़र, पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी और 13 अन्य को एक स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी थी.

मुनव्वर राना ने कहा, धारा 144 लागू होने के दौरान शाह पर रैली करने के लिए केस कब होगा

शायर मुनव्वर राना ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन कर निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में अपनी बेटियों पर मुकदमा दर्ज किये जाने की कड़ी आलोचना करते हुए इस सिलसिले में मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह की लखनऊ में हुई रैली पर सवाल उठाए हैं.

राना ने कहा है कि पुलिस ने उनकी बेटियों सुमैया और फौजिया पर धारा 144 के तहत लागू निषेधाज्ञा तोड़ने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया. मगर वह ये भी बताए कि इसी निषेधाज्ञा की धज्जियां उड़ाकर आज लखनऊ में रैली करने वाले गृह मंत्री अमित शाह पर कब मुकदमा होगा.

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान अगर राम, नानक और चिश्ती का मुल्क है तो शाह के खिलाफ भी मुकदमा होना चाहिए. तब हम समझेंगे कि हमारी सरकार और पुलिस इंसाफ कर रही है.

राना ने कहा कि अगर सरकार की नजर में शाह का रैली करना जायज है तो जाहिर है कि पुलिस की कार्रवाई सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहीं उनकी बेटियों और तमाम मुल्जिम महिलाओं तथा लड़कियों के साथ नाइंसाफी है.

उन्होंने कहा कि यह तो वही हुआ कि जब किसी शहर में कोई ‘शाह’ आता है तो फकीरों के बेटे—बेटियां बंद कर दिये जाते हैं.

राना ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटियों से कहा है कि मुकदमे से डरने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘कबीले में हमारे चाहे नींद हो या मौत, वह मकतल (वध स्थान) में आती है, कबीले में हमारे कोई आंगन में नहीं मरता.’

मालूम हो कि गृह मंत्री अमित शाह ने सीएए के समर्थन में मंगलवार को लखनऊ में एक रैली को संबोधित किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)