भारत

झारखंड का झरिया भारत का सबसे प्रदूषित शहर: ग्रीनपीस रिपोर्ट

पर्यावरण को लेकर काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस इंडिया ने 287 शहरों के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है. दिल्ली प्रदूषण के मामले में देश में 10वें नंबर पर है, जबकि शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के छह शहर हैं.

झरिया में कोयले की एक खदान. कोयला खनन यहां प्रदूषण का बड़ा कारक है. (फोटो साभार: विकिपीडिया कॉमंस)

झरिया में कोयले की एक खदान. कोयला खनन यहां प्रदूषण का बड़ा कारक है. (फोटो साभार: विकिपीडिया कॉमंस)

नई दिल्ली: झारखंड का झरिया देश का सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है, वहीं दिल्ली ने हवा में प्रदूषण के स्तर को कम करने में मामूली सुधार किया है. यह जानकारी मंगलवार को ग्रीनपीस इंडिया द्वारा जारी रिपोर्ट में दी गई.

इस वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली भारत का दसवां सबसे प्रदूषित शहर है. एक साल पहले राजधानी इस मामले में आठवें स्थान पर थी.

रिपोर्ट के अनुसार, झरिया में प्रदूषण के कारक ‘पीएम 10’ (पार्टिकुलेट मैटर यानी धूल कण) का औसत सालाना स्तर 2018 में 322 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था जो 0-60 की सुरक्षित सीमा से छह गुना से अधिक है.

रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड राज्य का ही धनबाद भारत का दूसरा सबसे अधिक प्रदूषित शहर है, जिसे उसके कोयला भंडार और उद्योगों के लिए जाना जाता है.

झरिया देश के सबसे बड़े कोयला स्रोतों में से एक है. झरिया के कोयला से कोक बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, जिसका प्रयोग मुख्य रूप से लौह-इस्पात उद्योग में होता है. यहां के कोयला खान तकरीबन एक सदी से सुलग रहे हैं.

कोयला ही झरिया और धनबाद में प्रदूषण का प्रमुख कारक है. अवैज्ञानिक तौर तरीके से खनन की वजह से कोयले के कण हवा में मिलकर प्रदूषण के स्तर का बढ़ाते हैं. यहां लोगों में प्रदूषणजनित बीमारिया आम हैं.

देश भर के 287 शहरों से ‘पीएम 10’ डेटा के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है.

2017 में दिल्ली में ‘पीएम 10’ का औसत वार्षिक स्तर 240 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था जो 2018 में कम होकर 225 के स्तर पर आ गया.

रिपोर्ट के अनुसार, मिजोरम का लुंगलेई सबसे कम प्रदूषित शहर है और इसके बाद मेघालय का डौकी शहर है. शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में से छह उत्तर प्रदेश के हैं जिनमें नोएडा, गाजियाबाद, बरेली, इलाहाबाद, मुरादाबाद और फिरोजाबाद हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, 287 में 231 शहरों में साल 2018 में कम से कम 52 दिनों तक ‘पीएम 10’ का स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा था.

नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्स (एनएएक्यूएस) के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने ‘पीएम 10’ के 0-60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर का स्तर सुरक्षित माना है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)