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दिल्ली: शाहदरा में एक सफाईकर्मी की मौत, दूसरे की हालत गंभीर

पुलिस ने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण ने सफाई की जिम्मेदारी एक निजी कांट्रैक्टर को सौंपा था. अपनी शिकायत में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने जब सुरक्षा उपकरण मांगे तक कथित तौर पर कांट्रैक्टर ने मना कर दिया. दोनों सफाईकर्मियों के बेहोश होने के बाद पुलिस के आने से पहले कांट्रैक्टर वहां से भाग गया.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: उत्तर पूर्वी दिल्ली के शाहदरा इलाके में रविवार को बिना सुरक्षा उपकरणों के मैनहोल में सफाई करने उतरने वाले एक 24 वर्षीय सफाईकर्मी की जहरीली गैस से मौत हो गई. वहीं एक अन्य सफाईकर्मी की हालत गंभीर है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पुलिस ने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने सफाई की जिम्मेदारी एक निजी कांट्रैक्टर को सौंपा था.

यह घटना बीएसईएस दफ्तर के पास कड़कड़डूमा में स्थिति सीबीडी में हुई. एक निजी कांट्रैक्टर के द्वारा पांच से अधिक सफाईकर्मियों को 15 फीट गहरे सीवर की सफाई के लिए लगाया गया था.

पुलिस ने कहा कि संजय अमर कॉलोनी का निवासी मृतक रवि सबसे पहले सीवर में उतरा था. जब वह बाहर नहीं आया तब कुछ देर बाद 35 वर्षीय संजय सीवर में गया. दोनों बाहर नहीं आए तब अन्य कर्मियों ने पुलिस को बुलाया.

डीसीपी (शाहदरा) अमित शर्मा ने कहा, ‘घटना के बारे में हमें दोपहर करीब 1 बजे फोन किया गया. पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और दोनों को रस्सी से बाहर निकाला. अचेत अवस्था में मिले दोनों कर्मियों को तत्काल लोनायक अस्पताल भेजा गया. अस्पताल पहुंचने पर रवि को मृत घोषित कर दिया गया जबकि संजय की हालत गंभीर है और उसका इलाज चल रहा है.’

पुलिस ने कहा कि कर्मचारियों की शिकायत पर निजी कांट्रैक्टर के खिलाफ आनंद विहार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई है. कांट्रैक्टर फरार है और मामले की जांच जारी है.

अपनी शिकायत में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें शनिवार को सीवर में काम करने के लिए बुलाया गया था. उनके कांट्रैक्टर ने उनसे कहा कि काम के लिए उन्हें रोजाना 350 रुपये मिलेंगे. उस दिन काम नहीं कर पाने पर उन्हें अगले दिन बुलाया गया.

उन्होंने जब सुरक्षा उपकरण मांगे तक कथित तौर पर कांट्रैक्टर ने मना कर दिया. दोनों सफाईकर्मियों के बेहोश होने के बाद पुलिस के आने से पहले कांट्रैक्टर वहां से भाग गया.

पुलिस ने कहा कि मजदूरी कमाने के लिए कर्मियों को जबरदस्ती सीवर में उतारा गया. रवि ने पहले डीडीए और अन्य निजी परियोजनाओं पर निजी ठेकेदार के साथ वर्षों तक काम किया था.