भारत

किसानों का कर्ज़ माफ करने के लिए राज्य ख़ुद करें फंड की व्यवस्था: जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह भी कहा कि बैंकों के फंसे कर्ज़ की समस्या के समाधान पर आरबीआई तेज़ी से काम कर रहा है.

Arun-Jaitley_PTI_HERO-1024x576

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि किसी को भी भ्रम में नहीं रहना चाहिए. राज्यों को कृषि ऋण माफी का बोझ खुद ही उठाना होगा. जो भी राज्य कृषि ऋण माफ करेगा उसकी भरपाई उसे खुद के संसाधनों से करनी होगी.

वित्त मंत्री का यह वक्तव्य इस स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण है कि महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को ही राज्य के किसानों के लिये ऋण माफी की घोषणा की है जबकि मध्य प्रदेश के किसान कर्ज़ में राहत दिए जाने को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलनरत हैं.

जेटली ने आगे कहा कि बैंकों के फंसे कर्ज़ के समाधान को लेकर रिजर्व बैंक तेजी से काम कर रहा है और इस दिशा में जल्द ही कदम उठाये जाने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार ने अध्यादेश जारी किया है और इसी अध्यादेश के तहत रिजर्व बैंक उन कर्ज़दारों की सूची तैयार करने में लगा है जिनमें ऐसे फंसे कर्ज़ की समस्या के समाधान की आवश्यकता है. इस मोर्चे पर जल्द ही कदम उठाये जाने की उम्मीद है.

सरकार ने पिछले महीने ही बैंकिंग नियमन कानून 1949 में संशोधन करते हुये एक अध्यादेश जारी किया जिसके तहत रिजर्व बैंक को बैंकों के फंसे कर्ज़ की समस्या के त्वरित समाधान के लिये अधिकार दिये गये हैं.

सरकार ने इस संशोधन के जरिये रिजर्व बैंक को यह अधिकार दिया है कि वह बैंकों को ऋण शोधन की कारवाई शुरू करने को कह सकता है. इसके साथ ही फंसे कर्ज़ यानी गैर-निष्पादित राशि (एनपीए) के समाधान के लिए और कदम उठाने का वादा किया गया है.

सार्वजिनक क्षेत्र के बैंक प्रमुखों के साथ यहां हुई बैठक के बाद जेटली ने संवाददाताओं से कहा कि जहां तक इस बैठक की बात है बैंकों में विलय एवं अधिग्रहण का मामला बैठक के एजेंडा में नहीं था, लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि हम उस दिशा में सक्रियता के साथ काम कर रहे हैं.

बैंकों में कर्ज़ की मांग कमज़ोर रहने के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कहा, ‘बैंकों के पास जो भी व्यवस्था है उसके तहत वह कर्ज़ कारोबार के विस्तार के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं कि उनके पास कर्ज़ की मांग आने पर वह उसे उपलब्ध करायें.’

बैंकों में 2016-17 के दौरान कर्ज़ की मांग पिछले एक दशक के निम्न स्तर 5.08 प्रतिशत तक गिर चुकी है जबकि एक साल पहले यह 10.7 प्रतिशत थी.

बैंकों में जीएसटी को लेकर तैयारियों के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा कि इससे संबंधित कई मुद्दों पर बाद में राजस्व सचिव के साथ चर्चा होगी.