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बिहार बालिका गृह यौन शोषण मामले में ब्रजेश ठाकुर समेत 12 को आजीवन कारावास

साल 2018 में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के एक बालिका गृह में यौन शोषण का मामला सामने आया था, जिसे ब्रजेश ठाकुर के संगठन द्वारा चलाया जा रहा था. दिल्ली की एक अदालत ने बीते जनवरी में ठाकुर को पॉक्सो क़ानून और आईपीसी की धाराओं के तहत बलात्कार और सामूहिक बलात्कार का दोषी माना था.

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बालिका गृह में बच्चों से बलात्कार मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/ट्विटर)

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बालिका गृह में बच्चों से बलात्कार मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/ट्विटर)

नई दिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर जिले के एक आश्रयगृह में कई लड़कियों के यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में मंगलवार को मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को अंतिम सांस तक कारावास में रखने की सजा सुनाई.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने इस मामले में 11 अन्य को भी उम्रकैद की सजा सुनाई.

अदालत ने ठाकुर को 20 जनवरी को पॉक्सो कानून और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत बलात्कार और सामूहिक बलात्कार का दोषी ठहराया था.

अदालत ने अपने 1,546 पृष्ठों के फैसले में ब्रजेश ठाकुर को आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 324 (खतरनाक हथियारों या माध्यमों से चोट पहुंचाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना),  पॉक्सो कानून की धारा 21 और किशोर न्याय कानून की धारा 75 के तहत भी दोषी ठहराया है.

सीबीआई ने ठाकुर को शेष जीवन तक कारावास दिये जाने की मांग करते हुए कहा था कि दोषियों के प्रति उदारता नहीं दिखाई जानी चाहिए क्योंकि मामले में पीड़िताएं नाबालिग हैं.

सरकारी वकील अमित जिंदल ने अदालत से कहा था कि मामले में दोषी ठहराये गये पांचों दोषियों ब्रजेश ठाकुर, दिलीप कुमार वर्मा, रवि रोशन, विकास कुमार और विजय कुमार तिवारी को उनके शेष जीवन तक कारावास की सजा दी जानी चाहिए.

मुज़फ़्फ़रपुर के बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के पूर्व प्रमुख दिलीप कुमार वर्मा, सीडब्ल्यूसी के सदस्य कुमार और अन्य आरोपी गुड्डू पटेल, किशन कुमार और रामानुज ठाकुर को पॉक्सो कानून के तहत यौन उत्पीड़न और आईपीसी एवं पॉक्सो कानून के तहत आपराधिक षड्यंत्र, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, चोट पहुंचाने, बलात्कार के लिए उकसाने और किशोर न्याय कानून की धारा 75 के तहत दोषी ठहराया गया था.

वहीं, दो आरोपियों राम शंकर सिंह और अश्विनी को आपराधिक षड्यंत्र और बलात्कार के लिए उकसाने के अपराधों का दोषी पाया गया.

इनके अलावा महिला आरोपियों शाइस्ता प्रवीन, इंदु कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी को आपराधिक षड्यंत्र, बलात्कार के लिए उकसाने, बच्चों के साथ क्रूरता और अपराध होने की रिपोर्ट करने में असफल रहने का दोषी पाया गया था.

कुछ दोषियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता धीरज कुमार ने कहा था कि वे फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.

इस मामले में बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री और जद (यू) की तत्कालीन नेता मंजू वर्मा को भी आलोचना का शिकार होना पड़ा था, जब उनके पति के ठाकुर के साथ संबंध होने के आरोप सामने आए थे.

मंजू वर्मा ने आठ अगस्त, 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले को सात फरवरी, 2019 को बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर की स्थानीय अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर की पॉक्सो अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था.

बता दें कि साल 2018 में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले में 31 मई को एक बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया था. मामला तब सामने आया जब इस साल के शुरू में मुंबई के एक संस्थान टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (टिस) की ‘कोशिश’ टीम ने अपनी समाज लेखा रिपोर्ट में दावा किया था कि बालिका गृह की कई लड़कियों ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है.

उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है और आपत्तिजनक हालातों में रखा जाता है.

मुज़फ़्फ़रपुर के साहू रोड स्थित इस बालिका गृह को सेवा संकल्प एवं विकास समिति की ओर से संचालित किया जाता था, जो कि ब्रजेश ठाकुर का संगठन था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)