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कर्नाटक स्कूल मामला: राजद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार महिलाओं को ज़मानत मिली

बीदर के शाहीन स्कूल में बच्चों द्वारा सीएए विरोधी नाटक का मंचन करने पर पिछले महीने राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था और स्कूल की संचालिका फरीदा बेगम और एक छात्र की मां को गिरफ़्तार किया गया था.

शाहीन स्कूल में बच्चों से पूछताछ करती पुलिस. (फोटो: वीडियो ग्रैब)

शाहीन स्कूल में बच्चों से पूछताछ करती पुलिस. (फोटो: वीडियो ग्रैब)

बीदर: कर्नाटक के बीदर की एक सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को एक स्कूल में सीएए पर नाटक मंचन को लेकर राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार शाहीन प्राइमरी और हाई स्कूल की संचालिका फरीदा बेगम और एक छात्र की मां नजमुनिस्सा को जमानत दे दी है.

इन दोनों महिलाओं पर आरोप था कि इन्होंने विद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विद्यालय में एक नाटक आयोजित किया था, जिसके बाद इन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. 30 जनवरी को गिरफ्तारी के बाद से वे हिरासत में थी.

लाइव लॉ के मुताबिक जिला प्रमुख और सत्र न्यायाधीश ने नजमुनिस्सा और फरीदा बेगम को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई है. साथ ही उन्हें जांच में सहयोग और जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है.

इसके साथ ही कर्नाटक हाईकोर्ट ने शाहीन स्कूल के नाबालिग छात्रों से अवैध रूप से पूछताछ पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है.

पुलिस को छात्रों से पूछताछ करने से रोकने के लिए अंतरिम निर्देश पारित करते हुए अदालत ने सरकार और पुलिस को 19 फरवरी तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है.

बता दें कि, बीदर के शाहीन स्कूल के खिलाफ बच्चों द्वारा सीएए विरोधी नाटक का मंचन करने के मामले में पिछले महीने राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था. साथ ही उस स्कूल को संचालित करने वाले शाहीन शिक्षा संस्थान के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था.

बीते 21 जनवरी को स्कूल के वार्षिक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने सीएए पर एक नाटक का मंचन किया था.  इसी नाटक पर स्थानीय एबीवीपी कार्यकर्ता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था.

एबीवीपी के स्थानीय कार्यकर्ता नीलेश रक्षयाल की शिकायत पर 26 जनवरी को शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद स्कूल की प्रिंसिपल फरीदा बेगम और स्कूल में सीएए विरोधी प्ले कर रहे  नौ साल के बच्चे की मां को गिरफ्तार किया था.

शिकायतकर्ता ने बताया था कि सोशल मीडिया पर उसने एक वीडियो देखी थी, जिसमें स्कूल में देश विरोधी भावनाओं को भड़काया गया और बच्चे सीएए के विरोध में प्रधानमंत्री की तस्वीर को चप्पलों से पीट रहे थे.

बीदर पुलिस ने इस मामले में राजद्रोह और शांति भंग करने की धाराओं 124ए और 504 के तहत स्कूल के हेड और मैनेजमेंट सहित कथित तौर पर इस वीडियो को बनाने वाले पत्रकार मोहम्मद यूसुफ रहीम के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

उसके पुलिस लगातार बच्चों से पूछताछ की थी. इस पर राज्य के बाल अधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया था और जिला पुलिस से कहा था कि इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के साथ कई नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है.

कर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (केएसपीसीआर) के अध्यक्ष एंटनी सेबेस्टियन ने बीदर पुलिस के अधिकारियों को एक पत्र लिखा था. जिसमें एसपी, डिप्टी कमिश्नर और डीजीपी स्तर के अधिकारी शामिल थे.

इस पत्र में कहा गया था कि पुलिस की जांच में शाहीन प्राइमरी स्कूल में डर का माहौल बनाया गया है. पुलिस को तुरंत स्कूली बच्चों से पूछताछ बंद कर देनी चाहिए.

केएसपीसीआर का कहना था कि नौ साल के बच्चे की मां और स्कूल की प्रिंसिपल को गिरफ्तार करने के बाद बिना स्थानीय बाल कल्याण समिति को सूचित किए बच्चे को पड़ोसी की देखरेख में रखकर पुलिस ने नियमों का उल्लंघन किया है.