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किसान आंदोलन पर सियासत के बीच 48 घंटे में छह किसानों ने की आत्महत्या

मध्य प्रदेश में 24 घंटे में तीन किसानों ने की आत्महत्या. भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय बोले- क़र्ज़ नहीं, पारिवारिक कारण या फ्रस्ट्रेशन है आत्महत्या की वजह.

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(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

किसानों के आंदोलन पर जारी सियासत और चुनावी बढ़त बनाने की कोशिशों के बीच प्रदर्शन भले शांत होता दिख रहा हो, लेकिन उनके आत्महत्या करने का सिलसिला जारी है. पिछले 48 घंटे में देश के तीन राज्यों से 6 किसानों के आत्महत्या करने की ख़बरें आ रही हैं.

कई राज्यों में किसानों के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने दो टूक कह दिया है कि जो राज्य किसानों का क़र्ज़ माफ करना चाहते हैं वे अपने खजाने से करें. केंद्र सरकार से कोई उम्मीद न रखें.

यानी राज्यों में किसानों के आंदोलन, किसानों पर क़र्ज़ का बोझ और फसलों के उचित मूल्य न मिलने को केंद्र राज्यों का विषय मानता है, जबकि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य केंद्र ही तय करता है.

उक्त छह मौतों में से तीन आत्महत्याएं मध्य प्रदेश में, एक उत्तर प्रदेश, एक झारखंड और एक महराष्ट्र में हुई हैं. गिरफ़्तारी, उपवास, अनशन और आरोप-प्रत्यारोप के तमाशों के ज़रिये एक तरफ़ चुनावी बिसात बिछाई जा रही है, दूसरी तरफ़ किसान जिसके लिए सड़क पर उतरे थे, उस मुद्दे पर कोई नामलेवा नहीं है.

मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के रेहटी तहसील के गांव जाजना में किसान दुलचंद ने छह लाख रुपये क़र्ज़ लिए थे. वे क़र्ज़ नहीं चुका पा रहे थे. उन्हें साहूकार लोग परेशान कर रहे थे. इससे तंग आकर उन्होंने आत्महत्या कर ली.

दूसरी आत्महत्या होशंगाबाद में हुई. सिवनी मालवा तहसील के भैरूपुर गांव में माखनलाल ने पेड़ से फंदा डालकर जान दे दी. रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते क़र्ज़ की वजह से उनकी 25 एकड़ जमीन बिक गई. अब सिर्फ एक एकड़ जमीन बची थी.

मध्य प्रदेश के ही विदिशा के जीरापुर में हरिसिंह जाटव ने भी जहर पीकर जान दे दी. उनकी जमीन का गलत सीमांकन होने के चलते हरिसिंह परेशान चल रहे थे.

झारखंड के रांची के पिठोरिया में कालेश्वर महतो ने भी खुदकुशी कर ली. महाराष्ट्र के अकोला जिले में खारोले के आत्महत्या करने की खबर आई तो उत्तर प्रदेश के बांदा में भी एक किसान ने खुदकुशी कर ली. एक जून से शुरू हुए आंदोलन के बाद महाराष्ट्र में तीन किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

मध्य प्रदेश में 24 घंटे के अंदर तीन आत्महत्याओं के सामने आने के बाद ही मध्य प्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया कि ये मौतें क़र्ज़ से नहीं, बल्कि निजी वजहों से हुई हैं. ये वजहें पारिवारिक, निजी हो सकती हैं, या इसकी वजह डिप्रेशन हो सकता है.

मंदसौर में हुई पुलिस गोलीबारी में 6 किसानों की मौत हुई थी. पहले प्रशासन ने और सत्तारूढ़ भाजपा ने गोली चलने की बात से इनकार किया, लेकिन बाद में जब किसान उग्र आंदोलन पर उतर आए तो स्वीकार किया कि पुलिस ने गोली चलाई थी. अब वरिष्ठ भाजपा नेता किसानों की मौत से इनकार कर रहे हैं.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में पिछले नौ सालों में 11,000 से ज़्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

किसान अपनी मुसीबतों को लेकर सड़क पर आ गया है और सरकार के पास उसकी मौत, क़र्ज़ और किल्लत को झुठलाने के सिवा कुछ नहीं है. जाहिर है कि इससे किसानों की समस्या पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. हालांकि, कम से कम मध्य प्रदेश में किसान आन्दोलन राजनीतिक बढ़त लेने का ज़रिया बन गया है.

मंगलवार को कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रोक के बावजूद मंदसौर जाने की कोशिश की. इंदौर से चलकर मंदसौर के रास्ते में उन्होंने कुछ जगह सभाएं भी संबोधित कीं. रोक लगने के बावजूद वे इतना बड़ा काफिला लेकर चले थे, जिसे देखकर ही कोई समझ सकता था कि वे किसानों से मिलने नहीं, बल्कि गिरफ्तारी देने जा रहे हैं.

गुजरात के नये नवेले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भी मंगलवार को नीमच बॉर्डर पर गिरफ्तार हुए. किसानों का आंदोलन कुछ शांत होता दिख रहा है, लेकिन मंगलवार को भी भोपाल के मंडला में किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया और शिवराज सिंह चौहान का पुतला फूंका.

दूसरी तरफ जबलपुर मंडी में व्यापारियों ने किसानों की उपज खरीदने से इनकार कर दिया जिसके विरोध में किसानों ने मंडी के बाहर प्रदर्शन किया. इस बीच समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों की ख़रीद की सरकार की घोषणा के बाद सोमवार और मंगलवार को मालवा क्षेत्र की मंडियों के बाहर प्याज से भरी ट्रालियों की कई किलोमीटर की कतार लग गई.

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार संतोष अरसोड ने बताया कि महाराष्ट्र में इस साल मई तक हर दिन आठ किसानों ने आत्महत्या की है. एक जून से शुरू हुए आन्दोलन के बाद अब तक तीन किसानों के आत्महत्या की खबर है.