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कांग्रेस के सात सांसदों को लोकसभा की शेष अवधि से निलंबित किया गया

लोकसभा की कार्यवाही से निलंबित किए गए कांग्रेस सांसद राजस्थान से भाजपा की सहयोगी पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल की बर्खास्तगी की मांग कर रहे थे जिन्होंने कहा था कि इसकी जांच होनी चाहिए कि कोरोना वायरस सोनिया गांधी के घर से फैल रहा है क्योंकि वायरस से बड़ी संख्या में प्रभावित लोग इटली से हैं.

New Delhi: Monsoon clouds hover over the Parliament House, in New Delhi on Monday, July 23, 2018.(PTI Photo/Atul Yadav) (PTI7_23_2018_000111B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कांग्रेस के सात लोकसभा सदस्यों को बृहस्पतिवार को सदन का अपमान करने और ‘घोर कदाचार’ के मामले में मौजूदा संसद सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया.

पीठासीन सभापति मीनाक्षी लेखी ने कहा कि कांग्रेस सदस्यों द्वारा अध्यक्षीय पीठ से बलपूर्वक कागज छीने जाने और उछालने का ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण आचरण संसदीय इतिहास में संभवत: पहली बार हुआ है.

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस सदस्यों गौरव गोगोई, टीएन प्रतापन, डीन कुरियाकोस, राजमोहन उन्नीथन, बैनी बहनान, मणिकम टेगोर और गुरजीत सिंह औजला को निलंबित करने संबंधी प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया.

पीठासीन सभापति ने मीनाक्षी लेखी ने कहा, ‘जिन माननीय सदस्यों को निलंबित किया गया है वे तुरंत बाहर चले जाएं.’

इससे पहले पीठासीन सभापति लेखी ने अपराह्न तीन बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कहा, ‘आज दोपहर सदन में चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने सभा की कार्यवाही से संबंधित आवश्यक कागज अध्यक्षीय पीठ से बलपूर्वक छीन लिये और उछाले गये. संसदीय इतिहास में ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण आचरण संभवत: पहली बार हुआ है जब अध्यक्ष पीठ से कार्यवाही से संबंधित पत्र छीने गये. मैं इस आचरण की घोर निंदा करती हूं.’

उन्होंने संसदीय प्रक्रिया नियमों के नियम 374 के तहत उक्त सदस्यों को नामित किया.

बता दें कि, सदन की कार्यवाही के दौरान राजस्थान से भाजपा की सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए कि कोरोना वायरस सोनिया गांधी के घर से फैल रहा है क्योंकि वायरस से बड़ी संख्या में प्रभावित लोग इटली से हैं. इस बयान के बाद कांग्रेस सदस्यों ने बेनीवाल के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया.

इससे पहले लोकसभा में दिल्ली हिंसा पर जल्द चर्चा कराने की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों के भारी शोर-शराबे के कारण बुधवार को सदन में गतिरोध कायम रहा. हंगामे के बीच ही सदन ने ‘प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक’ को मंजूरी दी और दो बार के स्थगन के बाद कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी.

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरूआत से ही कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल सदन में दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर तत्काल चर्चा शुरू कराने की मांग को लेकर हंगामा कर रहे हैं.

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को सदन में कहा कि सरकार सामान्य स्थिति बहाल होने पर होली के बाद दिल्ली की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर चर्चा कराने को तैयार है और अभी (विपक्ष को) सदन की कार्यवाही चलने देनी चाहिए.

जोशी ने कहा, ‘सरकार 11 मार्च को लोकसभा में और 12 मार्च को राज्यसभा में दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है.’

उन्होंने कहा कि संवैधानिक दायित्व हैं और विधेयक पारित करना है. जोशी ने कहा कि हम चर्चा को तैयार हैं लेकिन विपक्ष सदन नहीं चलने देना चाहता.

गुरुवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस सहित विपक्षी दल दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करने लगे. कांग्रेस सदस्य अध्यक्ष के आसन के पास आकर नारेबाजी करने लगे.

इस बीच, पीठासीन सभापति किरीट सोलंकी ने शोर-शराबा करने वाले सदस्यों से अपने स्थान पर जाने तथा कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया. उन्होंने इस दौरान दो प्रश्न भी लिये.

शोर-शराबा थमता नहीं देख पीठासीन सभापति सोलंकी ने कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

दोपहर 12 बजे कार्यवाही पुन: शुरू होते ही कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्य आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे.

पीठासीन सभापति सोलंकी ने आज की कार्यसूची में उल्लेखित वर्ष 2020-21 के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की अनुदानों की मांगों पर चर्चा के संदर्भ में कहा, ‘आज हमें सामाजिक न्याय के विषय पर चर्चा करनी है. दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों की चर्चा करनी है.’

उन्होंने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से कहा, ‘आप लोग अपने स्थान पर चले जाएं.’

हालांकि शोर-शराबा जारी रहा और पीठासीन सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे सदन की बैठक शुरू हुई तो कांग्रेस, द्रमुक, वाम दलों समेत विपक्षी दलों की आसन के समीप नारेबाजी के बीच ही पीठासीन सभापति मीनाक्षी लेखी ने आवश्यक कागजात सदन के पटल पर पेश कराने के बाद ‘प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020’ को लिया.

सदन ने कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को अस्वीकृत करने के साथ ही उक्त विधेयक को शोर-शराबे के बीच ही ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी.

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने ‘भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान विधियां (संशोधन) विधेयक, 2020’ को हंगामे के बीच ही पेश किया.

हालांकि विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी जारी रही और हंगामे के कारण पीठासीन सभापति लेखी ने सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर करीब 2:10 बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)