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सार्क बैठक: कोविड-19 आपात कोष के लिए भारत का 1 करोड़ डॉलर का प्रस्ताव, पाक ने कश्मीर मुद्दा उठाया

भारतीय अधिकारियों ने कहा कि कोरोना वायरस के खतरे पर सार्क देशों के वीडियो कान्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान ने कश्मीर के बारे में ‘अवांछित’ बयान देकर एक मानवीय मुद्दे का ‘राजनीतिकरण’ करने का प्रयास किया, जो इस तरह के मुद्दों से निपटने में उसके ढुलमुल रवैये को प्रदर्शित करता है.

रविवार को कोरोना वायरस के मुद्दे पर वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लेते सार्क देशों के नेता. (फोटो: विदेश मंत्रालय यूट्यूब चैनल)

रविवार को कोरोना वायरस के मुद्दे पर वीडियो कॉन्फ्रेंस में भाग लेते सार्क देशों के नेता. (फोटो: विदेश मंत्रालय यूट्यूब चैनल)

नई दिल्ली: सार्क देशों ने रविवार को कोरोना वायरस का मिलकर मुकाबला करने का निश्चय किया और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 करोड़ डॉलर की प्रारंभिक पेशकश करते हुए कोविड-19 आपात कोष सृजित करने का प्रस्ताव किया और कहा कि हम साथ मिलकर इससे बेहतर ढंग से निपट सकते हैं, दूर जाकर नहीं.

इस वीडियो कांफ्रेंस का संदेश इस विषाणु से एकजुट होकर मुकाबला करना रहा लेकिन पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए इस मौके का इस्तेमाल किया और उसने कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिये जम्मू कश्मीर में सभी तरह की पाबंदी हटाने की मांग की.

मोदी के अलावा श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य मामलों पर विशेष सहायक जफर मिर्जा ने इस वीडियो कांफ्रेंस में हिस्सा लिया.

मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, ‘सार्क क्षेत्र में कोरोना वायरस से संक्रमण के लगभग 150 मामले आए हैं, लेकिन हमें सतर्क रहने की जरूरत है. तैयार रहें लेकिन घबराएं नहीं..यही हमारा मंत्र है.’

उन्होंने शुक्रवार को कोरोना वायरस से निपटने के लिये सार्क देशों को संयुक्त रणनीति बनाने का सुझाव देते हुए कहा था कि सार्क देश उदाहरण पेश करें. उन्होंने कहा कि हम साथ मिलकर इससे बेहतर ढंग से निपट सकते हैं, दूर जाकर नहीं.

प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड-19 पर कहा, ‘ एक-एक करके उठाये गए हमारे कदमों से अफरा-तफरी से बचने में मदद मिली, संवेदनशील समूहों तक पहुंचने के लिये विशेष कदम उठाये.’

मिर्जा ने कहा कि कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिये जम्मू कश्मीर में सभी तरह की पाबंदी को हटा लेना चाहिए . पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कोरोना वायरस से निपटने के लिये चीन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सार्क देश उन सर्वश्रेष्ठ पहलों को अपना सकते हैं.

मिर्जा ने कहा, ‘स्वास्थ्य में समानता सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक मूल सिद्धांत है. इस संबंध में, मुझे कहना है कि यह चिंता का विषय है कि जम्मू कश्मीर में कोविड-19 के मामले दर्ज किये गये हैं और स्वास्थ्य आपात स्थिति में यह जरूरी है कि वहां तत्काल सभी पाबंदियों को हटा लेना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘संचार और आवाजाही को खोले जाने से सूचना का आदान-प्रदान होगा, दवाइयों के वितरण और रोकथाम की अनुमति होगी.’

नेताओं की शुरूआती टिप्पणी के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कई सुझाव दिये जिसकी सार्क देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने सराहना की.

मोदी ने कहा, ‘मैं कोविड-19 आपात कोष सृजित करने का प्रस्ताव करता हूं. यह हम सबके स्वैच्छिक योगदान पर आधारित हो सकता है. भारत इस कोष के लिये एक करोड़ डॉलर की प्रारंभिक पेशकश के साथ इसकी शुरुआत कर सकता है. हममें से कोई भी तात्कालिक कार्रवाई पर आने वाले खर्च को पूरा करने के लिये इस कोष का इस्तेमाल कर सकता है.’

उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के विदेश सचिव दूतावासों के जरिये इस कोष के उपयोग को अंतिम रूप देने के लिये तेजी से समन्वय कर सकते हैं.

मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सार्क देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के दौरान आपसी सहयोग पर जोर देते हुए कहा, ‘ हमने वायरस के संभावित वाहक की बेहतर ढंग से पहचान करने के लिये रोग निगरानी पोर्टल बनाया है, सार्क देशों के साथ रोग निगरानी साफ्टवेयर साझा कर सकते हैं. ’

उन्होंने कहा, ‘आगे हम दक्षिण एशियाई क्षेत्र के भीतर महामारी वाली बीमारी पर नियंत्रण के मामले में शोध पर समन्वय के लिये साझा शोध प्लेटफॉर्म बना सकते हैं. इंडियन काउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च इस तरह की कवायद के समन्वय में मदद कर सकता है.’

मोदी ने हालिया सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हिस्सा लेने के लिये ओली को धन्यवाद दिया और गनी को दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी.

सार्क के नए महासचिव भी इसमें शामिल हुए लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बोला. उन्होंने कहा कि भारत में हम डाक्टरों, विशेषज्ञों के त्वरित प्रतिक्रिया दल और जांच संबंधी किट को जोड़ रहे हैं, वे तैनाती के लिये तैयार रहेंगे .

उधर, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने कोरोना वायरस से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए सार्क मंत्रिस्तरीय समूह के गठन का प्रस्ताव किया.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कारण अब तक दुनियाभर में 6000 लोगों की मौत हुई है.

मोदी ने सार्क देशों के नेताओं से कहा कि हमने कोरोना वायरस के फैलने के मद्देनजर मध्य जनवरी से ही भारत में प्रवेश करने वाले लोगों की जांच का काम शुरू किया था और धीरे-धीरे यात्रा पाबंदी को बढ़ाया. उन्होंने कहा कि भारत ने विदेशों में अपने लोगों की आवाज पर प्रतिक्रिया दी और विभिन्न देशों से करीब 1400 लोगों को बाहर निकाला.

मोदी ने कहा कि भारत ने कोरोना वायरस प्रभावित देशों से अपने पड़ोसी देशों के कुछ नागरिकों को भी बाहर निकालने में मदद की.

राजपक्षे ने कहा कि सार्क नेताओं को कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न समस्याओं का सामना करने के उद्देश्य से हमारी अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक तंत्र बनाना चाहिए. राजपक्षे ने कहा, ‘कोरोना वायरस से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए मैं सार्क मंत्रिस्तरीय समूह के गठन का प्रस्ताव करता हूं.’

राजपक्षे ने कहा कि अपने अनुभवों को साझा करने से कई सबक सीखे जा सकते हैं. उन्होंने सार्क देशों को सहायता की पेशकश करने पर प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया.

शेख हसीना ने कहा कि सार्क देश कोविड-19 से जुड़े विशेष मुद्दों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये चर्चा कर सकते हैं. हसीना ने कोविड -19 के मद्देनजर विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के बीच सतत संवाद का सुझाव दिया .

अशरफ गनी ने प्रधानमंत्री मोदी के सुझाव का स्वागत करते हुए देशों से कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति पर नजर रखने को कहा. उन्होंने कोरोना वायरस की समस्या से निपटने के लिए टेली-मेडिसिन का एक साझा नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव दिया .

इब्राहिम सोलिह ने कोविड-19 के खतरे से निपटने के लिए समन्वित पहल पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी देश इस हालात से अकेले नहीं निपट सकता . उन्होंने कोविड-19 की चुनौती से निपटने के वास्ते क्षेत्रीय पहल करने और कोविड – 19 आपात कोष स्थापित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव का स्वागत किया .

नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कोरोना वायरस से निपटने के लिये सार्क देशों के बीच सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई . उन्होंने कहा कि हमारा सामूहिक प्रयास कोरोना वायरस से निपटने में सार्क क्षेत्र में ठोस रणनीति तैयार करने में मदद करेगा.

लोटे शेरिंग ने कहा कि कोरोना वायरस से निपटने के लिये हम सभी एक साथ आएं.

उधर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य मामलों पर विशेष सहायक जफर मिर्जा ने कहा कि कोरोना वायरस फैलने के मद्देनजर उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिये कोई भी देश मुंह नहीं मोड़ सकता है. उन्होंने कहा कि हमारा सामूहिक प्रयास कोरोना वायरस से निपटने में सार्क क्षेत्र में ठोस रणनीति तैयार करने में मदद करेगा.

पाक ने कश्मीर मुद्दा उठा कर मानवीय मुद्दे का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया: सरकारी सूत्र

कोरोना वायरस के खतरे पर दक्षेस देशों के वीडियो कान्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान ने कश्मीर के बारे में ‘अवांछित’ बयान देकर एक मानवीय मुद्दे का ‘राजनीतिकरण’ करने का प्रयास किया, जो इस तरह के मुद्दों से निपटने में उसके ढुलमुल रवैये को प्रदर्शित करता है. यह बात रविवार को सरकारी सूत्रों ने कही.

वीडियो कान्फ्रेंस का उद्देश्य इस वायरस से एकजुट होकर निपटने का संदेश देना था, लेकिन पाकिस्तान ने इस मौके का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए किया और कहा कि कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए जम्मू कश्मीर में सभी तरह की पाबंदी हटा लेनी चाहिए.

सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान ने ‘अशिष्ट’ बनने का चयन किया और वीडियो कान्फ्रेंस का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने स्वास्थ्य विषयों (पाकिस्तान के) पर प्रधानमंत्री इमरान खान के सलाहकार एवं संबद्ध विभाग के मंत्री जफर मिर्जा को भेजा, जो बोलने के दौरान सहज नहीं थे.

सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा मामले को उठाना मानवीय मुद्दे से निपटने में उसके ‘ढुलमुल रवैये’ को दिखाता है.

एक सरकारी सूत्र ने कहा, ‘मुद्दे को उठाना अवांछित था और संदर्भ से परे था. पाकिस्तान ने एक मानवीय मुद्दे का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया.’

सूत्रों ने कहा कि भारत वीडियो कान्फ्रेंस से पाकिस्तान को अलग रख सकता था लेकिन यह एक मानवीय मुद्दा था, इसलिए इस पड़ोसी देश को आमंत्रित किया गया.

सूत्र ने कहा, ‘प्रत्येक नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का जवाब दिया लेकिन पाकिस्तान ने अपने स्वास्थ्य मंत्री को भेजने का चयन किया, जो उसमें गंभीरता की कमी को दर्शाता है.’

सूत्रों ने कहा कि यहां तक कि नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी शर्मा ओली ऐसे दिन इसमें शामिल हुए जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इससे दूर रहने का फैसला किया.

सूत्रों ने कहा कि जब पाकिस्तान ने (कश्मीर का) मुद्दा उठाया, तब किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

वहीं, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस वीडियो कान्फ्रेंस में कश्मीर का मुद्दा उठाने को लेकर पाकिस्तान की आलोचना की और कहा कि इस देश को विश्व समुदाय द्वारा अलग-थलग किये जाने की जरूरत है.

सिंघवी ने एक ट्वीट कर कहा, ‘पाकिस्तान इससे नीचे नहीं गिर सकता. एक मानवीय संकट के समय वह एक जूनियर मंत्री को दक्षेस के राष्ट्रप्रमुखों की बैठक में भेजता है. उसके बाद कश्मीर का मुद्दा उठाता है. उस पर तरस आता है.’

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने भी ट्वीट किया, ‘कोरोना वायरस से निपटने के लिए दक्षेस की आयोजित बैठक में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का मुद्दा उठाना उसके शासन के ‘खराब और दयनीय’ मानक के साथ-साथ मानव जाति के लिए खतरे वाले वैश्विक संकट की इस घड़ी में भी उसके ‘अदूरदर्शी, गलत, दुर्भावनापूर्ण’ प्राथमिकताओं को दिखाता है, जो चौंकाने वाला और शर्मनाक है.’

उन्होंने दक्षेस देशों के वीडियो सम्मेलन के संबंध में मोदी सरकार की पहल की प्रशंसा भी की.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)