भारत

90 दिन में आरोपपत्र नहीं दाखिल होने पर अखिल गोगोई को मिली जमानत, लेकिन नहीं होगी रिहाई

असम में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई को तीन अन्य लंबित मामलों के कारण जेल से रिहा नहीं किया जाएगा.

सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई. (फोटो: पीटीआई)

सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई. (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: गुवाहाटी की एक विशेष एनआईए अदालत ने सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हिंसा में कथित भूमिका को लेकर पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई को मंगलवार को जमानत दे दी क्योंकि जांच एजेंसी कथित माओवादी संबंध के मामले में 90 दिनों की निर्धारित अवधि के अंदर उनके विरूद्ध आरोपपत्र नहीं दाखिल कर पायी.

हालांकि वह जेल से बाहर नहीं निकल पायेंगे क्योंकि उनके विरूद्ध तीन अन्य मामले लंबित हैं.

जांच एजेंसी ने आगे की जांच एवं आरोपपत्र दायर करने के लिए और 90 दिनों के वास्ते उनकी न्यायिक हिरासत मांगी थी.

अदालत ने जांच एजेंसी की मांग खारिज कर दी जिसके बाद कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के नेता ने जमानत के लिए आवेदन दिया.

द हिंदु के अनुसार, गोगोई को 30 हजार रुपये की जमानत राशि पर जमानत दी है.

एनआईए अधिकारियों ने कहा कि वे विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेंगे.

गोगोई 26 दिसंबर से न्यायिक हिरासत में हैं.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उन्हें गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत 12 दिसंबर को जोरहाट से तब गिरफ्तार किया था, जब असम में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा था.

संशोधित यूएपीए कानून के तहत सरकार को किसी ऐसे व्यक्ति को ‘आतंकवादी’ करार देने का अधिकार है जिसने कोई आतंकवादी कृत्य किया हो या ऐसे कृत्य की योजना बनाते, बढ़ावा देते या उसमें शामिल पाया गया हो. इस तरह आतंकवादी घोषित किए जाने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने की अनिवार्यता नहीं है.

गोगोई पिछले एक महीने से किडनी और रीढ़ संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं.

राज्य की सोनोवाल सरकार ने साल 2009 में कांग्रेस की सरकार के दौरान गोगोई के खिलाफ दर्ज एक मामले के तहत उन्हें गिरफ्तार करवाया है.

गोगोई कांग्रेस सरकार के भी विरोधी रहे हैं और इसके चलते विभिन्न आरोपों के तहत उन्हें कई बार जेल भेजा गया था. सोनोवाल सरकार ने 2017 और सितंबर 2019 में गोगोई पर देशद्रोह का आरोप लगाया लेकिन दोनों बार गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें रिहा कर दिया.

आरोप है कि गोगोई ने 2009 से अब तक भाकपा (माओवादी) के कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बैठकों की व्यवस्था की है और ‘इस संगठन की गतिविधियों के लिए’ देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया है.

हालांकि साल 2010 में इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिल गोगोई में कहा था, ‘मैं मार्क्सवादी हूं, माओवादी नहीं’.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)