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सीएए प्रदर्शन: आज़मगढ़ कोर्ट ने राजद्रोह के आरोपी 19 लोगों की ज़मानत याचिका ख़ारिज की

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के बिलरियागंज से बीते पांच फरवरी को नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के चलते इन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. इन पर देश विरोधी नारा लगाने और हिंसा करने का आरोप है.

भारत के विभिन्न शहरों में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लगातार प्रदर्शन चल रहा है. (फोटो: पीटीआई)

भारत के विभिन्न शहरों में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लगातार प्रदर्शन चल रहा है. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की एक जिला एवं सत्र न्यायालय ने राजद्रोह के आरोपी 19 लोगों की जमानत याचिका खारिज कर दी. इन लोगों को पिछले महीने की पांच फरवरी को विवादित नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के चलते गिरफ्तार किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जिला एवं सत्र जज प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा, ‘मामले के सभी पहलुओं और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं है.’

कुल 12 पेज के इस आदेश में पूरे घटनाक्रम का विस्तार से वर्णन है और एफआईआर में शामिल बातों को दोहराया गया है. हालांकि जमानत याचिका को खारिज करने के आधार को आदेश के आखिरी दो वाक्यों में समेट दिया गया है.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने आजमगढ़ के बिलरियागंज थाना क्षेत्र के जौहर अली पार्क में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से ‘देश विरोधी’ नारे लगाने और हिंसा करने के आरोप 19 लोगों पर राजद्रोह का आरोप लगाया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के महासचिव ताहिर मदनी (65) भी शामिल हैं.

एफआईआर के अनुसार, 35 लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नारे लगाए थे और हिंदुओं को गाली दिया था.

इस संबंध में पांच फरवरी को 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और अगले ही दिन जमानत याचिका दायर की गई थी. हालांकि करीब एक महीने बाद 12 मार्च को इस संबंध में सुनवाई हुई और जज ने आदेश सुरक्षित रखा.

इन पर आईपीसी धारा 124-ए (देशद्रोह), 147 (दंगा), 153-ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), 307 (हत्या का प्रयास), 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप लगाए गए थे. इसके साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.

आरोपियों ने कहा कि उनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे आजमगढ़ के स्थायी निवासी हैं और राज्य पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के समय कोई हथियार बरामद नहीं किया. उन्होंने कहा कि उन्हें इस आधार पर जमानत दी जानी चाहिए. हालांकि, आदेश में ऐसी किसी भी परिस्थिति पर चर्चा नहीं की गई है.