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कोरोना वायरस: लॉकडाउन ने दी प्रदूषण से महानगरों को राहत, प्रदूषण में 25 प्रतिशत तक गिरावट

कोरोना वायरस से सुरक्षा के मद्देनजर पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है और सभी परिवहन सेवाएं बंद हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, लॉकडाउन के चलते दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और पुणे समेत देश के 104 प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता संतोषजनक स्तर पर पहुंच गई है.

New Delhi: A man wearing face mask walks on a road during the complete lockdown imposed to contain the spread of novel coronavirus, in New Delhi, Wednesday, March 25, 2020. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI25-03-2020_000242B)

दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान मास्क लगाए सड़क से गुजरता एक व्यक्ति. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान वाहन, कारखाने और कार्बन उत्सर्जन से जुड़े तमाम साधन बंद रहने के कारण पिछले पांच दिनों में दिल्ली सहित अन्य महानगरों के वायु प्रदूषण के स्तर में 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दौरान ही वायु प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित रहने वाले चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और पुणे में हवा की गुणवत्ता बेहतर हुई थी.

इन शहरों में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारकों (पीएम 10, पीएम 2.5 और एनओ) के उत्सर्जन में 15 से 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है.

जनता कर्फ्यू के बाद पिछले चार दिनों से जारी लॉकडाउन के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर देश के 104 प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता संतोषजनक स्तर पर पहुंच गई है.

एक्यूआई के गुरुवार तक के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद सहित अधिकांश शहरों में हवा की गुणवत्ता का स्तर संतोषजनक हो गया है. सिर्फ गुवाहाटी, कल्याण और मुजफ्फरपुर में हवा की गुणवत्ता का स्तर अभी भी ‘खराब’ श्रेणी में बना हुआ है.

वहीं, चंडीगढ़, जालंधर, लुधियाना, कानपुर, खन्ना, कोटा, मानेसर, नारनौल, राजामहेन्द्रवरम, सतना, यादगीर, भिवंडी, हुबली, कैथल, दमोह, पटियाला, कोच्चि, कोझिकोड और उदयपुर में हवा की गुणवत्ता ‘अच्छी’ श्रेणी में दर्ज की गई है. जबकि वाराणसी और ग्रेटर नोएडा सहित 14 शहरों में वायु गुणवत्ता सामान्य श्रेणी में पहुंच गई है.

उल्लेखनीय है कि देश के 104 शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति पर सीपीसीबी के वायु गुणवत्ता सूचकांक के माध्यम से निरंतर निगरानी की जाती है. सूचकांक पर पार्टिकुलेट तत्वों- पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर के आधार पर इन शहरों में वायु प्रदूषण को छह श्रेणियों (अच्छा, संतोषजनक, सामान्य, खराब, बहुत खराब और गंभीर) में रखा जाता है.

एक्यूआई पर ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में फिलहाल कोई शहर नहीं है. वायु गुणवत्ता पर निगरानी के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संस्था ‘सफर’ के मुताबिक वायु प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित चार महानगरों- दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और पुणे में जनता कर्फ्यू के दौरान वाहन जनित प्रदूषण और विकास कार्यों से उत्पन्न धूल की मात्रा में खासी गिरावट दर्ज की गई.

सफर के आंकड़ों से स्पष्ट है कि वाहन जनित प्रदूषण में पीएम 10 के उत्सर्जन में 15 से 20 प्रतिशत और पीएम 2.5 के उत्सर्जन में 30 से 40 प्रतिशत की कमी आयी.

जबकि निर्माण एवं अन्य विकास कार्यों से उड़ने वाली धूल के कारण पीएम 10 के उत्सर्जन में 40 से 48 प्रतिशत और पीएम 2.5 के उत्सर्जन में 17 से 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.

मौसम के पूर्वानुमान से जुड़ी संस्था ‘स्काईमेट’ के पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. महेश पालावत ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण एक चौथाई तक कम हुआ है.

उन्होंने इसके तीन प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि लॉकडाउन के कारण वाहनों का थमना, विकास परियोजनाएं रुकने से निर्माण गतिविधियां बंद होना और मौसम के बदले मिजाज ने प्रदूषण कम करने में मुख्य भूमिका निभायी है.

डॉ. पालावत ने कहा कि सीपीसीबी और सफर के आंकड़ों से वाहन एवं धूल जनित प्रदूषण में गिरावट की स्थिति उजागर हुई है. साथ ही पिछले तीन दिनों से उत्तर पश्चिमी भारत में बारिश और तेज हवाओं ने प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को वातावरण में ठहरने से रोका है. इसके परिणाम स्वरूप वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार हुआ है.

मौसम बदलने से तापमान में गिरावट के कारण कोरोना वायरस के संक्रमण पर पड़ने वाले असर के सवाल पर डॉ. पालावत ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रमाणिक अध्ययन इस बारे में नहीं किया गया है जिससे तापमान में बदलाव के वायरस पर प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझा जा सके.