भारत

मज़दूरों का पलायन रोकने के लिए उठाए गए क़दमों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से रिपोर्ट तलब की

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लागू 21 दिनों के लॉकडाउन की वजह से बेरोज़गार होने वाले हज़ारों प्रवासी कामगारों के लिए खाना, पानी, दवा और समुचित चिकित्सा सुविधाओं जैसी राहत दिलाने का अनुरोध किया गया है.

Ghaziabad: Migrant workers walk on railway tracks after they couldnt find any transport to return to their native places, during a 21-day nationwide lockdown to limit the spread of coronavirus, in Ghaziabad, Thursday, March 26, 2020. (PTI Photo/Arun Sharma)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते आजीविका का संकट खड़ा होने के कारण हजारों प्रवासी मजदूरों के अपने घरों को वापस लौटने के बीच बीते सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने टिप्पणी की कि भय एवं दहशत कोरोना वायरस से बड़ी समस्या बनती जा रही है.

शीर्ष न्यायालय ने इन लोगों के पलायन को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में केंद्र से मंगलवार तक रिपोर्ट देने को कहा है.

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे और जस्टिस एल. नागेश्वर राव की पीठ ने इस मामले की वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कहा कि वह इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बीच कोई निर्देश देकर ज्यादा भ्रम पैदा नहीं करना चाहती.

पीठ ने कामगारों के पलायन से उत्पन्न स्थिति को लेकर अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव और रश्मि बंसल की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा कि वह इस मामले में वह केंद्र की स्थिति रिपोर्ट का इंतजार करेगी.

इन याचिकाओं में कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लागू 21 दिनों के लॉकडाउन की वजह से बेरोजगार होने वाले हजारों प्रवासी कामगारों के लिए खाना, पानी, दवा और समुचित चिकित्सा सुविधाओं जैसी राहत दिलाने का अनुरोध किया गया है.

केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इन कामगारों के पलायन को रोकने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों ने इस स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं.

अधिवक्ता श्रीवास्तव ने तमाम खबरों का हवाला दिया और व्यक्तिगत रूप से बहस करते हुए कहा कि प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे पर राज्यों के बीच परस्पर समन्वय और सहयोग का अभाव है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरू में इन कामगारों के लिये दो दिन बसों की व्यवस्था की लेकिन अब उसने भी बस सेवा बंद कर दी है.

इस मामले में केंद्र द्वारा हलफनामे पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने के मेहता के कथन पर पीठ ने कहा, ‘हम उन चीजों पर गौर नहीं करेंगे जिन पर सरकार पहले से काम कर रही है. हम केंद्र की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे.’

दूसरी याचिकाकर्ता रश्मि बंसल ने कहा कि इन कामगारों के लिए चिकित्सा और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है.

उन्होंने सुझाव दिया कि पलायन कर रहे कामगारों के समूहों पर वायरस से बचाव करने वाली दवाओं का छिड़काव करवाया जा सकता है और इनके खानपाल की व्यवस्था के लिए मध्याह्न भोजन उपलध कराने वाली संस्थाओं को इससे जोड़ा जा सकता है.

बंसल के इस कथन पर पीठ ने टिप्पणी की, ‘आप यह मान रही हैं कि सरकार कुछ नहीं कर रही है. उन्हें इन दोनों याचिकाओं पर एक समान जवाब दाखिल करने दीजिए.’

बंसल ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की दहशत और भय से शहर छोड़ने का प्रयास कर रहे इन कामगारों को समझाने बुझाने के लिए परामर्शदाताओं की सेवाएं ली जानी चाहिए.

इस पर पीठ ने टिप्पणी की, ‘यही भय और दहशत इस वायरस से कहीं ज्यादा बड़ी समस्या है. हम इस मामले में कोई निर्देश जारी करके भ्रम पैदा नहीं करना चाहते, क्योंकि सरकार पहले से ही सारी चीजों को देख रही है.

पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इन याचिकाओं को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया.

मालूम हो कि देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 32 हो चुकी है और इस महामारी के संक्रमण से पीड़ित होने वालों की संख्या बढ़कर 1,251 हो गई है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)