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कोरोना के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी में चली जाएगी: संयुक्त राष्ट्र व्यापार रिपोर्ट

व्यापार पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने से विकासशील देशों के लिए गंभीर संकट पैदा होगा लेकिन चीन और भारत इससे बच सकते हैं.

नोएडा में अनिश्चितकाल के लिए बंद ग्रेट इंडिया मॉल. (फोटो: द वायर)

नोएडा में अनिश्चितकाल के लिए बंद ग्रेट इंडिया मॉल. (फोटो: द वायर)

संयुक्त राष्ट्र/वाशिंगटन: व्यापार पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण खरबों डॉलर के अनुमानित नुकसान के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी में चली जाएगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यूएन व्यापार रिपोर्ट में विकासशील देशों के लिए गंभीर चिंताएं जताई गई हैं जिसमें भारत और चीन अपवाद हो सकते हैं.

कोविड-19 संकट से अभूतपूर्व आर्थिक नुकसान झेल रहे विकासशील देशों में रहने वाली दुनिया की दो-तिहाई आबादी वाले इन देशों के लिए संयुक्त राष्ट्र 2.5 ट्रिलियन डॉलर के बचाव पैकेज की मांग कर रहा है.

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) के नए विश्लेषण के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास निकाय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निर्यातक देश अगले दो वर्षों में विदेशों से निवेश में दो ट्रिलियन से तीन ट्रिलियन डॉलर की गिरावट का सामना करेंगे.

जी-20 देशों के हवाले से यूएनसीटीएडी ने कहा कि विश्व की उन्नत अर्थव्यवस्थाओं और चीन ने बड़े सरकारी पैकेजों को एक साथ रखा है जिससे उनकी अर्थव्यवस्थाओं को 5 ट्रिलियन डॉलर की मदद मिलेगी.

यूएनसीटीएडी ने कहा, ‘यह एक बड़े संकट में उठाया गया एक अभूतपूर्व कदम है, इससे इस संकट से आर्थिक और मानसिक रूप से निपटने में मदद मिलेगी.’

इससे बड़ी जी-20 अर्थव्यवस्थाओं में एक से दो लाख करोड़ डॉलर की मांग पैदा होगी और वैश्विक उत्पादन में दो प्रतिशत का अंतर पड़ेगा.

यूएनसीटीएडी ने कहा, ‘हालांकि इसके बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी में चली जाएगी, जिससे अरबों-खरबों की वैश्विक आय में कमी होगी. यह विकासशील देशों के लिए गंभीर संकट पैदा करेगा, जिससे चीन और भारत बच सकते हैं.’

हालांकि, रिपोर्ट में इस बारे में यह विस्तार से नहीं बताया गया है कि क्यों और कैसे भारत और चीन अपवाद होंगे क्योंकि दुनिया को वैश्विक आय में मंदी और नुकसान का सामना करना पड़ रहा है जो विकासशील देशों को प्रभावित करेगा.

यूएनसीटीएडी ने कहा कि जिस गति से महामारी से विकासशील देशों को आर्थिक झटका लगा है, वह साल 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट की तुलना में नाटकीय है.

बता दें कि, कोरोना वायरस महामारी से मरने वालों की संख्या 35,000 हो गई है, जबकि विश्व स्तर पर पुष्ट मामलों की संख्या 750,000 से ऊपर है.

एशिया की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस: विश्व बैंक

विश्व बैंक ने अनुमान जाहिर किया है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण इस साल चीन तथा अन्य पूर्वी एशिया प्रशांत देशों में अर्थव्यवस्था की रफ्तार बहुत धीमी रहने वाली है, जिससे लाखों लोग गरीबी की ओर चले जाएंगे.

विश्व बैंक ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह आंशका व्यक्त की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र में इस वर्ष विकास की रफ्तार 2.1 फीसदी रह सकती है जो 2019 में 5.8 फीसदी थी.

बैंक का अनुमान है कि 1.1 करोड़ से अधिक संख्या में लोग गरीबी के दायरे में आ जाएंगे. यह अनुमान पहले के उस अनुमान के विपरित है जिसमें कहा गया था कि इस वर्ष विकास दर पर्याप्त रहेगी और 3.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ जाएंगे.

इसमें कहा गया है कि चीन की विकास दर भी पिछले साल की 6.1 फीसदी से घटकर इस साल 2.3 फीसदी रह जाएगी.

बता दें कि, पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा था कि कोरोना वायरस महामारी के कारण विनाशकारी प्रभाव के सामने है और स्पष्ट रूप से दुनिया मंदी में प्रवेश कर गई है. हालांकि, आईएमएफ ने अगले साल सुधार का अनुमान जताया है.

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलिना जॉर्जीवा ने कहा था कि हमने 2020 और 2021 के लिए विकास की संभावनाओं का दोबारा मूल्यांकन किया है. यह साफ है कि दुनिया मंदी के दौर में पहुंच गई है जो कि 2009 या उससे भी बुरी है. हम 2021 में सुधार कर सकते हैं.

उन्होंने कहा था कि 2021 में अर्थव्यवस्था तभी मंदी से उबर सकती है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय हर जगह वायरस को फैलने से रोक पाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)