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2019-20 में 5.47 करोड़ परिवारों ने मनरेगा के तहत काम मांगा, पिछले नौ सालों में सर्वाधिक

मनरेगा के तहत काम मांगने वालों बढ़ती संख्या ये दर्शाता है कि ग्राम पंचायत ज़्यादा से ज़्यादा बेरोज़गारों को काम दे रहे हैं.

(फोटो साभार: UN Women/Gaganjit Singh/Flickr CC BY-NC-ND 2.0)

(फोटो साभार: UN Women/Gaganjit Singh/Flickr CC BY-NC-ND 2.0)

नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत के बीच साल 2019-20 में मनरेगा के तहत काम मांगने वाले परिवारों की संख्या बढ़कर पिछले नौ सालों में सर्वाधिक हो गई है.

मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई जानकारी के मुताबिक 2019-20 में 5.47 करोड़ परिवारों ने काम मांगा, जो कि साल 2010-11 में 5.5 करोड़ परिवार द्वारा मांगे गए काम से ज्यादा है. साल 2018-19 में 5.27 करोड़ परिवारों ने काम मांगा था.

वित्त वर्ष 2019-20 में मनरेगा में काम करने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा रही. इस दौरान पूरे देश भर में 7.86 करोड़ लोगों ने काम किया जो कि 2012-13 में 7.97 करोड़ लोगों द्वारा किए गए काम के बाद से सर्वाधिक है.

मालूम हो कि साल 2006 मे 200 जिलों में लागू किए जाने के साथ मनरेगा योजना की शुरुआत हुई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, ऐसी ग्राम पंचायतों की संख्या में गिरावट आई है जो मनरेगा के तहत खर्च का लेखा-जोखा नहीं तैयार कर रहे थे. वित्त वर्ष 2018-19 में ऐसी ग्राम पंचायतों की संख्या 10,978 थी जो कि वित्त वर्ष 2019-20 में घटकर 9,144 हो गई. ऐसी पंचायतों की संख्या वित्त वर्ष 2017-18 में 11,789, 2016-17 में 19,451, 2015-16 में 39,469 और 2014-15 में 39,531 थी.

भारत में कुल 2.63 लाख ग्राम पंचायत हैं. शून्य खर्च दिखाने वाले पंचायतों की संख्या में गिरावट दर्शाता है कि ज्यादा से ज्यादा ग्राम पंचायत बेरोजगारों को मनरेगा के तहत कार्य दे रहे हैं.

हालांकि मनरेगा के तहत प्रतिदिन मजदूरी काफी कम है. वित्त वर्ष 2019-20 में औसत मजदूरी प्रतिदिन 182.09 रुपये थी जो कि वित्त वर्ष 2018-19 के 179.13 रुपये के मुकाबले मात्र तीन रुपये अधिक थी.

वहीं मनरेगा के तहत प्रति व्यक्ति लागत प्रतिदिन बढ़कर 2019-20 में औसतन 263.3 रुपये हो गई. वित्त वर्ष में 2018-19 में ये राशि 247.19 रुपये थी.

आंकड़ों से यह भी पता चला है कि 2019-20 के दौरान 263.73 करोड़ व्यक्ति कार्य दिवस पैदा किया गया, जो कि 2018-19 के 267.96 करोड़ व्यक्ति कार्य दिवस से थोड़ा कम है, लेकिन 2012-13 से 2017-18 तक प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान पैदा किए गए कुल व्यक्ति कार्य दिवस के मुकाबले काफी अधिक है.

मनरेगा के तहत 2017-18 में 233 करोड़ व्यक्ति कार्य दिवस पैदा हुआ था जबकि 2016-17 और 2015-16 में 235 करोड़ व्यक्ति कार्य दिवस पैदा हुआ. व्यक्ति कार्य दिवस का मतलब यह है कि मनरेगा के तहत कार्यरत किसी एक व्यक्ति को साल में कितने दिन रोजगार मिला.