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केंद्र ने सात लाख टन दाल आयात करने का नया कोटा तय किया, किसानों के लिए संकट

केंद्र द्वारा तय किए गए नए कोटे के तहत विदेशों से मटर और तूअर दाल की ख़रीदी की जानी है. इसके चलते घरेलू दालों के दाम गिर सकते हैं और देश के किसानों को इसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

A labourer carries a sack filled with pulses at a wholesale pulses market in Kolkata, July 31, 2015. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने विदेशों से सात लाख टन दाल खरीदने के लिए एक नई अधिसूचना जारी की है. इससे पहले मध्य मार्च में चार लाख टन दाल आयात करने लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था. इसके चलते घरेलू दालों के दाम गिर सकते हैं और देश के किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

पिछले महीने 28 मार्च 2020 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक केंद्र ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 1.5 लाख मिट्रिक टन मटर और चार लाख मिट्रिक टन तूअर दाल आयात करने के लिए कोटा निर्धारित किया है.

इससे पहले 17 मार्च को केंद्र ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान चार लाख टन उड़द खरीदने का कोटा निर्धारित किया था. सरकार प्राइवेट ट्रेडर के जरिए नए कोटे के दायरे में इन दालों का आयात करवाएगी.

डाउन टू अर्थ की खबर के मुताबिक भारत इस वित्त वर्ष में करीब 30 लाख टन दाल का आयात कर सकता है. ऐसा करना देश के किसानों को काफी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इससे दाम गिरने की संभावना है.

देश में दालों के बंपर उत्पादन होने के बावजूद भारत सरकार द्वारा विदेशों से दाल खरीदने की नीति जारी है. विडम्बना है कि भारत दुनिया में सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश होने के बावजूद सबसे ज्यादा दाल का आयात करता है.

वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अक्टूबर, 2019 तक में भारत सरकार ने 18.7 लाख टन दाल बाहर से खरीदा था. वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में 25.3 लाख टन, 2017-18 में 56.1 लाख टन और 2016-17 में 66.1 लाख टन दाल आयात किया गया था.

भारत सबसे ज्यादा 39.1 फीसदी मटर कनाडा से, 40 फीसदी से ज्यादा काबुली चना सूडान से, 95 फीसदी से ज्यादा उरद म्यांमार से, 80 फीसदी से ज्यादा मसूर कनाडा से, अधिकतर मूंग केन्या से और करीब 45 फीसदी अरहर मोजाम्बिक से खरीदता है.


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सरकार की दलील है कि वे मांग को पूरा करने के लिए दालों का आयात करते हैं. इंडियन पल्स एंड ग्रेन एसोसिएशन के मुताबिक भारत में दालों का घरेलू खपत प्रतिवर्ष 2.5 करोड़ टन है.

एक तरफ जहां सरकार विदेशों से दालों की खरीदी करवा रही है वहीं दूसरी तरफ घरेलू खरीददारी और इसके लिए चलाई जा रही योजनाओं की हालत काफी खराब है.

दालें, तिलहन और कोपरा उत्पादों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए बड़ी लंबी मांग के बाद कृषि मंत्रालय ने अक्टूबर, 2018 में पीएम-आशा योजना को लॉन्च किया था. इस योजना में पहले से ही चली आ रही मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस), जिसके तहत घरेलू दालों की खरीदी की जाती है, को भी शामिल किया गया है.

हालांकि इन योजनाओं के तहत उत्पाद के मुकाबले काफी कम दालों की खरीदी हो रही है. आलम ये है कि कृषि मंत्रालय ने इस साल के लिए इन योजनाओं का बजट बढ़ाने की मांग की थी लेकिन वित्त मंत्रालय ने इनका बजट पिछले साल के बजट से भी कम रखा. कम बजट का असर खरीदी पर साफ तौर से देखा जा सकता है.

18 फरवरी 2020 को कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए 2019-20 के लिए फसल उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक 2019-20 में दालों ((चना, मसूर, मूंग, तूअर और उरद) का अुमानित उत्पादन 230.20 लाख टन है. हालांकि इसमें से 27 फरवरी 2020 तक में सिर्फ 12.14 लाख टन दालों की खरीदी की जा सकी है.