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कोविड-19: एमनेस्टी इंडिया की असम सरकार से अपील, डिटेंशन सेंटर के बंदियों को रिहा करें

कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने 700 कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया है. इस कदम का स्वागत करते हुए एमेनस्टी इंडिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हिरासत केंद्रों में विदेशी घोषित किए गए और संदिग्ध नागरिकों को भी तत्काल रिहा किया जाए.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: एमेनस्टी इंटरनेशनल इंडिया (एआईआई) ने सोमवार को असम सरकार से राज्य में ‘अवैध विदेशी’ घोषित किए गए और खचाखच भरे हिरासत केंद्रों में रखे गए लोगों को तत्काल रिहा करने की अपील की है.

एआईआई के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने एक बयान में कहा कि भले ही कोविड-19 के मरीज हों या न हों, असम सरकार को उन सभी लोगों को रिहा करना चाहिए जो इन हिरासत केंद्रों में लंबे समय से रखे गए हैं.

उन्होंने कहा, ‘प्रवासन दर्जा हर मानव की मर्यादा एवं उनके जीने के अधिकार को लेकर गैर प्रासंगिक है एवं होना चाहिए.’

बयान में कहा गया है, ‘कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने के लिए 700 कैदियों को रिहा करने का असम सरकार का कदम स्वागत योग्य है. अब मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि विदेशी घोषित किए गए और छह हिरासत केंद्रों में डाल दिए गए लोगों को भी तत्काल रिहा किया जाए.’

एमनेस्टी ने कहा कि राज्य सरकार को एहसास करना चाहिए कि इन केंद्रों में करीब 800 अवैध विदेशियों पर संक्रमण का बड़ा खतरा है, इसलिए उनकी रक्षा के लिए हर कदम उठाया जाए एवं उन्हें तत्काल रिहा किया जाए.

द टेलीग्राफ के मुताबिक इससे पहले असम के एक संगठन ‘जस्टिस एंड लिबर्टी इनिशिएटिव’ जो कानूनी सहायता प्रदान करता है, ने कोरोना वायरस प्रकोप के मद्देनजर असम के हिरासत केंद्रों से ‘घोषित विदेशियों’ को छोड़ने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी लिखा था.

एननेस्टी अपने बयान में कहा है कि  कोरोना महामारी के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने भी बिना किसी देरी के प्रवासी बंदियों को रिहा करने के लिए सरकारों से आह्वान किया है.

बयान में कहा गया कि कोविड -19 के खतरे के मद्देनजर असम सरकार को उन सभी कैदियों को रिहा करना चाहिए जिन्हें हिरासत केंद्रों में लंबे समय तक हिरासत में रखा गया है.

इससे पहले 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल से अधिक समय तक हिरासत केंद्रों में रहने वाले बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया था, लेकिन कई लोग जमानत या पैरोल तक न पहुंच पाने की वजह से हिरासत में हैं.

अविनाश कुमार ने कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट ने कैदियों की रिहाई का आदेश दिया है तो असम सरकार को भी दोषपूर्ण प्रक्रियाओं के माध्यम से हिरासत में रखे गए लोगों को रिहा करना चाहिए और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और भोजन, पानी, आश्रय सहित अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान करनी चाहिए.’

फिलहाल असम में छह केंद्रीय जेल और 22 जिला जेल सहित 31 जेल हैं और यह हिरासत केंद्र केंद्रीय कारावासों में ही बनाए गए हैं.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2018 के अंत तक असम के विभिन्न जेलों में 8,282 कैदी थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)