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शीर्ष अधिकारियों की चेतावनी के बावजूद ट्रंप ने कोरोना वायरस संकट को हल्के में लिया: रिपोर्ट

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी खबर में खुलासा किया गया है कि खुफिया विभाग, राष्ट्रीय सुरक्षा सहायकों और सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आने वाली महामारी और उसके परिणामों के बारे में चेतावनी दी थी लेकिन ट्रंप इस संकट को कमतर आंकते रहे.

डोनाल्ड ट्रंप. (फोटो: रॉयटर्स)

डोनाल्ड ट्रंप. (फोटो: रॉयटर्स)

न्यूयॉर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को महामारी के खतरे के बारे में चेताया गया था लेकिन वह वायरस की गंभीरता की अनदेखी करते रहे और उन संदेशों पर ध्यान देने की जगह अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करते रहे. यह बात अमेरिका के एक प्रमुख अखबार की खबर में कही गयी है.

न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) में छपी खबर में खुलासा किया गया है कि खुफिया विभाग, राष्ट्रीय सुरक्षा सहायकों और सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आने वाली महामारी और उसके परिणामों के बारे में चेतावनी दी थी लेकिन ट्रंप इस संकट को कमतर आंकते रहे.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा, ‘यह खुलासा हुआ है कि राष्ट्रपति को संभावित महामारी के बारे में चेतावनी दी गई थी लेकिन आंतरिक बंटवारा, योजना की कमी और अपने स्वाभाविक-ज्ञान पर उनका भरोसा धीमी प्रक्रिया की वजह बना.’

जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका दुनिया में सबसे बुरी तरह प्रभावित देश है जहां पांच लाख 57 हजार से ज्यादा कोविड-19 के मामले हैं और 20,608 लोगों की जान जा चुकी है.

अखबार ने कहा, ‘व्हाइट हाउस के शीर्ष सलाहकारों के साथ ही मंत्रिमंडल के विशेषज्ञों तथा खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी थी और कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिये आक्रामक कार्रवाई का अनुरोध किया था.’

ट्रंप का नजरिया प्रशासन के अंदर चीन से निपटने के तौर-तरीकों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों से ‘ओत-प्रोत’ होने के साथ ही उनके इस संदेह पर भी आधारित था कि अधिकारियों को इसके लिये क्या प्रेरित कर रहा है. वह इसे ‘डीप स्टेट’ (राज्य के अंदर ही अलग एजेंडे व नीतियों को लेकर राज्य) के तौर पर देख रहे थे.

इसके अलावा जन स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा की गई अनुशंसाओं को अक्सर आंतरिक चर्चाओं में आर्थिक व राजनीतिक विचारधाराओं से चुनौती मिलती थी जिससे फैसले लेने में और देरी हुई.

न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर में कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों को जनवरी के शुरू में चीन के वुहान से नए वायरस से संभावित खतरे को लेकर चेतावनी मिली थी.

खबर में कहा गया, ‘विदेश मंत्रालय के महामारी विशेषज्ञों ने शुरू में चेतावनी दी थी कि यह वायरस महामारी में बदल सकता है जबकि डिफेंस इंटेलीजेंस एजेंसी की एक छोटी इकाई नेशनल सेंटर फॉर मेडिकल इंटेलीजेंस भी ऐसी ही निष्कर्ष पर पहुंची थी.’

इसके हफ्तों बाद राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में जैव-रक्षा विशेषज्ञों ने महामारी की परत-दर-परत जांच शुरू की कि आखिर वुहान में हो क्या रहा था और अधिकारियों से शिकागो शहर के बराबर के शहरों में पृथक वास की व्यवस्था करने तथा लोगों को घर से काम करने को कहने का अनुरोध किया.

इसमें कहा गया, ‘कुछ शुरुआती चेतावनियों में लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लोग चीन को दोषी ठहराने में जुटे रहे और उन्हें अक्सर राष्ट्रपति के आर्थिक सलाहकारों का विरोध झेलना पड़ा जो ऐसे समय में चीन से रिश्ते बिगड़ने की आशंका को लेकर चिंतित थे जब ट्रंप बीजिंग के साथ व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे थे.’

इसके बाद भी कई मौकों पर अधिकारियों ने ट्रंप को सामाजिक दूरी, घरों में रहने और घर से ही काम करने जैसे आक्रामक उपायों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव दिया लेकिन बात बनी नहीं.

ट्रम्प के शीर्ष व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने जनवरी के अंत में एक मेमो में यह तर्क देते हुए लिखा था कि वायरस के कारण एक महामारी अमेरिका को महंगी पड़ सकती है. उन्होंने कहा था कि इससे पांच लाख के करीब लोगों की मौत हो सकती है और अर्थव्यवस्था को खरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है.

मेमो में कहा गया था कि सबसे बुरे हालात में अमेरिका की 30 फीसदी आबादी वायरस से संक्रमित हो सकती है. इससे पांच लाख के करीब लोगों की मौत हो सकती है.

शुरुआती दिनों में ट्रंप ने इस बात से इनकार किया था कि उस समय उन्होंने मेमो को देखा था. हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि ट्रंप के सहयोगियों ने इस मुद्दे को उनके साथ उठाया था और वे इस बात से नाखुश थे कि नवारो ने ऐसा लिखित में दिया.

एनवाईटी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि अमेरिका ने तीन महत्वपूर्ण सप्ताह गवा दिए. रिपोर्ट के अनुसार, ‘फरवरी के तीसरे सप्ताह तक, प्रशासन के शीर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला था कि वायरस के प्रसार को कम करने के लिए एक अधिक आक्रामक रणनीति अपनाने की आवश्यकता है जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग, घर में रहने के आदेश और स्कूलों को बंद करना शामिल थे. हालांकि, उन्हें योजना को राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत करने का कभी मौका नहीं मिला.’

अखबार ने कहा कि आखिरकार तीन सप्ताह बाद ट्रंप ने सामाजिक दूरी के आक्रामक दिशा-निर्देशों को अपनाने का निर्देश दिया तब तक देश में बड़े पैमाने पर निर्बाध रूप से वायरस का प्रसार हो चुका था.

एनवाईटी की रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि इस महामारी को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर व्हाइट हाउस में दो विचारों के लोग आमने-सामने आ गए थे.

अखबार के अनुसार, ‘जब मार्च में यह साफ हो चुका था कि अधिक आक्रामक कदमों को अपनाने से अब बचा नहीं जा सकता है तब भी राष्ट्रपति के सहयोगी दो मतों में बंटे हुए थे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)