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एक किसान का आख़िरी ख़त: मेरी मौत के लिए मेरे साथ शासन भी ज़िम्मेदार

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की गंजबासौदा तहसील में फसल बीमा की राशि न मिलने से एक किसान की आत्महत्या का मामला सामने आया है.

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प्रतीकात्मक फोटो. रॉयटर्स

मृतक किसान का नाम राजू सिंह रघुवंशी है, जो तहसील के नोघई गांव में रहते थे. जानकारी के अनुसार, उन्हें उम्मीद थी कि फसल बीमा की राशि मिल जाने के बाद वे अपना कर्ज़ आसानी से चुका देंगे, हालांकि ऐसा हो न सका.

हुआ यूं कि एक महीने तक सेंट्रल बैंक का चक्कर लगाने और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने के बावजूद उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ.

इसके बाद परेशान होकर उन्होंने पांच पेज का सुसाइड नोट लिखा और बीते 31 जनवरी को अपने ही खेत में ख़ुदकुशी कर ली. पुलिस ने उनका सुसाइड नोट बरामद किया है.

राज्य के नईदुनिया अख़बार ने इस सुसाइड नोट को पुलिस सूत्रों से हासिल किया है. हालांकि अख़बार का कहना है कि पुलिस इस नोट की सत्यता की जांच कर रही है. अख़बार ने उनके सुसाइड नोट को प्रकाशित भी किया है, जो इस प्रकार से है…

Farmers Suicide

मृतक किसान राजू सिंह रघुवंशी. (साभार: नईदुनिया)

मेरी मां के नाम करीब 15 बीघा जमीन है. वर्ष 2015-16 में कर्ज लेकर सोयाबीन की फसल बोई थी. शुरुआती दौर में बोवनी करने के बाद फसल बर्बाद हो गई. फिर अधिक बारिश की वजह से फसल चौपट हो गई.

इस कारण सेंट्रल बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड के रूप में लिया गया दो लाख रुपये का कर्ज सिर पर चढ़ गया. इसके बाद परिवार का खर्च चलाने के लिए चार माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से 95 हजार रुपये का कर्ज लेना पड़ा.

मुझे उम्मीद थी कि बीमा राशि मिलने पर कर्ज से निजात मिलेगी. इसके लिए गंजबासौदा के सेंट्रल बैंक के चक्कर लगाए लेकिन यहां से भी सिर्फ आश्वासन मिले. 15 दिसंबर को सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की, लेकिन महीने भर बाद भी कोई जवाब नहीं आया. सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 10 दिसंबर को खुद घोषणा की थी हर किसान के खाते में बीमा की राशि आ जाएगी. लेकिन उनकी घोषणा झूठी निकली.

अब मैं कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर रहा हूं. इसके लिए मैं स्वयं ज़िम्मेदार हूं. मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को परेशान न किया जाए. मेरी मौत के लिए मेरे अलावा शासन भी ज़िम्मेदार है.

मेरे सुसाइड नोट को दबाया न जाए बल्कि उसे प्रिंट और सोशल मीडिया में उजागर किया जाए ताकि सरकार का झूठ उजागर हो सके. राज्य सरकार हर किसान के खाते में फसल बीमा पहुंचाने की घोषणा कर रही है. केंद्र सरकार किसान की आय को दो गुना करने की बात कह रही है लेकिन ऐसे में किसान की आय कैसे दोगुनी होगी. क्या मेरी तरह 50 किसान आत्महत्या करेंगे, तब सरकार घोषणाएं पूरी करेगी.

360 में सिर्फ चार किसानों को मिली बीमे की राशि
नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल बैंक की गंजबासौदा शाखा में वर्ष 2015-16 के लिए 360 किसानों का फसल बीमा मंजूर हुआ था, लेकिन इनमें से सिर्फ चार किसानों की ही राशि मिल पाई. बैंक मैनेजर केवल सिंह के मुताबिक 356 किसानों की लगभग 73 लाख रुपये की राशि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी से प्राप्त नहीं हो पाई है.

फसल बीमा मौत की वजह नहीं
हालांकि विदिशा कलेक्टर अनिल सुचारी ने बीमे की रकम न मिलने को किसान की मौत होने से इंकार किया है. उनके अनुसार, राजू के ऊपर माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का भी कर्ज़ था, जिससे वह परेशान था.