भारत

मध्य प्रदेश में एक पखवाड़े में 26 किसानों ने की आत्महत्या

पिछले 48 घंटे में देश भर से 14 किसानों के आत्महत्या करने की ख़बरें आ चुकी हैं. जिस तरह से किसान आत्महत्याएं हो रही हैं, यह किसी आपात स्थिति से कम नहीं है.

Barabanki (UP): Bharatiya Kisan Union workers protest against killing of farmers in #Mandsaur at NH-28, perform 'shavaasana'.

मंदसौर में किसानों पर गोलीबारी के विरोध में बाराबंकी में राष्ट्रीय राजमार्ग-28 पर भारतीय किसान यूनियन के किसानों ने योग दिवस पर ‘शवासन’ किया. (फोटो: एएनआई)

मध्य प्रदेश किसानों की कब्रगाह बन गया है. पिछले 24 घंटे में छह किसानों ने आत्महत्या कर ली. एक पखवाड़े में राज्य में 26 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

पिछले 48 घंटे में देश भर से 14 किसानों के आत्महत्या करने की ख़बरें आ चुकी हैं. जिस तरह से किसान आत्महत्याएं हो रही हैं, यह किसी आपात स्थिति से कम नहीं है.

महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में 21 जून को चार किसानों ने आत्महत्या कर ली. इसी दिन राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और पंजाब में भी किसानों के आत्महत्या करने की ख़बरें आई हैं.

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसानों ने एक से दस जून तक आंदोलन किया था. मंदसौर में आंदोलन कर रहे किसानों पर छह जून को पुलिस ने गोली चलाई थी जिसमें छह किसान मारे गए थे.

भोपाल से फ्री प्रेस जर्नल ने आज 23 जून को रिपोर्ट दी है कि पिछले 24 घंटे में मध्य प्रदेश में क़र्ज़ से परेशान छह किसानों ने आत्महत्या कर ली. मंदसौर गोलीबारी के बाद आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 26 हो गई है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गृह ज़िले सीहोर में सबसे ज़्यादा आत्महत्याएं हुई हैं. पिछले 24 घंटे शिवराज सिंह के विधानसभा क्षेत्र बुधनी में एक और सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, छिंदवाड़ा और मंदसौर ज़िलों में 22 जून को पांच किसानों ने आत्महत्या की है.

सीहोर ज़िले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के गुराडिया गांव में शत्रुघ्न मीणा ने ज़हर पीकर आत्महत्या कर ली. मीणा ने 21 जून को ज़हर पिया था. परिजनों का कहना है कि उन पर 10 लाख का क़र्ज़ था, जिसे वे लौटाने की हालत में नहीं थे.

शिवराज सिंह चौहान के गृह ज़िले सीहोर में इस महीने होने वाली यह छठवीं आत्महत्या है.

सागर ज़िले के बसारी गांव के किसान गुलाई कुर्मी ने 22 जून को अपने खेत में जाकर फांसी लगा ली. उन्होंने 7.5 लाख का क़र्ज़ ले रखा था. क़र्ज़ चुका पाने का कोई रास्ता न देख उन्होंने फांसी लगा ली.

गुलाई के परिजनों ने उनके शव को लेकर सागर बीना रोड पर धरना दिया और रोड जाम कर दी. प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर परिवार को पर्याप्त कार्यवाही का भरोसा दिलाया है.

छतरपुर ज़िले में नारायणपुर गांव के महेश तिवारी ने 22 जनू को अपने घर पर आत्महत्या कर ली. उन पर 2.5 लाख का क़र्ज़ था.

22 जून को ही टीकमगढ़ के ककरहवा गांव के सीकन कल्ला अहिरवार ने ज़हर खाकर अपनी जान दे दी.

छिंदवाड़ा ज़िले में परासिया गांव के श्याम कुमार ने आत्महत्या कर ली. मंदसौर ज़िले में एक किसान ने कुएं में कूद कर जान दे दी.

इसे भी देखें: दस और किसानों ने की आत्महत्या, वेंकैया बोले क़र्ज़ माफ़ी फैशन बन गया है

मध्य प्रदेश में 22 जून को चार किसानों ने आत्महत्या की. किसानों का एक जून से 10 जून तक का हिंसक आंदोलन बेनतीजा रहा. सरकार ने किसानों को कोई राहत नहीं दी है, बजाय इसके कि पुलिस गोलीबारी में छह किसान मारे गए.

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि किसानों की आत्महत्या का मामला दुखद और गंभीर है, लेकिन किसान विभिन्न कारणों से आत्महत्या कर रहे हैं. सभी किसान क़र्ज़ के कारण आत्महत्या नहीं कर रहे हैं.’

मध्य प्रदेश सरकार पहले भी यह साबित करने की नाकाम कोशिश करती रही है कि किसान निजी अवसाद, पारिवारिक विवाद, वैवाहिक जीवन या घरेलू समस्याओं के चलते आत्महत्या करते हैं.

सरकार ने तो आंदोलन के दौरान यहां तक कहा था कि हिंसक आंदोलन करने वाले लोग किसान नहीं हैं, वे उपद्रवी और अराजक तत्व हैं.

तेलंगाना में भी तबाही

दक्षिणी राज्यों में तेलंगाना में भी किसानों की ख़ुदकुशी जारी है. अंग्रेज़ी अखबार न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, तेलंगाना के खम्मम और भद्राद्री कोठागुडम ज़िलों में ही पिछले तीन महीने में 22 किसानों ने आत्महत्या की है.

एक कृषि अधिकारी के हवाले से अख़बार ने लिखा है, ‘कॉटन वहां की मुख्य फ़सल है. कॉटन का दाम 14 हज़ार प्रति क्विंटल से गिरकर 4 हज़ार प्रति क्विंटल या इससे भी कम पर आ गया. पहले से ही क़र्ज़ में डूबे किसानों को इस हालत ने ख़ुदकुशी करने पर मजबूर कर दिया.’

गौरतलब है कि यह छिटपुट फुटकर आंकड़े हैं. समूचे देश में कितने किसान रोज़ मरते हैं, इसका हम सिर्फ़ अंदाज़ा लगा सकते हैं.