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कोरोना वायरस के लिए जिम्मेदार पाए जाने पर चीन को नतीजे भुगतने पड़ेंगे: डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि चीन पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडेन का समर्थन कर रहा था जो राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि अगर जो बाइडेन जीत जाते हैं तो अमेरिका पर चीन जीत जाएगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग. (फोटो: रॉयटर्स)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग. (फोटो: रॉयटर्स)

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को आगाह किया कि अगर यह पाया गया कि वह कोरोना वायरस वैश्विक महामारी को फैलाने का ‘जिम्मेदार’ है और उसे इसके बारे में जानकारी थी तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे.

इससे पहले चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए ट्रंप डब्ल्यूएचओ की आलोचना कर चुके हैं और उसे दी जाने वाली सालाना करीब 50 करोड़ डॉलर की अमेरिकी राशि पर रोक लगा चुके हैं.

चीन द्वारा कोरोना वायरस बीमारी से निपटने को लेकर असंतोष जताते हुए ट्रंप ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर बीजिंग द्वारा अमेरिका के साथ गैर पारदर्शी व्यवहार किया गया और शुरुआत में उसके साथ सहयोग नहीं किया गया.

उन्होंने शनिवार को व्हाइट हाउस संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से कहा, ‘अगर वे जानबूझकर इसे फैलाने के जिम्मेदार पाए गए तो इसके परिणाम भुगतने होंगे. आप इसके बारे में बात कर हैं, आप जानते हैं, संभवत: 1917 के बाद किसी ने इतने बड़े पैमाने पर लोगों को मरते हुए नहीं देखा.’

ट्रंप ने कहा कि कोविड-19 के दुनियाभर में फैलने से पहले तक चीन के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे थे. उन्होंने कहा, ‘संबंध अच्छे थे लेकिन फिर अचानक इसके बारे में सुना. इससे काफी फर्क आ गया है. यह सवाल पूछा गया था कि क्या आप चीन से नाराज हैं. खैर जवाब हां में है.’

राष्ट्रपति ने कहा कि एक गलती जो काबू से बाहर हो गई या जानबूझकर कुछ किए जाने में काफी अंतर होता है.

ट्रंप ने कहा, ‘किसी भी स्थिति में उन्हें हमें बताना चाहिए था. मुझे लगता है कि वे जानते थे कि कुछ खराब है और मुझे लगता है कि वे शर्मिंदा हैं.’

उन्होंने दावा किया कि चीन पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडेन का समर्थन कर रहा था जो राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं. ट्रंप ने कहा, ‘अगर जो बाइडेन जीत जाते हैं तो अमेरिका पर चीन जीत जाएगा.’

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संकट ने हर किसी को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने कहा, ‘हमारी अभी तक दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी. चीन आसपास तक भी नहीं था.’

ट्रंप ने कहा कि ईरान अब पहले के मुकाबले काफी अलग देश है. उन्होंने कहा, ‘पहले ईरान पूरे पश्चिम एशिया पर अपना अधिकार जमाने जा रहा था और अब वे सिर्फ जीना चाहते हैं.’

ट्रंप ने इस संक्रामक रोग के कारण चीन में मरने वाले लोगों की आधिकारिक संख्या को लेकर भी संदेह जताते हुए दावा किया कि वहां मरने वाले लोगों की संख्या अमेरिका से कहीं अधिक है.

उन्होंने कहा, ‘हम पहले स्थान पर नहीं है. चीन पहले स्थान पर है. मृतकों की संख्या के लिहाज से वे हमसे कहीं आगे हैं. हम उनके आसपास भी नहीं हैं.’

ट्रंप ने कहा कि जब उच्च विकसित स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों वाले देशों ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, इटली और स्पेन में मृतकों की संख्या इतनी अधिक थी तो चीन में यह महज 0.33 प्रतिशत थी. राष्ट्रपति ने कहा कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हैं. उन्होंने चीन के मृतकों के आंकड़े को ‘सच्चाई से कोसों दूर’ बताया.

वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन पर कोरोना वायरस के तथ्यों को छुपाने का आरोप लगाया. उन्होंने शनिवार को कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उन्हें बताना होगा कि कैसे कोविड-19 इतनी तेजी से दुनिया में फैल गया.

फॉक्स न्यूज से बात करते हुए पोम्पियो ने कहा, ‘हम सचमुच चाहते हैं कि चीनी सरकार खुलकर बात करे. उनका कहना है कि वह सहयोग करना चाहते हैं. सहयोग करने के लिए उन्हें सबसे अच्छे तरीकों में से एक यह मिल सकता है कि वह दुनिया को अपने यहां आने की इजाजत दें ताकि दुनिया के वैज्ञानिकों को वास्तव में पता चल सके कि यह कैसे हुआ और असल में यह वायरस कैसे फैलने लगा?’

उन्होंने कहा, ‘इतनी बड़ी संख्या में लोगों में यह वायरस फैलने से पहले वहां के नेतृत्व को इसके बारे में पता था. यह खतरनाक है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सामने आने से पहले बहुत सारे मामले, बहुत सारी गतिविधियां, बहुत सारे चीनी नागरिकों ने विदेश यात्रा कर ली थी. ये ऐसी चीजें हैं तो स्वतंत्र गणतंत्र देश नहीं करते हैं. यही कारण है कि यह पारदर्शिता के अभाव के साथ जुड़ा हुआ है.’

इससे पहले पोम्पिओ ने अपने बयान में कहा था कि अमेरिका इस बात की जांच करेगा कि क्या कोरोना वायरस वुहान विषाणु विज्ञान संस्थान से उत्पन्न हुआ.

हालांकि, बीते शुक्रवार को चीन ने कोविड-19 महामारी से जुड़े तथ्यों को छिपाने की बात से इनकार किया और आरोप लगाया कि अमेरिका यह कहकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है कि कोरोना वायरस वुहान स्थित एक विषाणु विज्ञान प्रयोगशाला से उत्पन्न हुआ.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘मैं जोर देकर कहना चाहता हूं कि संक्रामक रोग के विवरण की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत एक परंपरा है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बार-बार कहा है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि विषाणु को प्रयोगशाला में बनाया गया. कई जाने-माने चिकित्सा विशेषज्ञ भी विषाणु के प्रयोगशाला से लीक होने की बात को खारिज कर चुके हैं.’

वहीं, कोविड-19 मामलों के आंकड़े छिपाने को लेकर हो रही अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच चीन ने मृतकों की संख्या में शुक्रवार को संशोधन किया.

इस संशोधन के बाद चीन के वुहान शहर में मृतकों की संख्या में 1,290 का इजाफा हुआ, जिससे चीन में कोरोना वायरस से मरने वालों की कुल संख्या 4,632 हो गई. कुल मामलों की संख्या भी बढ़कर 82,692 हो गई.

चीन द्वारा आंकड़ों में संशोधन के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण को नियंत्रित करने के बाद कई देश चीन की तरह अपने यहां मृतकों की संख्या का संशोधन कर सकते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)