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कोरोना वायरस: महाराष्ट्र में घर-घर जाकर अखबार और पत्रिकाएं पहुंचाने से बचने को कहा गया

अखबारों और पत्रिकाओं को घर-घर पहुंचाने से बचने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले की निंदा करते हुए मुंबई प्रेस क्लब ने अपील की कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे, आदेश वापस ले और अखबारों को घर-घर तक पहुंचाने दे.

Mumbai: A local reads newspaper fronted with headlines on Maharashtra government formation, in Mumbai, Sunday, Nov. 24, 2019. (PTI Photo/Mitesh Bhuvad)(PTI11_24_2019_000036B)

(फोटो: पीटीआई)

मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने शनिवार को कहा कि स्टॉलों और दुकानों पर अखबारों, पत्रिकाओं की बिक्री की अनुमति है लेकिन प्रिंट मीडिया क्षेत्र को घर-घर जाकर समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं पहुंचाने से बचने को कहा गया है.

सीएमओ ने सिलसिलेवार ट्वीट में शनिवार को यह कहा.

राज्य सरकार ने कहा कि वह मीडिया का पूरे हृदय से समर्थन करती है और कोरोना वायरस महामारी का मुकाबला करने में उसका सहयोग चाहती है.

मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया है, ‘हम मीडिया से घर-घर जाकर अखबार एवं पत्रिकाएं पहुंचाने से बचने का अनुरोध करते हैं. हम मीडिया का पूरे हृदय से स्वागत करते हैं और सुझावों एवं आपत्तियों की ओर उसकी ओर ताकते हैं. लेकिन ऐसी महामारी के समय में, जहां हमें वाकई लोगों की आवाजाही में कमी लाने और सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है, ज्यादातर आर्थिक कामकाज मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं.’

बयान में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मीडिया समय की कसौटी पर खरा उतरा है. सच्चाई का गला नहीं घोंटा जा सकता है. हम उसके लिए आपके सहयोग का अनुरोध करते हैं.’

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सहयोगी हर्षल प्रधान द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि ठाकरे ने अखबारों के मालिकों और संपादकों से बातचीत की है और वे सहयोग के लिए जारी हुए हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, मुंबई प्रेस क्लब ने इस नोटिफिकेशन की निंदा की है और उसे वापस लेने की मांग की है. क्लब ने कहा कि यह लॉकडाउन से प्रिंट मीडिया को छूट देने के उद्देश्य को खत्म करता है. इसके साथ ही यह आदेश अखबार उद्योग और पत्रकार समुदाय को नुकसान पहुंचाएगा जो ताजा जानकारियां सामने लाने के लिए लगातार काम करते रहते हैं.

मुंबई प्रेस क्लब ने राज्य सरकार से अपील की कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे, आदेश वापस ले और अखबारों को घर-घर तक पहुंचाने दे.

उसने कहा, ‘दुनिया भर के शीर्ष वैज्ञानिकों ने कहा है कि समाचार पत्रों या पैकेजों के माध्यम से कोई भी कोरोनो वायरस से संक्रमित नहीं हुआ है और शोध से पता चलता है कि वायरस छिद्रपूर्ण सतहों पर जीवित नहीं है. अखबारी कागज का विशेष खुरदरापन समाचार पत्रों को सुरक्षित बनाती है.’

वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि कोई पैकेज प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं है.

विपक्षी भाजपा ने भी इसकी निंदा करते हुए आदेश का वापस लेने की मांग की है. पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि अखबार नहीं पहुंचाने का फैसला उन्हें प्रकाशित करने के उद्देश्य को विफल कर देगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)