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राज्य और केंद्रशासित प्रदेश लॉकडाउन के नियमों का सख़्ती से पालन करें, कोई ढील न दें: केंद्र

गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य अपनी स्थानीय स्थितियों के अनुसार और कड़े क़दम उठा सकते हैं, लेकिन लॉकडाउन के नियमों को कमज़ोर या हल्का नहीं कर सकते.

लॉकडाउन के दौरान जरूरी चीजें खरीदते लोग (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन के दौरान जरूरी चीजें खरीदते लोग (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे कोरोना वायरस से निपटने के लिए लागू किए लॉकडाउन के निमयों का सख्ती से पालन करें और उनमें किसी भी स्तर पर ढील न दें.

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से कहा कि कुछ राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश उन गतिविधियों की अनुमति दे रहे हैं, जिनकी आपदा प्रबंधन कानून, 2005 के तहत गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इजाजत नहीं दी गई है.

उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे पुन: अपील करूंगा कि संशोधित समेकित दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए. सभी संबंधित प्राधिकारी इनमें ढील दिए बिना शब्दश: इनका सख्ती से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें और बंद के नियमों के सख्ती से अनुपालन को सुनिश्चित किया जाए.’

गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्यों को नए सिरे से पत्र लिखा है क्योंकि कुछ राज्य अपने दिशानिर्देश जारी कर रहे हैं जो लॉकडाउन को कमजोर करने के समान हैं और इससे नागरिकों की सेहत को लेकर गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, ‘राज्य अपनी स्थानीय स्थितियों के अनुसार और कड़े कदम उठा सकते हैं लेकिन उन्हें कमजोर या हल्का नहीं कर सकते.’

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी मुख्य सचिवों को एक पत्र लिखा है और केरल के मुख्य सचिव को एक अलग पत्र भेजा है, जिसमें किसी भी तरह से लॉकडाउन दिशानिर्देशों को कम नहीं करने के लिए कहा गया है.

गृह मंत्रालय की ओर से यह सख्त निर्देश केरल में लॉकडाउन गाइडलाइन में अतिरिक्त छूट देने के बाद आया है. केरल में लॉकडाउन के बावजूद सरकार द्वारा आज से अतिरिक्त छूट देने पर गृह मंत्रालय ने आपत्ति जताई है.

इस पत्र में लिखा गया कि केंद्र की गाइडलाइन में अधिक छूट देने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है, केंद्रीय गाइडलाइन का कड़ाई से पालन होना चाहिए.

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केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों और राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों के लिए समेकित संशोधित दिशानिर्देश 15 अप्रैल को जारी किए गए थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन की अवधि तीन मई तक बढ़ाने की घोषणा की थी, जिसके बाद ये दिशानिर्देश जारी किए गए. इससे पहले बंद लागू रहने की अवधि 25 मार्च से 14 अप्रैल थी.

प्रधानमंत्री की ओर से कहा गया था कि स्थिति की समीक्षा के बाद कुछ क्षेत्रों में 20 अप्रैल से छूट दी जाएगी.

गृह मंत्रालय ने कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए देश के सभी हिस्सों में दिशा-निर्देशों का सख्ती से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है.

गृह सचिव ने उन दिशानिर्देशों पर मुख्य सचिवों का ध्यान आकर्षित किया जिनमें कहा गया है कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश किसी भी तरीके से इनमें ढील नहीं देंगे और इन्हें सख्ती से लागू करेंगे.

हालांकि वे स्थानीय क्षेत्रों की आवश्यकतानुसार दिशानिर्देशों से भी कड़े नियम लागू कर सकते हैं.

भल्ला ने उच्चतम न्यायालय की हालिया टिप्पणी का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि सभी राज्य सरकारें, सरकारी प्राधिकारी एवं नागरिक जन स्वास्थ्य के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों का शब्दश: पालन करें.

बीते रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली सरकार ने तय किया है कि वह जारी लॉकडाउन में राहत नहीं देगी, क्योंकि फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस संक्रमण का फैलना थमा नहीं है.

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा था, ‘कोरोना वायरस के लिए जिन 736 लोगों की जांच की गई उनमें से 186 या 25 फीसदी के नतीजे पॉजिटीव आए हैं. शनिवार को जिन 186 लोगों के नतीजे पॉजिटीव आए हैं उनमें इसके कोई लक्षण नहीं थे. उन्हें खांसी, बुखार या सांस लेने में समस्या जैसे कोई लक्षण नहीं थे.’

इस बीच तेलंगाना ने लॉकडाउन की अवधि तीन मई से बढ़ाकर सात मई कर दी है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)