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विजय माल्या की भारत प्रत्यर्पण के ख़िलाफ़ याचिका ब्रिटेन की अदालत ने ख़ारिज की

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने भारत प्रत्यर्पित करने के आदेश के ख़िलाफ़ ब्रिटेन की एक अदालत में याचिका दायर की थी. माल्या क़रीब 9,000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत में वांछित हैं.

विजय माल्या (फोटोः पीटीआई)

विजय माल्या (फोटोः पीटीआई)

लंदनः ब्रिटेन हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका खारिज कर दी है.

द यूनाइटेड किंगडम हाईकोर्ट के न्यायाधीश स्टीफन इरविन और न्यायाधीश एलिजाबेथ लांग की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में माल्या की अपील पर यह फैसला दिया है.

कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर लॉकडाउन के बीच मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई. हाईकोर्ट ने कहा, ‘हमने प्रथम दृष्टि में गलत बयानी और साजिश का मामला पाया और इस प्रकार प्रथम दृष्ट्या मनी लांड्रिंग का भी मामला बनता है.’

माल्या के खिलाफ उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर दोनों न्यायाधीशों ने कहा कि उन्होंने पाया कि कर्ज साजिश के जरिये हासिल किया गया. यह कर्ज तब लिया गया जब किंगफिशर एयरलाइन की वित्तीय स्थिति कमजोर थी, उसके नेटवर्थ नीचे आ गया था और ‘क्रेडिट रेटिंग’ निम्न थी.

पीठ ने कहा, ‘अपीलकर्ता (माल्या) ने गलत बयानी कर यह कर्ज हासिल किया… उन्होंने निवेश, ब्रांड मूल्य, वृद्धि को लेकर गुमराह करने वाले अनुमान तथा परस्पर विरोधी व्यापार योजनाओं की जानकारी दी. अपीलकर्ता का कर्ज नहीं लौटाने का बेईमान इरादा का पता उसके बाद के आचरण से चलता है जिसमें उसने व्यक्तिगत और कॉरपोरेट गारंटी से बचने का प्रयास किया.’

यह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों के लिये शराब कारोबारी के मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है. माल्या प्रत्यर्पण मामले में अप्रैल 2017 में गिरफ्तार होने के बाद से जमानत पर है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, माल्या स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा अप्रैल 2017 में जारी किए गए प्रत्यर्पण वारंट पर जमानत पर बने हुए हैं. उन्हें 650,000 पाउंड की जमानत राशि जमा की थी और उन पर यात्रा संबंधी कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए हैं.

हाईकोर्ट में अपील खारिज होने से माल्या का भारत प्रत्यर्पण का रास्ता बहुत हद तक साफ हो गया है. उनके खिलाफ भारतीय अदालत में मामले हैं. उसके पास अब ब्रिटेन के उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए मंजूरी का आवेदन करने के लिए 14 दिन का समय है.

इस बीच, भारतीय जांच एजेंसियों का ब्रिटेन की अदालत में पक्ष रखने वाले ‘क्राउन प्रोसक्यूशन सर्विस’ के प्रवक्ता ने कहा, ‘माल्या के पास अब उच्चतम न्यायालय में अपील की मंजूरी को लेकर आवेदन देने हेतु 14 दिन का समय है. अगर वह अपील नहीं करते हैं, उसके बाद 28 दिन के भीतर उनका प्रत्यर्पण होगा। अगर वह अपील करते हैं, हम आवेदन के नतीजे का इंतजार करेंगे.’

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के प्रवक्ता आरके गौड़ ने कहा, ‘उन आर्थिक भगोड़ों के खिलाफ जारी लड़ाई में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो देश की न्यायिक प्रक्रिया से दूर रहने का प्रयास कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि यह सीबीआई की श्रमसाध्य और अति सावधानी से की गई जांच को भी प्रमाणित करती है.

भारत और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि पर 1992 में हस्ताक्षर हुए थे. यह संधि नवंबर 1993 से प्रभाव में है. अब तक केवल एक सफल प्रत्यर्पण ब्रिटेन से भारत हुआ है. समीरभाई बीनुभाई पटेल को 2016 में भारत भेजा गया ताकि वह 2002 में गोधरा हिंसा के बाद दंगे में शमिल होने को लेकर सुनवाई का सामना कर सके.

माल्या (64) ने इस साल फरवरी में सुनवाई के दौरान प्रत्यर्पित किए जाने के आदेश के खिलाफ ब्रिटेन हाईकोर्ट में अपील दायर की थी.

माल्या करीब 9,000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वांछित हैं.

इससे पहले बीते 10 अप्रैल को विजय माल्या को राहत देते हुए लंदन हाईकोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले भारतीय बैंकों के समूह की उस याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी थी, जिसमें कर्ज के बोझ से दबे कारोबारी को दिवालिया घोषित करने की मांग की गई थी ताकि उससे तकरीबन 1.145 अरब पाउंड (10,837 करोड़ रुपये) का कर्ज वसूला जा सकें.

हाईकोर्ट की दिवालिया शाखा के न्यायाधीश माइक ब्रिग्स ने माल्या को राहत देते हुए कहा था कि जब तक भारत के सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिकाओं और कर्नाटक हाईकोर्ट के समक्ष समझौते के उनके प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता तब तक उन्हें वक्त दिया जाना चाहिए.

माल्या मार्च 2016 को भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे. उन पर आरोप हैं कि उन्होंने अपनी किंगफिशर एयरलाइन कंपनी के लिए बैंकों से कर्ज लिया था और उसे बिना चुकाए फरार हो गए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)