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दिल्ली: प्रवासियों के लिए बनाए आश्रय गृहों का हाल बदहाल, न स्वच्छता, न साफ पानी-भोजन की व्यवस्था

दिल्ली पुलिस के 10 एसएचओ द्वारा मध्य दिल्ली में प्रवासियों के लिए बनाए गए आश्रय गृहों का दौरा कर तैयार की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते लोग यहां रहना नहीं चाहते हैं.

Delhi Shelter Home Migrants PTI

दिल्ली सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों के लिए एक स्कूल में बनाया गया आश्रय गृह. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन के बीच दिल्ली के कई आश्रय गृहों की हालत बहुत ही खराब है. प्रवासियों के लिए बनाए गए आश्रय गृहों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे में सेंट्रल दिल्ली में प्रवासियों के लिए बनाए गए आश्रय गृहों को लेकर दिल्ली पुलिस के दस एसएचओ से रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया था, जिनमें इन आश्रय गृह की बदहाल व्यवस्था उजागर हुई है.

इस रिपोर्ट में कहा गया, ‘इन शेल्टर होम्स में पंखे काम नहीं कर रहे हैं. बिजली जाने के बाद बैकअप की कोई व्यवस्था नहीं है. शौचालयों की सफाई बमुश्किल की जाती है. कई प्रवासी मजूदर यहां से जाना जाते हैं क्योंकि उनके परिवार के सदस्य यहां रहना नहीं चाहते.’

रिपोर्ट में आगे लिखा है, ‘सिविल डिफेंस के स्टाफ का व्यवहार बहुत अभद्र है, भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है. हैंडवॉश और सैनिटाइजर की कोई व्यवस्था नहीं है. शौचालयों से दुर्गंध आती है, शौचालयों में पानी की सप्लाई सुबह सात से 11 तक ही होती है, नहाने के लिए सिर्फ एक ही साबुन है और कपड़े धोने के लिए डिटर्जेंट नहीं है और मच्छरों का आतंक है.’

सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने भी इस रिपोर्ट को लेकर सहमति जताई है, जिन्होंने मजनू का टीला और सिविल लाइन्स में दो आश्रय गृहों का सर्वे किया था.

दिल्ली पुलिस ने 15 से अधिक आश्रय गृहों का आकलन किया है. यह रिपोर्ट डीसीपी (उत्तर) मोनिका भारद्वाज ने 22 अप्रैल को दिल्ली पुलिस की उपायुक्त (सेंट्रल) निधि श्रीवास्तव को भेजी थी.

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट प्रशासन ने अधिकारियों को 24 घंटों के भीतर इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने का आदेश दिया था.

डीसीपी भारद्वाज का कहना है कि आश्रय गृहों में कुछ समस्याओं के उजागर होने के बाद हर जिले के एसएचओ को उनके अधिकार क्षेत्र से रिपोर्ट दर्ज करने को कहा गया था.

इसके बाद भारद्वाज ने इन सभी विश्लेषणों को इकट्ठा कर इसे डीएम को भेजा ताकि सरकार इस पर आवश्यक कार्रवाई कर सके.

सेंट्रल दिल्ली की जिला मजिस्ट्रेट निधि श्रीवास्तव ने कहा कि रिपोर्ट की कमियों को दुरुस्त करने के लिए इसकी कॉपी सभी उपविभागीय मजिस्ट्रेटों को भेजी गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘लाहौरी गेट पुलिस स्टेशन के स्टाफ ने इलाके के तीन शेल्टर होम का सर्वे किया, जिसमें पता चला कि पीने के पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है और स्वच्छ पानी के लिए आरओ की भी कोई सुविधा नहीं है.’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘न ही खाने का कोई उचित प्रबंध है. यह भी पता चला है कि यहां दिन में दो बार भोजन दिया जाता है लेकिन इसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है इसलिए बेहतर भोजन के लिए लोग यहां-वहां भटक रहे हैं. बेघर लोगों के लिए लगाए गए बिस्तरों में न ही किसी तरह की दूरी है और न ही यहां सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया गया है. सफाई और हैंडवॉश का भी कोई इंतजाम नहीं है.’

पुलिस रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि लॉकडाउन के ऐलान के बाद इन शेल्टर होम से कई बेघर लोग चले गए.

रिपोर्ट में कहा गया, ‘लॉकडाउन के बाद इन्हें जबरन यहां से भेज दिया गया, जिससे आसपास के इलाकों में स्थिति थोड़ी बिगड़ गई.’

मालूम हो कि दिल्ली में 223 स्थायी आश्रय गृह हैं. इसके अलावा 111 आश्रय गृह ऐसे हैं, जो लॉकडाउन के दौरान शहर में फंसे प्रवासियों के लिए स्कूली इमारतों में बनाए गए हैं.

इन अतिरिक्त जगहों पर 10,000 से ज्यादा लोग रह सकते हैं, वहीं स्थायी आश्रय गृहों में करीब सात हजार लोग प्रतिदिन की क्षमता है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास बने शेल्टर होने नंबर 11 में 350 के करीब बेघर रहा करते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद यह संख्या 156 पर आ गई है.

आधिकारिक डेटा के अनुसार 26 अप्रैल को यहां 172 लोग थे.

पुलिस रिपोर्ट और दिल्ली अर्बन शेल्टर हाउसिंग बोर्ड के डेटा के अनुसार लाहौरी गेट के पास बने शेल्टर होम नंबर 7 में औसतन 250 लोग रहते थे, यह संख्या अब गिरकर सौ पहुंच गई है.

कोतवाली और कश्मीरी गेट थाने द्वारा दी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि उनके अधिकारक्षेत्र में आने वाले किसी भी आश्रय गृह में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं पाई गई.

सदर बाजार थाने द्वारा दी गयी रिपोर्ट में बताया गया है कि मोतिया खान में बने आश्रय गृह में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं हो रहा है क्योंकि यहां क्षमता से अधिक 412 लोग रह रहे हैं. साथ ही यहां सफाई और सेनिटाइजेशन की ज़रूरत है.

तीमारपुर के तीन आश्रय गृहों के बारे में रिपोर्ट कहती है कि यहां प्राथमिक चिकित्सा की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, पानी पीने लायक नहीं है. साथ ही यहां रह रहे मजदूरों की मांग है कि उन्हें खिचड़ी के बजाय पूड़ी-सब्जी दी जाये.

रिपोर्ट में यह सलाह भी दी गई है कि इन जगहों के बाहर एम्बुलेंस और पीसीआर वैन भी होनी चाहिए.

सराय रोहिल्ला थाने ने बताया कि वहां के आश्रय गृहों के प्रवासी वापस लौटना चाहते हैं, वहीं गुलाबी बाग थाने ने वहां के शेल्टर होम में खाना समय पर न मिलने, वहां रहने वालों के एक ही मास्क बार-बार इस्तेमाल करने और वॉलंटियर्स की कमी के बारे में बताया है.