भारत

कर्नाटक: लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार सीआरपीएफ जवान को मिली जमानत

कर्नाटक पुलिस ने कोबरा कमांडो को लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया था. प्रदेश के गृहमंत्री बसवराज बोम्माई ने पुलिस प्रमुख को घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं.

जमानत पर रिहा होने के बाद सीआरपीएफ कोबरा कमांडो सचिन सावंत अपने साथियों के साथ. (फोटो: ट्विटर)

जमानत पर रिहा होने के बाद सीआरपीएफ कोबरा कमांडो सचिन सावंत (बिना वर्दी के) अपने साथियों के साथ. (फोटो: ट्विटर)

बेंगलुरु: कर्नाटक की एक स्थानीय अदालत ने मंगलवार को लॉकडाउन तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार सीआरपीएफ के कमांडो को जमानत दे दी. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान को लॉकडाउन के नियम तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, चिकोडी तालुका के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सीआरपीएफ कमांडो सचिन सांवत को मंगलवार को जमानत दे दी गई. उसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.

सचिन सावंत सीआरपीएफ के विशेष दस्ते, 207वीं कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन (कोबरा) के जवान थे, जिसे माओवादियों के खिलाफ छापामार रणनीति और जंगल युद्ध के लिए गठित किया गया है. फिलहाल वे छुट्टी पर घर आए हुए थे.

बता दें कि, अर्द्धसैनिक बल ने उसके जवान के साथ की गई कथित बदसलूकी पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद पुलिस ने जांच के आदेश दिए हैं. प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रवीण सूद ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं.

घटना का एक वीडियो सामने आया था जिसमें कुछ पुलिस कांस्टेबलों को सीआरपीएफ के जवान सचिन सावंत को बेलगावी में कथित तौर पर लाठियों से मारते हुए देखा जा सकता है.

सोशल मीडिया पर साझा वीडियो के मुताबिक, सावंत अपनी बाइक धो रहे थे तभी पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और लॉकडाउन के दौरान मास्क न पहनने की वजह से उनकी पिटाई शुरू कर दी.

अपने कोबरा कमांडो के साथ की गई बदसलूकी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सीआरपीएफ ने कर्नाटक पुलिस को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है.

कर्नाटक के डीजीपी को लिखे पत्र में सीआरपीएफ के अतिरिक्त महानिदेशक संजय अरोड़ा ने कहा कि सावंत अपनी बाइक धो रहे थे, जब उनके और पुलिस के बीच मास्क न पहनने को लेकर झड़प हुई.

अरोड़ा ने लिखा, ‘सावंत की उनके परिवार के सदस्यों के सामने पिटाई की गई और अभद्र व्यवहार किया गया और फिर उन्हें नंगे पैर थाने ले जाया गया जहां उन्हें हथकड़ी लगाई गई और जंजीरों से बांधा गया.’

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच से पता चलता है कि पुलिस कर्मियों का आचरण नागरिक केंद्रित नहीं था.

सीआरपीएफ के एडीजीपी ने कहा कि अगर कर्नाटक पुलिस जवान की गिरफ्तारी से पहले सीआरपीएफ के अधिकारियों को विश्वास में लेती तो इस अप्रिय स्थिति को टाला जा सकता था.

इसके जवाब में सूद ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने ट्वीट किया कि बेलगावी के पुलिस महानिरीक्षक को जांच करने के आदेश दिए गए हैं.  रिपोर्ट मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री बसवराज बोम्माई ने प्रदेश पुलिस के प्रमुख को घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं.

गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कर्नाटक के सिंचाई मंत्री रमेश जार्कीहोली ने सीआरपीएफ के जवान की रिहाई की मांग की थी.

बेलगावी के पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण निम्बार्गी ने सावंत की गिरफ्तारी का बचाव किया है. उनके अनुसार सदलगा थाने के कांस्टेबल 23 अप्रैल को गश्त ड्यूटी पर थे, जब उन्होंने सावंत को चिकोडी तालुक में अपने गांव की एक बेंच पर बैठे देखा.

पुलिसकर्मियों को देखकर अन्य लोग भाग गए, लेकिन सावंत वहीं बैठे रहे.

जब कांस्टेबलों ने सावंत से सवाल किया कि वह जिले में लागू सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि वह भी एक पुलिसकर्मी हैं.

निम्बार्गी ने बताया कि गश्ती दल ने उनसे नियमों का पालन करने को कहा. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पर सावंत गुस्सा हो गए और एक कांस्टेबल का गिरेबान पकड़ा और उसे घूंसा मार दिया.

एनडीटीवी के मुताबिक, पुलिस से मारपीट करने के लिए जवान पर आईपीसी की धारा 353 (हमला करने या फिर बल से कर्तव्य को रोकने का प्रयास), 504 और 505 (जान-बूझकर शांति भंग करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था.

सीआरपीएफ के प्रवक्ता एम. दिनाकरन ने बताया कि उन्होंने इस मामले को कर्नाटक पुलिस के प्रमुख के सामने उठाया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)