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लॉकडाउन: साइकिल से दिल्ली से बिहार जा रहे मजदूर की रास्ते में मौत

चार दिन पहले सात मजदूर दिल्ली से बिहार जाने के लिए साइकिल से निकले थे. उसमें से एक मजदूर की तबीयत बिगड़ने के बाद उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में मौत हो गई. बाकी छह मजदूरों को जिला प्रशासन ने क्वारंटीन कर दिया है और उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कोरोना वायरस से निपटने के लिए लागू लॉकडाउन के कारण कोई यातायात सुविधा न होने की वजह से कुछ प्रवासी मजदूर दिल्ली से बिहार स्थित अपने घर जाने के लिए निकले, जिसमें से एक मजदूर की तबीयत खराब होने के कारण रास्ते में ही मौत हो गई.

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक चार दिन पहले सात मजदूर दिल्ली से साइकिल से बिहार जाने के लिए निकले थे. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के पास एक मजदूर की तबियत खराब हो गई थी. उसे थाना चौक कोतवाली के मेडिकल कॉलेज में ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

डॉक्टरों ने कोरोना जांच के लिए मृतक का सैंपल ले लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. बाकी छह मजदूरों को जिला प्रशासन ने क्वारंटीन कर दिया है और उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं.

मृतक मजदूर के साथियों ने बताया कि वे सभी बिहार के रहने वाले हैं. दिल्ली में रहकर मजदूरी करके बिहार में परिवार को पैसा भेजते थे. लॉकडाउन के बाद दिल्ली सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिली. भूख से परेशान थे.

उन्होंने बताया कि उनके पास पैसा भी न होने के कारण सभी लोगों ने साइकिल से बिहार जाने का फैसला किया. 4 दिन तक वे रात-दिन साइकिल चलाते हुए शाहजहांपुर पहुंचे और पूरी रात एक होटल के बाहर गुजारी. रात को अचानक मृतक धर्मवीर (28) की तबीयत बिगड़ गई.

नवभारत टाइम्स के मुताबिक शाहजहांपुर कोतवाली के एसएचओ ने बताया, ‘उनकी ही टीम के एक शख्स ने डायल-112 को सूचना दी थी. हमारी टीम पहुंची तो धर्मवीर सांस लेने में दिक्कत महसूस कर रहा था और अचानक बेहोश हो गया. हम धर्मवीर को मेडिकल कॉलेज लेकर गए लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत बताया. अब धर्मवीर के बाकी साथियों को क्वारंटीन कर दिया है. हमने धर्मवीर के परिवार को सूचना दे दी है.’

बताया गया कि सैकड़ों लोग पैदल या अन्य तरीकों से जिले में पहुंच रहे हैं. इस पर एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘हम उन्हें शेल्टर होम में नहीं रख सकते क्योंकि अगर हम उनकी एंट्री करेंगे तो उन्हें 14 दिन क्वारंटीन में रखना होगा. घर जा रहे लोग क्वारंटीन में रुकना नहीं चाहते हैं. हम सिर्फ आगे जाने में उनकी मदद कर रहे हैं और उन्हें खाने की चीजें, मास्क और सैनिटाइजर दे रहे हैं. हम जगह-जगह थर्मल स्कैनर की मदद से उनकी स्क्रीनिंग भी कर रहे हैं.’

दैनिक भास्कर के मुताबिक, धर्मवीर बिहार के खगड़िया जिले के खरैता गांव का रहने वाला था. अपने जिले के रहने वाले अन्य मजदूरों के साथ ही दिल्ली में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करता था. कभी रिक्शा चलाता था तो कभी राजगीर का काम कर लेता था. उसके साथियों ने बताया कि धर्मवीर को कोई बीमारी नहीं थी.

उसके साथी मजदूर रामनिवास उर्फ छोटू ने बताया कि लॉकडाउन के बाद उनका रोजगार छिन गया और ये लोग 34 दिन जैसे-तैसे गुजार लिए. पहले उनके पास जो कुछ पैसे थे उससे राशन खरीद लिया वह राशन करीब 10 दिन चला. इसके बाद आस-पड़ोस से मांगकर पेट भरा गया.

उन्होंने बताया कि सरकार से भी कोई मदद नहीं मिली. कई दिनों तक बिस्किट खाकर पेट भरा.

उन्होंने कहा, ‘जब लगा कि यहां रहे तो बीमारी से मरे या न मरे लेकिन भूख से जरूर मर जाएंगे. इसलिए सोचा यहां मरने अच्छा है कि अपनों के बीच चला जाए. मजबूरी में 27 अप्रैल को धर्मवीर के साथ हम छह लोग साइकिल से अपने घर के लिए निकल पड़े.’

वह आगे कहते हैं, ‘भूखे-प्यासे चार दिन साइकिल चलाकर गुरुवार की रात शाहजहांपुर पहुंचे. यहां बरेली मोड़ स्थित एक होटल के बाहर ठहर गए. रास्ते में किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली. शाहजहांपुर आने के बाद एक मंदिर से कुछ खाना मिल गया.’

शुक्रवार सुबह उनके साथी मजदूर धर्मवीर की हालत बिगड़ गई. उसे मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां उसने दम तोड़ दिया.

100 किलोमीटर से अधिक पैदल चलकर बेंगलुरु से आंध्र प्रदेश पहुंचे मजदूर की मौत

चित्तूर: कर्नाटक के बेंगलुरु से 100 किलोमीटर से अधिक पैदल चलकर आंध्र प्रदेश स्थित अपने गांव पहुंचे एक प्रवासी मजदूर की एक दिन बाद तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई. मौत के बाद कोरोना वायरस होने के डर से गांव वालों ने मजदूर के अंतिम संस्कार में भी दिक्कत पैदा की. हालांकि, जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद गांव के बाहर उसका अंतिम संस्कार किया गया.

द न्यूज़ मिनट में छपी ख़बर के मुताबिक, मृतक हरि प्रसाद (26) बेंगलूरु में काम कर रहे थे और अपने गांव पहुंचने के लिए उन्हें 100 किलोमीटर से ज़्यादा दूर पैदल चलकर जाना पड़ा.

ख़बर के अनुसार, चित्तूर जिले के मिट्टपल्लि गांव के निवासी हरि प्रसाद बेंगलूरु में छोटे-मोटे काम करते हुए जीवन यापन कर रहे थे. लेकिन लॉकडाउन लागू होने के बाद से न तो उन्हें कोई काम मिल रहा था और न ही उसके पास पैसा था. सो उन्होंने पैदल ही अपना गांव जाने के मन बना लिया.

लेकिन गांव पहुंचने के एक दिन बाद ही वह बीमार पड़ गए और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां मंगलवार को उनकी मौत हुई. लेकिन ये मामला गुरुवार को उस समय सामने आया जब उनकी लाश को लोगों ने गांव में लाने का विरोध किया क्योंकि उन्हें डर था कि वो कोरोना से संक्रमित हो सकता है.

हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तुरंत हरकत में आए और उन्होंने मृतक के शरीर से सैंपल निकाल कर जांच की तो कोरोना निगेटिव पाया गया. उसके बाद गांव के लोगों ने मृतक का अंतिम संस्कार गांव से बाहर करवाने की अनुमति दी.